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पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित होगा जोधपुर झाल, यमुना को भी मिलेगी 'जीवन धार'
Thu, 05 Sep 2019 01:21 PM IST
मुकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: मुकेश कुमार
Updated Thu, 05 Sep 2019 01:21 PM IST
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जोधपुर झाल
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फतेहपुर सीकरी क्षेत्र में बने जोधपुर झाल में पानी रोकने के लिए सैल्यूस गेट लगाए जाएंगे। चार महीने जल संकट के दौरान इस झील से पानी यमुना में छोड़ा जा सकेगा। सिंचाई विभाग जोधपुर झाल को पर्यटन केंद्र बनाने की योजना बना रहा है।
योजना के तहत जोधपुर झाल का बंधा पक्का कर झील के किनारे बेंच लगाई जाएंगी। बता दें कि मानसून से पहले अमर उजाला ने जोधपुर झाल को कृत्रिम झील बनाकर पानी रोकने की मुहिम को आवाज दी थी।
जलाधिकार फाउंडेशन ने सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता अवधेश शर्मा से इस संबंध में मुलाकात की। जलाधिकार के अध्यक्ष डा. अनुराग शर्मा ने बताया कि चार सैल्यूस गेट लगाकर पानी को रेगुलेट करने की मांग थी, जिस पर सिंचाई विभाग काम शुरू कर रहा है।
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योजना के तहत जोधपुर झाल का बंधा पक्का कर झील के किनारे बेंच लगाई जाएंगी। बता दें कि मानसून से पहले अमर उजाला ने जोधपुर झाल को कृत्रिम झील बनाकर पानी रोकने की मुहिम को आवाज दी थी।
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जलाधिकार फाउंडेशन ने सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता अवधेश शर्मा से इस संबंध में मुलाकात की। जलाधिकार के अध्यक्ष डा. अनुराग शर्मा ने बताया कि चार सैल्यूस गेट लगाकर पानी को रेगुलेट करने की मांग थी, जिस पर सिंचाई विभाग काम शुरू कर रहा है।
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55 हेक्टेयर में फैला है जोधपुर झाल
अधिशासी अभियंता अवधेश शर्मा ने बताया कि जोधपुर झाल के लिए प्रस्ताव बनाए जा रहे हैं। बारिश और कैनाल का पानी इसमें रुक पाएगा। बता दें कि जोधपुर झाल 55 हेक्टेयर में फैला हुआ है, जिसमें 1100 मीटर लंबा मिट्टी का बंधा है।
फतेहपुर सीकरी के सांसद राजकुमार चाहर ने बताया कि इस कृत्रिम झील को विकसित कराना मेरी प्राथमिकता है। प्रधानमंत्री जलशक्ति पर जोर दे रहे हैं। जल संरक्षण के साथ यह झील यमुना में पानी के संकट के समय मददगार होगी। सिंचाई विभाग से जल्द काम शुरू कराया जाएगा:
ब्रिटिश काल में आगरा कैनाल से परिवहन वाले पानी के जहाज जोधपुर झाल ही रुकते थे। इस कृत्रिम झील में 1875 की पट्टिका लगी है। बाद में आगरा कैनाल का परिवहन की जगह केवल सिंचाई के लिए इस्तेमाल शुरू हो गया।
फतेहपुर सीकरी के सांसद राजकुमार चाहर ने बताया कि इस कृत्रिम झील को विकसित कराना मेरी प्राथमिकता है। प्रधानमंत्री जलशक्ति पर जोर दे रहे हैं। जल संरक्षण के साथ यह झील यमुना में पानी के संकट के समय मददगार होगी। सिंचाई विभाग से जल्द काम शुरू कराया जाएगा:
ब्रिटिश काल में आगरा कैनाल से परिवहन वाले पानी के जहाज जोधपुर झाल ही रुकते थे। इस कृत्रिम झील में 1875 की पट्टिका लगी है। बाद में आगरा कैनाल का परिवहन की जगह केवल सिंचाई के लिए इस्तेमाल शुरू हो गया।