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Agra News: सत्संग में बताया मानव जीवन का महत्व
Sun, 05 May 2024 06:54 PM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
Updated Sun, 05 May 2024 06:54 PM IST
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सत्संग में बताया मानव जीवन का महत्व
- कबीर आश्रम में प्रवचन में बोले महंत, मनुष्य जैसे काम भी करो
संवाद न्यूज एजेंसी
मैनपुरी। कबीर आश्रम पर रविवार को महंत अमर साहेब ने प्रवचन दिए। महंत ने कहा कि सच्चा मनुष्य वही है जो मुनष्य के लिए जिये। मनुष्य का जन्म लेकर मनुष्य जैसे काम न करना मानव को गर्त में ले जाने का कार्य करता है। इसलिए मनुष्य हो तो मनुष्य जैसे काम भी करो।
महंत ने कहा कि मानव का बच्चा मानव के रूप में जन्म तो लेता है लेकिन मानव होकर जी नहीं पाता। यहां तक कि मानव मानव रूप में मर भी नहीं पाता। महंत ने उदाहरण देते हुए कहा कि मलियागिर एक पर्वत है। उस पर जो भी वृक्ष उग आता है वह चंदन बन जाता है। लेकिन इसी पर्वत पर उगने वाला बांस कभी चंदन नहीं बन पाता। उन्होंने बताया कि बांस में जगह-जगह अहंकार रूपी गांठ होती है और वह पोला भी होता है इसके कारण वह चंदन नहीं बन सकता।
महंत ने उदाहरण देते हुए कहा कि इसी प्रकार से जो व्यक्ति सत्संग में बैठा है लेकिन उसके हृदय में छल, कपट रूपी गांठें हैं वो कभी सत्संग का भाव अपने जीवन में पैदा नहीं कर सकता। महंत ने कहा कि सत्य और धर्म में ढाई अक्षर आते हैं जबकि असत्य और अधर्म में साढ़े तीन अक्षर आते हैं। तीन में बहुत माना जाता है लेकिन सत्य और धर्म में ढ़ाई अक्षर ही है लेकिन इसके बिना काम नहीं चल सकता।
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- कबीर आश्रम में प्रवचन में बोले महंत, मनुष्य जैसे काम भी करो
संवाद न्यूज एजेंसी
मैनपुरी। कबीर आश्रम पर रविवार को महंत अमर साहेब ने प्रवचन दिए। महंत ने कहा कि सच्चा मनुष्य वही है जो मुनष्य के लिए जिये। मनुष्य का जन्म लेकर मनुष्य जैसे काम न करना मानव को गर्त में ले जाने का कार्य करता है। इसलिए मनुष्य हो तो मनुष्य जैसे काम भी करो।
महंत ने कहा कि मानव का बच्चा मानव के रूप में जन्म तो लेता है लेकिन मानव होकर जी नहीं पाता। यहां तक कि मानव मानव रूप में मर भी नहीं पाता। महंत ने उदाहरण देते हुए कहा कि मलियागिर एक पर्वत है। उस पर जो भी वृक्ष उग आता है वह चंदन बन जाता है। लेकिन इसी पर्वत पर उगने वाला बांस कभी चंदन नहीं बन पाता। उन्होंने बताया कि बांस में जगह-जगह अहंकार रूपी गांठ होती है और वह पोला भी होता है इसके कारण वह चंदन नहीं बन सकता।
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महंत ने उदाहरण देते हुए कहा कि इसी प्रकार से जो व्यक्ति सत्संग में बैठा है लेकिन उसके हृदय में छल, कपट रूपी गांठें हैं वो कभी सत्संग का भाव अपने जीवन में पैदा नहीं कर सकता। महंत ने कहा कि सत्य और धर्म में ढाई अक्षर आते हैं जबकि असत्य और अधर्म में साढ़े तीन अक्षर आते हैं। तीन में बहुत माना जाता है लेकिन सत्य और धर्म में ढ़ाई अक्षर ही है लेकिन इसके बिना काम नहीं चल सकता।
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