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जानलेवा इलाज: दवा के नाम पर पिटाई...खाना मांगने पर भी सजा; सामने आया अवैध नशा मुक्ति केन्द्र का काला सच
Wed, 22 May 2024 01:31 PM IST
धीरेन्द्र सिंह
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Wed, 22 May 2024 01:31 PM IST
सार
आगरा में अवैध नशा मुक्ति केन्द्र पर स्वास्थ्य विभाग ने छापा मारा, तो यहां इलाज के नाम पर हो रही बर्बरता का खौफनाक चेहरा सामने आया। दवा के नाम पर मरीजों की पिटाई और खाना मांगने पर भी सजा दी जाती है। इतना ही नहीं यहां इलाज के लिए कोई डॉक्टर भी तैनात नहीं मिले। ऐसे में सवाल ये उठता है कि आखिर ये कैसा इलाज हो रहा है।
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अवैध नशा मुक्ति केन्द्र का काला सच
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
आगरा में स्वास्थ्य विभाग ने मंगलवार को अवैध नशा मुक्ति केंद्रों पर छापे मारे। एसीएमओ के निर्देशन में राजीव नगर के पहलवान नशा मुक्ति केंद्र और आदेश नगर कॉलोनी स्थित उजाला नशा मुक्ति केंद्र की जांच की। इनमें 57 मरीज भर्ती थे, जिन्होंने स्वास्थ्य विभाग की टीम से पीटने और खाना व दवाएं न देने की शिकायत की।
मरीजों के पास से बीड़ी व तंबाकू भी मिला। स्वास्थ्य विभाग ने नोटिस देने के साथ दो दिन का समय मरीजों को मेडिकल कॉलेज और अन्य अस्पतालों में शिफ्ट करने के लिए दिया है। उसके बाद इन्हें सील किया जाएगा। मंगलवार को एसीएमओ पीयूष जैन की अगुवाई में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने पहलवान नशा मुक्ति केंद्र, राजीव नगर में छापा मारा। यहां केंद्र का रजिस्ट्रेशन नहीं मिला। कोई डाॅक्टर भी नहीं था। सुरेश पाल सिंह इस केंद्र का संचालक था। पांच साल से यह केंद्र संचालित था। टीम को 29 मरीज भर्ती मिले। इन्होंने खाना न देने, मारपीट करने और दवाएं न देने के आरोप लगाए।
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मरीजों के पास से बीड़ी व तंबाकू भी मिला। स्वास्थ्य विभाग ने नोटिस देने के साथ दो दिन का समय मरीजों को मेडिकल कॉलेज और अन्य अस्पतालों में शिफ्ट करने के लिए दिया है। उसके बाद इन्हें सील किया जाएगा। मंगलवार को एसीएमओ पीयूष जैन की अगुवाई में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने पहलवान नशा मुक्ति केंद्र, राजीव नगर में छापा मारा। यहां केंद्र का रजिस्ट्रेशन नहीं मिला। कोई डाॅक्टर भी नहीं था। सुरेश पाल सिंह इस केंद्र का संचालक था। पांच साल से यह केंद्र संचालित था। टीम को 29 मरीज भर्ती मिले। इन्होंने खाना न देने, मारपीट करने और दवाएं न देने के आरोप लगाए।
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15 हजार रुपये हर माह वसूल रहे थे
मऊ स्थित आदेश नगर कॉलोनी में उजाला नशा मुक्ति केंद्र में स्वास्थ्य विभाग को 27 मरीज भर्ती मिले। यह केंद्र अवैध रूप से संचालित था, जिसे सुनील गुलाटी चला रहा था। दिल्ली में इसके नशा मुक्ति केंद्र को सरकार ने बंद करा दिया तो इसने आगरा में शुरू कर दिया। हर मरीज से वह साधारण कमरे के 10 हजार रुपये और एसी कमरे के 15 हजार रुपये वसूल रहा था। यहां भर्ती मरीजों ने मारपीट के आरोप लगाए। बेहद डरे हुए मरीजों ने खाना न मिलने की शिकायत की।
मऊ स्थित आदेश नगर कॉलोनी में उजाला नशा मुक्ति केंद्र में स्वास्थ्य विभाग को 27 मरीज भर्ती मिले। यह केंद्र अवैध रूप से संचालित था, जिसे सुनील गुलाटी चला रहा था। दिल्ली में इसके नशा मुक्ति केंद्र को सरकार ने बंद करा दिया तो इसने आगरा में शुरू कर दिया। हर मरीज से वह साधारण कमरे के 10 हजार रुपये और एसी कमरे के 15 हजार रुपये वसूल रहा था। यहां भर्ती मरीजों ने मारपीट के आरोप लगाए। बेहद डरे हुए मरीजों ने खाना न मिलने की शिकायत की।
परिजन से मरीजों को ले जाने के लिए कहा
सीएमओ डॉ. अरुण श्रीवास्तव ने बताया कि अवैध रूप से चल रहे नशा मुक्ति केंद्रों का निरीक्षण किया गया था। यहां भर्ती मरीजों के परिजन को सूचित कर दिया गया है कि वह अपने मरीजों को किसी अन्य अस्पताल में ले जाएं। दोनों अवैध केंद्रों पर कार्रवाई की जाएगी।
सीएमओ डॉ. अरुण श्रीवास्तव ने बताया कि अवैध रूप से चल रहे नशा मुक्ति केंद्रों का निरीक्षण किया गया था। यहां भर्ती मरीजों के परिजन को सूचित कर दिया गया है कि वह अपने मरीजों को किसी अन्य अस्पताल में ले जाएं। दोनों अवैध केंद्रों पर कार्रवाई की जाएगी।
दिल्ली-हरियाणा का कॉकस चला रहा केंद्र
पहलवान नशा मुक्ति केंद्र का संचालक सुरेश पाल सिंह हरियाणा का है, जबकि सुनील गुलाटी दिल्ली का। दोनों ही अवैध रूप से पांच साल से केंद्र चला रहे थे। पहलवान ने खुद को पथौली का बताया, लेकिन वह हरियाणा निवासी निकला। नशा मुक्ति के नाम पर वह बाहर के मरीजों को भर्ती कर जमकर वसूली कर रहे थे। मरीजों के साथ मारपीट और खाना न देने के साथ शारीरिक और मानसिक उत्पीड़न भी पाया गया।
पहलवान नशा मुक्ति केंद्र का संचालक सुरेश पाल सिंह हरियाणा का है, जबकि सुनील गुलाटी दिल्ली का। दोनों ही अवैध रूप से पांच साल से केंद्र चला रहे थे। पहलवान ने खुद को पथौली का बताया, लेकिन वह हरियाणा निवासी निकला। नशा मुक्ति के नाम पर वह बाहर के मरीजों को भर्ती कर जमकर वसूली कर रहे थे। मरीजों के साथ मारपीट और खाना न देने के साथ शारीरिक और मानसिक उत्पीड़न भी पाया गया।
ये मिलीं खामियां
- रोगियों के इलाज के प्रपत्र ही नहीं थे, न केंद्र का रजिस्ट्रेशन
- केंद्रों पर डॉक्टर तैनात, न स्टाफ, बहुत पुराने मरीज भर्ती मिले
- मानसिक स्वास्थ्य देखरेख अधिनियम का उल्लंघन पाया गया
- मरीजों ने संचालकों पर मारपीट करने की शिकायत दर्ज कराई
- दोनों केंद्रों पर मनोचिकित्सक का परामर्श नहीं मिला, न दवाएं मिलीं
- रोगी को बीड़ी और तंबाकू दी जा रही थी, मरीजों से दोनों जब्त कीं
- एक हॉल में जमीन पर बिस्तर लगाकर मरीजों को एक साथ रखा गया
- स्टाफ नर्स, मनो चिकित्सक, योग शिक्षक की तैनाती ही नहीं मिली
- मरीजों से ही खाना बनवाने, बर्तन धुलवाने, घटिया खाना देने की शिकायत
- इमरजेंसी चिकित्सा की व्यवस्था नहीं, किसी मरीज की केस शीट नहीं
- रोगियों के इलाज के प्रपत्र ही नहीं थे, न केंद्र का रजिस्ट्रेशन
- केंद्रों पर डॉक्टर तैनात, न स्टाफ, बहुत पुराने मरीज भर्ती मिले
- मानसिक स्वास्थ्य देखरेख अधिनियम का उल्लंघन पाया गया
- मरीजों ने संचालकों पर मारपीट करने की शिकायत दर्ज कराई
- दोनों केंद्रों पर मनोचिकित्सक का परामर्श नहीं मिला, न दवाएं मिलीं
- रोगी को बीड़ी और तंबाकू दी जा रही थी, मरीजों से दोनों जब्त कीं
- एक हॉल में जमीन पर बिस्तर लगाकर मरीजों को एक साथ रखा गया
- स्टाफ नर्स, मनो चिकित्सक, योग शिक्षक की तैनाती ही नहीं मिली
- मरीजों से ही खाना बनवाने, बर्तन धुलवाने, घटिया खाना देने की शिकायत
- इमरजेंसी चिकित्सा की व्यवस्था नहीं, किसी मरीज की केस शीट नहीं