इंटीग्रेटेड रोड एक्सीडेंट डेटाबेस: दुपहिया वाहन चालक क्यों हो रहे हादसों का शिकार, सबसे बड़ी है ये वजह
सड़क दुर्घटनाओं पर लगाम नहीं लग पा रही है। ये आलम तब है जब पुलिस और परिवहन विभागके अधिकारी जमकर चालान भी कर रहे हैं और सख्ती भी। इंटीग्रेटेड रोड एक्सीडेंट डेटाबेस की समीक्षा में पता चला है कि इस साल साइड मिरर की अनदेखी से 100 से अधिक ने जान गंवाई है।
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मथुरा में दुपहिया और चौपहिया वाहनों में सुरक्षा के लिहाज से वाहन कंपनियां साइड मिरर लगाकर देती हैं, लेकिन दोपहिया वाहन चालक शोबाजी के चक्कर में इन्हें हटा देते हैं। नतीजतन घातक परिणाम सामने आ रहे हैं। दुपहिया चालकों के साथ होने वाले कुल हादसों में से 20 प्रतिशत साइड मिरर की अनदेखी के कारण हो रहे हैं। इंटीग्रेटेड रोड एक्सीडेंट डेटाबेस (आईरेड) के सर्वे में इसका खुलासा हुआ है। साइड मिरर न होने के कारण पीछे से आ रहे वाहनों का चालक अंदाजा नहीं लगा पाते और हादसा हो जाता है। परिवहन विभाग ने अब ऐसे दुपहिया चालकों पर शिकंजा कसने की तैयारी की है। आरटीओ ने निर्देश जारी किया है कि बिना साइड मिरर के चल रहे दुपहिया वाहन चालकों का पांच हजार रुपये का चालान काटा जाए।
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एआरटीओ प्रवर्तन ने बताया कि अक्सर देखा जाता है कि दुपहिया वाहन चालक या तो रियर व्यू मिरर को हटा देते हैं या फिर इन्हें ऐसे लगवा लेते हैं कि इनकी उपयोगिता ही खत्म हो जाती है, लेकिन अब ऐसे दुपहिया वाहन चालकों का चालान करना शुरू कर दिया है, जिनमें रियर व्यू मिरर नहीं है। इसकी शुरुआत दिल्ली पुलिस ने की थी और बाद में हैदराबाद में भी पुलिस ने ऐसे दुपहिया वाहनों का चालान करना शुरू कर दिया। मोटर वाहन अधिनियम 1988 के अनुसार दुपहिया वाहनों पर रियर व्यू लगा होना अनिवार्य है। उन्होंने बताया कि साइड मिरर की अनदेखी जान पर भारी पड़ रही है। इस साल जनवरी से अब तक करीब 400 लोगों की सड़क हादसों में मौत हो चुकी है। आईरेड डेटाबेस के अनुसार 100 से अधिक मौतें साइड मिरर की अनदेखी के कारण हुई हैं।