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जोंस मिल मामला: पुलिस की लापरवाही से आरोपी पक्ष के प्रार्थनापत्र पर स्थानांतरित हो गई जांच

Sat, 05 Jun 2021 11:00 AM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा Published by: मुकेश कुमार Updated Sat, 05 Jun 2021 11:00 AM IST
सार

जोंस मिल मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। मिल की करोड़ों रुपये की जमीन को खुर्दबुर्द करने के केस की जांच आर्थिक अपराध अनुसंधान शाखा में यूं ही नहीं स्थानांतरित हो गई। इसके पीछे  पुलिस की लापरवाही रही है। 

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jones mill investigation transferred to economic offences wing due to negligence of the police in agra
जोंस मिल में पड़ा मलबा (फाइल) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

आगरा के जोंस मिल केस में पुलिस की बड़ी लापरवाही सामने आई है। तीन महीने में केस में चार्जशीट नहीं लगाई गई। इसका फायदा उठाते हुए आरोपी बिल्डर हेमेंद्र अग्रवाल उर्फ चुनमुन के परिवार व की महिला ने प्रार्थनापत्र दे दिया। 27 मई को केस की विवेचना आर्थिक अपराध अनुसंधान शाखा में स्थानांतरित हो गई। इससे पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठ रहे हैं। उधर, ईओडब्ल्यू विवेचक ने विवेचना शुरू कर दी है। केस डायरी को कब्जे में लेकर उसका अध्ययन शुरू कर दिया है। अब नए सिरे से जांच की जा रही है।

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19 जुलाई 2020 को जोंस मिल की जमीन पर बम धमाका हुआ था। इससे यह सुर्खियों में आई थी। बम धमाका केस में मुख्य आरोपी मैना गेट, पथवारी, छत्ता निवासी रज्जो जैन को बनाया गया। उस पर गैंगस्टर की कार्रवाई की गई। उसकी छह करोड़ से अधिक की संपत्ति को जब्त किया गया। इससे पहले एक और केस रज्जो जैन, कंवलदीप सिंह और बिल्डर हेमेंद्र अग्रवाल उर्फ चुनमुन के खिलाफ दर्ज हुआ। 
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यह केस डीएम की जांच समिति की रिपोर्ट के बाद लेखपाल ने दर्ज कराया। इसमें धोखाधड़ी की धारा लगाई गई। आरोप था कि जोंस मिल की जमीन को खुर्दबुर्द करने में तीनों का हाथ है। उन्होंने जमीनों को बेचा। पुलिस ने आरोपी बिल्डर को हरिद्वार से गिरफ्तार किया। आरोपी रज्जो जैन और सरदार कंवलदीप सिंह को अग्रिम जमानत मिल गई। इस केस के दर्ज होने के तीन महीने बाद भी पुलिस चार्जशीट नहीं लगा सकी।
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पुलिस ने बताया कि बिल्डर हेमेंद्र अग्रवाल उर्फ चुनमुन के परिवार की महिला ने विवेचना स्थानांतरित कराने के लिए प्रार्थनापत्र शासन में दिया था। इसके बाद ही विवेचना को आर्थिक अपराध अनुसंधान शाखा में भेजा गया। चर्चा है कि केस स्थानांतरित कराने में जनप्रतिनिधियों का भी दबाव काम आया। 

jones mill investigation transferred to economic offences wing due to negligence of the police in agra
जोंस मिल प्रकरण का आरोपी बिल्डर चुनमुन - फोटो : अमर उजाला

पुलिस की लापरवाही
बम धमाके के केस में बिल्डर चुनमुन का नाम बढ़ाया गया। इसमें साजिश में शामिल होने का आरोप लगाया गया। बाद में विधिक राय के आधार पर निकाला गया। विवेचक की लापरवाही सामने आई। उसके खिलाफ निलंबन की कार्रवाई हुई। इसके बाद जांच के आदेश हुए। मगर, जांच पूरी नहीं हो सकी। आज तक जांच का पता नहीं चला। 

जमीन खुर्दबुर्द केस में पुलिस की लापरवाही ने आरोपियों को बचने का मौका दिया। बिल्डर हेमेंद्र अग्रवाल उर्फ चुनमुन को हरिद्वार से पकड़ा। उसे जेल भेजा गया। बाद में रज्जो जैन और सरदार कंवलदीप सिंह की गिरफ्तारी के लिए दबिश का दावा किया। मगर, केस डायरी में कमी की गई। पुलिस ने कई दिन बाद भी घटनास्थल का निरीक्षण नहीं किया। इसका फायदा आरोपियों को कोर्ट में मिला। कोर्ट ने रज्जो जैन और सरदार कंवलदीप सिंह को अग्रिम जमानत दी। बाद में बिल्डर को भी जमानत मिल गई।

जमीन खुर्दबुर्द केस में तीन महीने बाद भी चार्जशीट नहीं लगाई है। इससे आरोपी पक्ष की ओर से प्रार्थनापत्र दिया गया। विवेचना स्थानांतरित करने की मांग की। पुलिस प्रशासनिक अधिकारी कुछ करते, उससे पहले ही विवेचना ईओडब्ल्यू चली गई।

पुलिस ने जमीन खुर्दबुर्द केस में मामूली धारा लगाईं। बाद में छीछालेदर होने पर केस में धारा की वृद्धि की गई। इसके बावजूद केस डायरी कमजोर रखी गई, जबकि इस केस की समीक्षा अधिकारी तक कर रहे थे।

जांच के स्थानांतरण पर उठे सवाल
20 लाख से अधिक के मामलों में जांच ईओडब्ल्यू में स्थानांतरित की जा सकती है। मगर, आगरा के कई बड़े मामलों में ऐसा नहीं हुआ। इसमें नाथ का बाग का मामला शामिल है। नाथ का बाग में भी फर्जी तरीके से जमीनों को बेचा गया। जोंस मिल मामले में आरोपी पक्ष की ओर से प्रार्थनापत्र पर विवेचना स्थानांतरित होने से कई सवाल खड़े हो गए हैं। 

जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी बसंत गुप्ता ने बताया कि आमतौर पर जो नियम है और जो व्यवहारिक पहलू है, उसके अनुसार अभियुक्त के प्रार्थनापत्र पर विवेचना स्थानांतरित नहीं की जाती है। पीड़ित पक्ष के अनुरोध पर निष्पक्ष विवेचना के लिए किसी भी एजेंसी से जांच कराई जा सकती है। पूर्व में हाईकोर्ट के एक जजमेंट के बाद शासन ने भी इस संबंध निर्देश दिए थे कि अभियुक्त के प्रार्थनापत्र पर विवेचना स्थानांतरित नहीं होनी चाहिए।

सोमवार को आएगी ईओडब्ल्यू की टीम
ईओडब्ल्यू की टीम ने केस डायरी कब्जे में ले ली है। उसका अध्ययन किया जा रहा है। इसमें क्या लिखा गया है। इसके बाद विवेचना की जाएगी। इसमें देखा जा रहा है कि वर्षों से जमीनों की खरीद-फरोख्त की गई तो संबंधित विभाग क्या कर रहे थे, रजिस्ट्री कैसे हो गईं, किन-किन लोगों ने जमीन बेची और किन लोगों ने जमीन खरीदीं, पुलिस ने अब तक विवेचना में क्या पाया, जिन लोगों के बयान लेने होंगे, उनको नोटिस देकर बुलाया जाएगा। सोमवार को फिर से टीम आगरा आएगी। केस से संबंधित दस्तावेज भी कब्जे में लेगी।

विवेचना की जाएगी
ईओडब्ल्यू कानपुर के एसएपी बाबूराम ने बताया कि जोंस मिल की जमीन से संबंधित मुकदमे की केस डायरी को कब्जे में ले लिया गया है। इसे देखा जा रहा है। विवेचना की जाएगी। सभी तथ्यों को केस में शामिल किया जाएगा। संबंधित लोगों के बयान दर्ज किए जाएंगे। 

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