Agra News: धूम्रपान न छोड़ा तो हो जाएगी बड़ी समस्या, सिकुड़ जाती हैं नसें, सर्जरी करना होता है मुश्किल
शुगर, ब्लड प्रेशर के मरीजों में नसों की बीमारी की आशंका ज्यादा रहती है। इनको दिनचर्या व्यवस्थित रखने के साथ दवाएं नियमित लेनी चाहिए।
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धूम्रपान नसों का सबसे बड़ा दुश्मन साबित हो रहा है। 20 से 45 वर्ष के बड़ी संख्या में मरीज अस्पताल पहुंच रहे हैं। इनकी बारीक नसें सिकुड़ रही हैं और ब्लॉक हो रही हैं। खास बात यह है कि सर्जरी में समस्या होती है। कई बार अंग काटने की स्थिति बन जाती है। ये बातें डॉ. वीएस वेदी ने होटल ताज कन्वेंशन में कहीं।
बृहस्पतिवार को यहां द वैस्कुलर सोसाइटी ऑफ इंडिया की 29वीं चार दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला शुरू हुई है। आयोजन अध्यक्ष डॉ. वीएस वेदी ने कहा कि शुगर, ब्लड प्रेशर के मरीजों में नसों की बीमारी की आशंका ज्यादा रहती है। इनको दिनचर्या व्यवस्थित रखने के साथ दवाएं नियमित लेनी चाहिए। वैस्कुलर सर्जरी की आधुनिक तकनीक से अब मरीजों का पैर नहीं काटना पड़ रहा है। सर्जरी से उपचार हो रहा है। कार्यशाला में वैस्कुलर (नसों की) बीमारियों की वजह, नए तकनीक, इलाज पर चर्चा की गई। देश व विदेश से 400 से अधिक डॉक्टर प्रतिभाग कर रहे हैं।
आयोजन सचिव डॉ. तपिश साहू ने बताया कि पहले दिन सतत चिकित्सा शिक्षा के तहत 50 वैस्कुलर सर्जन, 20 जनरल सर्जन, 20 नर्स व टेक्नीशियन को नसों से जुड़ी अलग-अलग बीमारी व इलाज के बारे में प्रशिक्षण दिया गया। खून की धमनियों की सूचरिंग (ऑपरेट करना) सिखाया गया। कार्यक्रम में अध्यक्ष निर्वाचित डॉ. पीसी गुप्ता, कोषाध्यक्ष डॉ. अपूर्व श्रीवास्तव, मायो क्लीनिक की डॉ. मंजू कालरा, डॉ. नंदन हल्दीपुर, यूके से आए डॉ. रघु लक्ष्मी नारायण, मस्कट से आए डॉ. एडविन स्टीफन, डॉ. केआर सुरेश, डॉ. रघु लक्ष्मी नारायण, डॉ. सात्विक, डॉ. आशुतोष पांडे आदि की उपस्थिति रही।
देश भर में 750 वैस्कुलर सर्जन
हैदराबाद से आए डॉ. पीसी गुप्ता ने बताया कि देश भर में महज 750 वैस्कुलर सर्जन हैं। जो कि आबादी के अनुपात में कम है। प्रशिक्षण से इस बीमारी के प्रति जागरूकता फैलाने का प्रयास किया जा रहा है। एक्सीडेंट में पैर कटने पर मरीज को वैस्कुलर सर्जन के पास भेजना चाहिए। इसमें देरी नहीं करनी चाहिए।
पैर में भी अटैक पड़ता है
डॉ. संदीप अग्रवाल ने कहा कि पैर में अटैक पड़ता है। पैर ठंडा या नीला पड़ जाता है। जानकारी के अभाव में लोग इसे टालते हैं। एक घंटे के अंदर भी वैस्कुलर सर्जन को दिखा जाए तो वह स्थिति को संभाल सकता है। यदि कुछ समय खड़े रहने पर ही पैरों में थकान और सूजन आ जाती है और नसों में कालापन बढ़ रहा है तो सचेत हो जाएं। यह वैरीकोज वेंस के लक्षण हैं। जिसमें वेरीकोज वेंस के वॉल्व खराब हो जाने से पैरों में नसों के गुच्छे बन जाते हैं।
नसों की बीमारी के ये हैं लक्षण
- चलते समय पैरों की पिंडली में दर्द। रुकने पर आराम मिलना।
- पैर में जख्म हो जाना।
- अंगुली और नाखून में कालापन।
- बैठे-बैठे पैर में दर्द होना, अचानक पैर सुन्न होना।
इन बातों का रखें ध्यान
- तंबाकू और धूम्रपान से बनाएं दूरी।
- प्रतिदिन 5,000-10,000 कदम जरूर चलें।
- खानपान का ध्यान रखें, फास्ट फूड का सेवन न करें।
- ताजा और फाइबर युक्त खाना खाएं।
- शरीर के वजन को संतुलित रखें।