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नाम परिवर्तन कराने वाली इकाईयों को कैसे मिलेगी गैस सप्लाई
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फिरोजाबाद। वर्ष 1996 से इंतजार में बैठी कांच इकाइयों को गैस कोटा प्राप्त करने के लिए कई व्यवहारिक व तकनीकी दुश्वारियों से भी जूझना होगा। खास तौर पर नाम परिवर्तन कराने वाली अथवा औद्योगिक आस्थानों से बाहर स्थापित इकाईयों को गैस सप्लाई देने के संबंध में विगत छह दिसंबर 2019 को जारी सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देश भारी पड़ सकते हैं।
टीटीजेड एरिया में गैस कोटा नहीं मिलने के कारण दो दशकों से बंद चल रही कांच व चूड़ी इकाइयों को गैस कोटा हासिल करने के लिए कई बड़ी बाधाओं का सामना करना होगा। गत छह दिसंबर 2019 को जारी सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुसार गैस सप्लाई लेने के लिए इकाईयां संचालकों को पीसीबी, अग्निशमन विभाग के अतिरिक्त नीरी एवं सेंट्रल प्राधिकृत कमेटी से एनओसी हासिल करनी होगी। जानकारों की माने तो वर्ष 1996 के बाद से जिन इकाइयों में नाम अथवा पार्टनर शिप डीड में किसी तरह को कोई फेरबदल नहीं हुआ है। अथवा जिनमें उत्पादन प्रक्रिया सुचारु थी। केवल वहीं इकाईयां गैस सप्लाई की दौड़ में शामिल की जा सकेंगी हैं।
इंडस्ट्रीरियल एरिया पर संचालित इकाइयों को प्राथमिकता
सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों में कहा गया है कि जो इकाइयां उद्योग विभाग के औद्योगिक आस्थानों एवं अधिकृत रूप से व्यवसायिक स्थलों पर संचालित अथवा स्थापित होंगी। उन्हें भविष्य में गैस सप्लाई देने के लिए प्राथमिकता के आधार पर देखा जाएगा।
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सुरेद्र कुमार शर्मा अधिवक्ता
दिसंबर 1996 में जारी सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देश इकाईयों के स्थानांतरण के संबंध में है। बाकी गैस सप्लाई जारी करने आदि के बारे में टीटीजेड अथॉरिटी को अंतिम निर्णय लेना है। इस लिहाज से गैस सप्लाई से जुड़े जो भी आवेदन मिले हैं। उन्हें टीटीजेड अथॉरिटी को अग्रसारित किया गया है।
अमरेश पांडेय, उपायुक्त उद्योग
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टीटीजेड एरिया में गैस कोटा नहीं मिलने के कारण दो दशकों से बंद चल रही कांच व चूड़ी इकाइयों को गैस कोटा हासिल करने के लिए कई बड़ी बाधाओं का सामना करना होगा। गत छह दिसंबर 2019 को जारी सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुसार गैस सप्लाई लेने के लिए इकाईयां संचालकों को पीसीबी, अग्निशमन विभाग के अतिरिक्त नीरी एवं सेंट्रल प्राधिकृत कमेटी से एनओसी हासिल करनी होगी। जानकारों की माने तो वर्ष 1996 के बाद से जिन इकाइयों में नाम अथवा पार्टनर शिप डीड में किसी तरह को कोई फेरबदल नहीं हुआ है। अथवा जिनमें उत्पादन प्रक्रिया सुचारु थी। केवल वहीं इकाईयां गैस सप्लाई की दौड़ में शामिल की जा सकेंगी हैं।
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इंडस्ट्रीरियल एरिया पर संचालित इकाइयों को प्राथमिकता
सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों में कहा गया है कि जो इकाइयां उद्योग विभाग के औद्योगिक आस्थानों एवं अधिकृत रूप से व्यवसायिक स्थलों पर संचालित अथवा स्थापित होंगी। उन्हें भविष्य में गैस सप्लाई देने के लिए प्राथमिकता के आधार पर देखा जाएगा।
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सुरेद्र कुमार शर्मा अधिवक्ता
दिसंबर 1996 में जारी सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देश इकाईयों के स्थानांतरण के संबंध में है। बाकी गैस सप्लाई जारी करने आदि के बारे में टीटीजेड अथॉरिटी को अंतिम निर्णय लेना है। इस लिहाज से गैस सप्लाई से जुड़े जो भी आवेदन मिले हैं। उन्हें टीटीजेड अथॉरिटी को अग्रसारित किया गया है।
अमरेश पांडेय, उपायुक्त उद्योग