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कूड़े के ढेर में मिलीं बच्चियों से महकेंगे इटली और फ्रांस

Wed, 06 Dec 2017 10:14 AM IST
पुनीत शर्मा/ रामकुमार रौतेला, अमर उजाला
पुनीत शर्मा/ रामकुमार रौतेला, अमर उजाला Updated Wed, 06 Dec 2017 10:14 AM IST
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Italy and France family adopted abandoned child in uttar pradesh cities

कोई कूड़े के ढेर में पड़ी मिली थी तो किसी को मंदिर के पास छोड़ दिया गया था। किसी को कोई चौराहे पर रोता छोड़ गया तो कोई पेड़ के नीचे कपड़े में लिपटी पाई गई थी। मजबूरी जो भी रही हो लेकिन जन्म लेने के बाद इन मासूमों को मां का आंचल और उसकी ममता नहीं मिली।

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इसके बाद नसीब इन्हें अनाथालय के दरवाजे तक ले गया। सालों से मथुरा के शिशु सदन में पल रहीं इन अनाथ बच्चियों की किस्मत ऐसी चमकी है कि वे सात सुमंदर पार जा रही हैं। इनमें दो बच्चियों को इटली के परिवार ने गोद लिया है जबकि एक बच्ची को फ्रांस के दंपति ने गोद लिया है। 
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छह साल की हो चुकी दुर्गा 2012 में इलाहाबाद में एक चौराहे पर पुलिस को मिली थी। इस बच्ची को लालन-पालन के लिए मथुरा के शिशु सदन में भेज दिया गया था। यहीं इस मासूम का नामकरण हुआ। इसे दुर्गा नाम से पुकारा जाता है। दुर्गा को फ्रांस के परिवार ने गोद लिया है।
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गोद लेने वाली महिला डाक्टर है जबकि उनके पति स्वीमिंग पूल चलाते हैं। गोद लेने की सभी कानूनी औपचारिकताएं पूरी कर ली गईं हैं। जल्द ही दुर्गा फ्रांस चली जाएगी। पांच साल की हो चुकी सुमन 2013 में नोएडा में लावारिस हालत में मिली थी। सुमन बहुत ही चंचल है। 

कई दसूरी बच्चियों के लिए भी आ रहे आवेदन

Italy and France family adopted abandoned child in uttar pradesh cities
प्रतीकात्मक तस्वीर

बच्चों को गोद दिलाने वाली संस्था कारा ने इसके फोटो वेबसाइट पर डाले थे। इटली के परिवार को सुमन इतनी पसंद आई कि वह उसे गोद लेने के लिए इंडिया आ गए। सभी कानूनी प्रक्रियाओं को पूरा कर लिया गया है। सुमन भी जल्द ही इटली चली जाएगी। सुमन को गोद लेने वाले दंपति इंजीनियर हैं।

छह साल की लाली को मथुरा में ही सड़क पर एक चौराहे से बरामद किया गया था। वह भी 2013 से शिशु सदन में रह रही है। उसे भी एक फ्रांस के दंपति ने गोद ले लिया है। जिला प्रोवेशन अधिकारी अनुराग श्याम रस्तोगी का कहना है कि कारा (सेंट्रल एडॉप्शन रिर्सोसेस अथॉरिटी) भारत सरकार की संस्था है।

इकाई के नाम से कारा की एक साइट खुली हुई है। इस संस्था से जुड़ीं एजेंसियां सभी देशों में हैं। इन एजेंसियों के माध्यम से ही कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद बच्चे गोद दिए जाते हैं। इन तीन बच्चियों को गोद लेने वाले विदेशियों ने सारी प्रक्रिया पूरी कर ली है। फरवरी तक यह बच्चियां विदेश चली जाएंगी।  

मथुरा शिशु सदन में 43 बच्चे रह रहे हैं। इनमें करीब पांच बच्चियों के लिए और आवेदन आ रहे हैं। कारा की वेबसाइट पर फोटो देखकर बच्चियों को पसंद कर लिया गया है। इनकी वीडियो और मांगी जा रही है। बच्चियों की आवाज भी सुनी जाती है। गोद लेने वाले बच्चों की सभी एक्टिविटी भी वीडियो के माध्यम से देखते हैं। 

इन जिलों में मिलीं थीं बच्चियां
गाजियाबाद, नोएडा, अलीगढ़, हाथरस, मथुरा, इटावा, इलाहाबाद, बुलंदशहर, मेरठ।

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