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ट्रक से कुचलकर मासूम की मौत: 12 घंटे तक पोस्टमार्टम का इंतजार करता रहा गम में डूबा परिवार, तब आए डॉक्टर

Tue, 12 Mar 2024 09:03 AM IST
धीरेन्द्र सिंह अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा Published by: धीरेन्द्र सिंह Updated Tue, 12 Mar 2024 09:03 AM IST
सार

सदर में ट्रक से कुचलकर मासूम की मौत के बाद गम में डूबे परिवार को पोस्टमार्टम के लिए 12 घंटे तक इंतजार करना पड़ा।  हेल्पलाइन नंबर पर कॉल करने पर डॉक्टर आए, तब कहीं जाकर पोस्टमार्टम हो सका।
 

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Innocent died after being crushed by truck  grief-stricken family waited for post-mortem for 12 hours
ट्रक से कुचलकर मासूम की मौत - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

आगरा के नगला पदमा (सदर) में रविवार रात को ट्रक हादसे में इकलौते बेटे भोलू की मौत के बाद गम में डूबे परिवार को 12 घंटे तक पोस्टमार्टम के लिए इंतजार करना पड़ा। सोमवार दोपहर 1 बजे तक डॉक्टर नहीं आए। इस पर परिवार वालों ने परिसर में लिखे हेल्पलाइन नंबर पर कॉल किए। तब दोपहर 2 बजे डॉक्टर ने आकर पोस्टमार्टम किया। सरकारी लापरवाही से परिजन में दोगुना गुस्सा था। वह व्यवस्था को कोस रहे थे। उधर, बेटे की मौत से मां-पिता का हालबेहाल है।
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खेरागढ़ के गांव गोरऊ निवासी नीरज टाइल्स-पत्थर के कारीगर हैं। वह हरियाणा में काम करते हैं। उनके चाचा हरी सिंह के बेटे विष्णु का रविवार को लगन टीके का कार्यक्रम था। चाचा नगला पदमा में रहते हैं। कार्यक्रम सेठ गार्डन में आयोजित हुआ था। रात तकरीबन 12:45 बजे नीरज का सात साल का बेटा भोलू मां श्रीदेवी के साथ चाचा के घर जा रहा था। तभी हादसा हुआ था। तेज गति से ओवरटेक करते ट्रक ने रौंद दिया था। भोलू की मौके पर ही मौत हो गई थी।
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घटना के बाद गुस्साए लोगों ने हंगामा किया था। कई वाहनों में तोड़फोड़ कर दी थी। ग्वालियर हाईवे पर जाम लगाया था। पुलिस ने किसी तरह परिजन को समझाकर रात तकरीबन 1:30 बजे शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा था। परिजन रात में ही पोस्टमार्टम गृह पहुंच गए थे। बच्चे के पिता नीरज ने बताया कि गांव के लोग भी आ गए थे। मगर, रात में डॉक्टर नहीं थे। इस कारण पोस्टमार्टम शुरू नहीं हो सका।

 

पुलिस ने सोमवार सुबह भी 11 बजे तक सभी कागजी प्रक्रिया पूरी कर दी। मगर, डॉक्टर की लापरवाही जारी रही। पोस्टमार्टम गृह में कर्मचारियों से बात करने पर कोई जवाब नहीं किया। वह बार-बार शव जल्दी देने की कहते रहे, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। बाद में उन्होंने हेल्पलाइन नंबर पर कॉल किया। दोपहर 1 बजे बाद डॉक्टर आए। 2 बजे के बाद उन्हें शव मिल सका। सरकारी लापरवाही से बेटे की मौत गम दोगुना हो गया।
 
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