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वैराग्य में दुखों से भागते नहीं, उसे जीता जाता है

Thu, 12 Aug 2021 01:33 AM IST
Agra Bureau आगरा ब्यूरो
Updated Thu, 12 Aug 2021 01:33 AM IST
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'In dispassion one does not run away from sorrows, victory is achieved over it'
एमडी जैन इंटर कॉलेज में प्रवचन सुनते जैन समाज के लोग - फोटो : Agra City
आगरा। एमडी जैन इंटर कॉलेज मैदान में चल रही पार्श्वकथा में बुधवार को मुनि प्रणम्य सागर महाराज ने कहा कि राजा आनंद को दर्पण में सफेद बाल देखकर वैराग्य हो गया। उन्होंने वैराग्य उत्पन्न होने की विभिन्न वजहों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि कभी दुखों से भागकर वैराग्य नहीं लेना चाहिए, वह स्थायी नहीं होता। जिन चीजों से व्यक्ति भागता है, वह उसका पीछा करती रहती हैं। वैराग्य में दुखों से भागते नहीं, उस पर जीत दर्ज की जाती है।
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मुनिश्री ने कहा कि आपको सच्चा वैराग्य होगा तो आप कष्ट को कष्ट नहीं समझोगे। इसमें इंद्रियों पर जीत दर्ज करनी होती है। इसलिए इसे ‘जिन’ का मार्ग, भगवान जिनेंद्र का मार्ग कहते हैं। मंगलाचरण एवं भक्ति नृत्य की प्रस्तुति ट्रांस यमुना शैली की ओर से किया गया। चित्र अनावरण राजेश जैन, अभय जैन, कुमार मंगलम जैन ने किया। मुनिश्री का पाद प्रक्षालन गौरव जैन चौधरी, सर्वेश कुमार जैन ने किया। मंच का संचालन मनोज जैन ने किया। मीडिया प्रभारी शुभम जैन ने बताया कि प्रतिदिन दोपहर तीन बजे मुनि चंद्र सागर महाराज के सानिध्य में बच्चों की पाठशाला लगाई जा रही है।
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आगरा। मुनि वीर सागर महाराज ने बुधवार को निर्मल सदन, छीपीटोला में प्रवचन कहा कि सपने हमेशा ऊंचे देखने चाहिए, जैसे-मैं भी भगवान पारसनाथ की तरह बन जाऊं, मैं भी भगवान के मंदिर का निर्माण कराऊं। अनुकूलता में रहकर ही उन्नति नहीं हो सकती।
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मुनिश्री ने कहा कि अपने आप को संघर्ष रूपी भट्टी में झोंकने के लिए तैयार रहो, जो व्यक्ति तपिश और चोट को सहन कर सकता है, वह अपनी खोट को निकाल सकता है। वह व्यक्ति उन्नति कर सकता है, जिसको पारस की तरह बनना है। उन्होंने कहा कि व्यक्ति के जीवन में गुरु सीप की तरह होते हैं, उनके चरणों में समर्पित कर दो तो मोती की तरह निकलोगे।

आगरा। महावीर भवन, न्यू राजामंडी में बुधवार को आचार्य ज्ञान चंद्र महाराज ने प्रवचन में कहा कि नियम छोटा हो या बड़ा। इसके पालन में इंसान को पक्का रहना चाहिए। तभी उस नियम की विशेषता फलीभूत होती है। धर्म का नियम हो या अन्य कोई काम लक्ष्य के प्रति निश्चय व समर्पण होना चाहिए। उन्होंने महात्मा गांधी के आजमगढ़ में प्रवास के दौरान एक प्रेरक प्रसंग भी सुनाया। कार्यक्रम में संजय सुराना परिवार की ओर से गायों के लिए 800 किलो चारा और एक टीन रिफाइंड रामलाल वृद्धाश्रम को भेंट किया गया। कार्यक्रम में संदेश जैन मौजूद रहे।
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