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डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय : फर्जी प्रमाणपत्रों की कल से शुरू होगी जांच
Sun, 28 Feb 2021 11:53 AM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Sun, 28 Feb 2021 11:53 AM IST
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डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय आगरा
- फोटो : अमर उजाला
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डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय प्रशासन, विशेष जांच दल (एसआईटी) की ओर से जारी बीएड सत्र 2004-05 के 1084 फर्जी प्रमाणपत्रों की जांच सोमवार से शुरू करा देगा। जुलाई 2020 में बनाई गई कमेटी ही मामले की जांच करेगी। रिपोर्ट के लिए लिए करीब डेढ़ माह का समय दिया जाएगा।
कुलपति प्रो. अशोक मित्तल का कहना है कि हाईकोर्ट ने फर्जी प्रमाणपत्रों की जांच करने के लिए चार माह समय दिया है। जांच के लिए कमेटी की घोषणा 29 जुलाई 2020 को कार्य परिषद की बैठक में ही कर दी गई थी, उसी से जांच कराई जाएगी। इसमें चार संकायों के डीन प्रो. मनोज श्रीवास्तव, प्रो. पीके सिंह, प्रो. लवकुश मिश्रा, प्रो. एचबी सिंह को रखा गया था। इनके सहयोग के लिए ओएस अजय कुलश्रेष्ठ को लगाया गया था। इसी कमेटी ने अपना पक्ष रखने वाले फर्जी प्रमाणपत्रों की सूची में शामिल 814 की जांच करके रिपोर्ट दी थी।
कमेटी तो बना दी गई थी पर टेंपर्ड प्रमाणपत्रों की जांच शुरू नहीं हो सकी। जांच के आदेश होने के कुछ दिन बाद ही हाईकोर्ट का निर्णय आने पर विवि प्रशासन ने 2823 अभ्यर्थियों को फर्जी घोषित किए जाने के आदेश को निरस्त कर दिया था। इसके बाद फर्जी प्रमाणपत्रों की जांच भी आगे नहीं बढ़ी। कुलपति का कहना है कि वह सोमवार से जांच शुरू करा देंगे। प्रो. एचबी सिंह की जगह मौजूदा डीन आर्ट प्रो. यूसी शर्मा को कमेटी में रखा जाएगा। करीब डेढ़ माह का समय जांच करने के लिए दिया जाएगा।
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कुलपति प्रो. अशोक मित्तल का कहना है कि हाईकोर्ट ने फर्जी प्रमाणपत्रों की जांच करने के लिए चार माह समय दिया है। जांच के लिए कमेटी की घोषणा 29 जुलाई 2020 को कार्य परिषद की बैठक में ही कर दी गई थी, उसी से जांच कराई जाएगी। इसमें चार संकायों के डीन प्रो. मनोज श्रीवास्तव, प्रो. पीके सिंह, प्रो. लवकुश मिश्रा, प्रो. एचबी सिंह को रखा गया था। इनके सहयोग के लिए ओएस अजय कुलश्रेष्ठ को लगाया गया था। इसी कमेटी ने अपना पक्ष रखने वाले फर्जी प्रमाणपत्रों की सूची में शामिल 814 की जांच करके रिपोर्ट दी थी।
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कमेटी तो बना दी गई थी पर टेंपर्ड प्रमाणपत्रों की जांच शुरू नहीं हो सकी। जांच के आदेश होने के कुछ दिन बाद ही हाईकोर्ट का निर्णय आने पर विवि प्रशासन ने 2823 अभ्यर्थियों को फर्जी घोषित किए जाने के आदेश को निरस्त कर दिया था। इसके बाद फर्जी प्रमाणपत्रों की जांच भी आगे नहीं बढ़ी। कुलपति का कहना है कि वह सोमवार से जांच शुरू करा देंगे। प्रो. एचबी सिंह की जगह मौजूदा डीन आर्ट प्रो. यूसी शर्मा को कमेटी में रखा जाएगा। करीब डेढ़ माह का समय जांच करने के लिए दिया जाएगा।
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जांच में विवि के कर्मचारी भी फंसेंगे
फर्जी प्रमाणपत्रों की जांच में विश्वविद्यालय के कर्मचारी और संबंधित एजेंसी भी फंसेंगी। एसआईटी ने जांच में चार्ट और अंकपर्ण के रोलनंबरों का मिलान किया। पाया कि अंकपर्ण में नंबर कम और चार्ट में अधिक थे। चार्ट में नंबर बढ़ाए गए। उसी के हिसाब से छात्र-छात्राओं को अंकतालिका दी गई। एजेंसी ने किस अंकपर्ण के आधार पर अंक बढ़ाया, उसे दिखाना होगा। वहीं, चार्ट विश्वविद्यालय में किस कर्मचारी के दायित्व में रखे गए थे, वह भी जांच के दायरे में आएगा।
जो भी दोषी होगा, छोड़ा नहीं जाएगा
कुलपति प्रो. अशोक मित्तल का कहना है कि जांच में जो भी दोषी पाया जाता है, उसे छोड़ा नहीं जाएगा, फिर वह कोई भी होगा। इन फर्जीवाड़ों से विश्वविद्यालय की छवि धूमिल हुई है।
अपना पक्ष रखकर बच गए थे 171 शिक्षक
जिले के परिषदीय स्कूलों में तैनात शिक्षक डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय में अपना पक्ष रखकर बचे हुए थे। पक्ष रखने वाले 814 में से दो एक्स-स्टूडेंट थे। बाकी 812 को विश्वविद्यालय ने फर्जी घोषित किया पर कोर्ट के निर्णय के बाद इस सूची में शामिल परिषदीय स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई। बेसिक शिक्षा विभाग ने फर्जी प्रमाणपत्र वाले 195 शिक्षकों की तलाश की थी। इसमें से 24 उन शिक्षकों की सेवा समाप्त की थी, जिनके नाम सात फरवरी 2020 को विश्वविद्यालय की ओर से फर्जी घोषित किए गए 2823 अभ्यर्थियों की सूची में थे। 171 अपना पक्ष रखकर बचे हुए थे। इन पर कार्रवाई के लिए बेसिक शिक्षा विभाग शासन स्तर से निर्देश जारी होने के इंतजार में है।
फर्जी प्रमाणपत्रों की जांच में विश्वविद्यालय के कर्मचारी और संबंधित एजेंसी भी फंसेंगी। एसआईटी ने जांच में चार्ट और अंकपर्ण के रोलनंबरों का मिलान किया। पाया कि अंकपर्ण में नंबर कम और चार्ट में अधिक थे। चार्ट में नंबर बढ़ाए गए। उसी के हिसाब से छात्र-छात्राओं को अंकतालिका दी गई। एजेंसी ने किस अंकपर्ण के आधार पर अंक बढ़ाया, उसे दिखाना होगा। वहीं, चार्ट विश्वविद्यालय में किस कर्मचारी के दायित्व में रखे गए थे, वह भी जांच के दायरे में आएगा।
जो भी दोषी होगा, छोड़ा नहीं जाएगा
कुलपति प्रो. अशोक मित्तल का कहना है कि जांच में जो भी दोषी पाया जाता है, उसे छोड़ा नहीं जाएगा, फिर वह कोई भी होगा। इन फर्जीवाड़ों से विश्वविद्यालय की छवि धूमिल हुई है।
अपना पक्ष रखकर बच गए थे 171 शिक्षक
जिले के परिषदीय स्कूलों में तैनात शिक्षक डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय में अपना पक्ष रखकर बचे हुए थे। पक्ष रखने वाले 814 में से दो एक्स-स्टूडेंट थे। बाकी 812 को विश्वविद्यालय ने फर्जी घोषित किया पर कोर्ट के निर्णय के बाद इस सूची में शामिल परिषदीय स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई। बेसिक शिक्षा विभाग ने फर्जी प्रमाणपत्र वाले 195 शिक्षकों की तलाश की थी। इसमें से 24 उन शिक्षकों की सेवा समाप्त की थी, जिनके नाम सात फरवरी 2020 को विश्वविद्यालय की ओर से फर्जी घोषित किए गए 2823 अभ्यर्थियों की सूची में थे। 171 अपना पक्ष रखकर बचे हुए थे। इन पर कार्रवाई के लिए बेसिक शिक्षा विभाग शासन स्तर से निर्देश जारी होने के इंतजार में है।