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कैसे हुई प्रेमानंद महाराज के शिष्य की मौत?: दो घंटे बाद पुलिस को क्यों मिली थी सूचना, पुलिस के सामने नए सवाल
Thu, 01 Oct 2026 02:18 PM IST
Sharukh Khan
अमर उजाला नेटवर्क, मथुरा
अमर उजाला नेटवर्क, मथुरा
Published by: Sharukh Khan
Updated Thu, 01 Oct 2026 02:18 PM IST
सार
मथुरा के गऊ कृपा कुंज आश्रम की चौथी मंजिल से छलांग लगाने वाले साधक की मौत पर नए सवाल उठ रहे हैं। 25 सितंबर को सुबह करीब 10:30 बजे दीपक चौथी मंजिल से नीचे गिरे, आश्रम के अन्य साधक उन्हें अस्पताल ले गए, जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। पुलिस को घटना की जानकारी करीब दो घंटे बाद दोपहर 12:30 बजे अस्पताल से मिली। सवाल ये है कि दो घंटे बाद पुलिस को सूचना क्यों दी गई।
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premanand maharaj
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
मथुरा के वृंदावन के वराह घाट मार्ग स्थित गऊ कृपा कुंज आश्रम की चौथी मंजिल से छलांग लगाकर आत्महत्या करने वाले 25 वर्षीय दीपक लोधी उर्फ रसिक दुलारीशरण की मौत की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, आश्रम की आंतरिक व्यवस्था पुलिस के लिए नए सवाल खड़े कर रही है।
पुलिस अब सिर्फ मौत के घटनाक्रम और दीपक के मोबाइल की कॉल डिटेल तक सीमित नहीं है, बल्कि आश्रम में रहने वाले साधकों की दिनचर्या, बाहरी दुनिया से उनके संपर्क और अंदर की व्यवस्थाओं को भी जांच के दायरे में ले रही है।
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पुलिस अब सिर्फ मौत के घटनाक्रम और दीपक के मोबाइल की कॉल डिटेल तक सीमित नहीं है, बल्कि आश्रम में रहने वाले साधकों की दिनचर्या, बाहरी दुनिया से उनके संपर्क और अंदर की व्यवस्थाओं को भी जांच के दायरे में ले रही है।
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पुलिस जांच में सामने आया है कि आश्रम की व्यवस्था काफी हद तक अत्याधुनिक तकनीक और अंदरूनी सिस्टम के सहारे संचालित होती है। यहां रहने वाले लोगों के बाहर से संपर्क को लेकर भी सख्त व्यवस्था होने की जानकारी पुलिस को मिली है।
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बताया जा रहा है कि दीक्षा लेने के बाद कई लोगों के निजी मोबाइल फोन जमा करा लिए जाते हैं। कुछ मामलों में मोबाइल फोन उनके परिचितों या परिवार वालों को वापस कर दिए जाते हैं। इसके बाद आश्रम की व्यवस्था देख रहे लोगों की ओर से उन्हें मोबाइल और सिम उपलब्ध कराया जाता है।
जांच में यह भी जानकारी सामने आई है कि समय-समय पर इन मोबाइल फोन की जांच की जाती है। यह देखा जाता है कि आश्रम में रहने वाला व्यक्ति निर्धारित संपर्क व्यवस्था के अलावा किसी अन्य व्यक्ति से तो बातचीत नहीं कर रहा। पुलिस अब इस व्यवस्था और दीपक के मोबाइल रिकॉर्ड के बीच भी कड़ी तलाश रही है। दीपक वर्ष 2025 में जबलपुर से वृंदावन आए थे और दीक्षा लेने के बाद आश्रम की व्यवस्थाओं में सहयोग कर रहे थे।
दो घंटे बाद पुलिस को मिली थी सूचना
25 सितंबर को सुबह करीब 10:30 बजे दीपक चौथी मंजिल से नीचे गिरे थे। आश्रम के अन्य साधक उन्हें अस्पताल ले गए, जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। पुलिस को घटना की जानकारी करीब दो घंटे बाद दोपहर 12:30 बजे अस्पताल से मिली।
25 सितंबर को सुबह करीब 10:30 बजे दीपक चौथी मंजिल से नीचे गिरे थे। आश्रम के अन्य साधक उन्हें अस्पताल ले गए, जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। पुलिस को घटना की जानकारी करीब दो घंटे बाद दोपहर 12:30 बजे अस्पताल से मिली।
जांच के दौरान दीपक का प्राइवेट पार्ट कटा मिलने से पुलिस का शक गहराया। कमरे से संबंधित सामग्री और सीसीटीवी फुटेज की भी जांच की गई। पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे परिजनों ने साजिश की आशंका जताते हुए पुलिस अधिकारियों को प्रार्थनापत्र दिया था।
आश्रम की सफाई भी अंदर वालों के हाथ
जांच में सामने आया है कि आश्रम में सफाईकर्मी तक को अंदर प्रवेश नहीं दिया जाता। बिजली मैकेनिक से लेकर सफाई और रोजमर्रा के काम आश्रम में रह रहे लोग ही करते हैं। किसी काम की जरूरत होने पर साधक सीधे बाहर के व्यक्ति से संपर्क नहीं करते, बल्कि आश्रम में व्यवस्था संभालने वाले लोगों को इसकी जानकारी देते हैं। इसके बाद वही लोग बाहर से संबंधित व्यक्ति को बुलाने या काम कराने की व्यवस्था करते हैं।
जांच में सामने आया है कि आश्रम में सफाईकर्मी तक को अंदर प्रवेश नहीं दिया जाता। बिजली मैकेनिक से लेकर सफाई और रोजमर्रा के काम आश्रम में रह रहे लोग ही करते हैं। किसी काम की जरूरत होने पर साधक सीधे बाहर के व्यक्ति से संपर्क नहीं करते, बल्कि आश्रम में व्यवस्था संभालने वाले लोगों को इसकी जानकारी देते हैं। इसके बाद वही लोग बाहर से संबंधित व्यक्ति को बुलाने या काम कराने की व्यवस्था करते हैं।
यानी आश्रम की चाहरदीवारी के भीतर कौन आ रहा है, किससे संपर्क हो रहा है और किस काम के लिए बाहरी व्यक्ति से संपर्क किया जा रहा है, इसकी एक निर्धारित कड़ी है। पुलिस इसी व्यवस्था को अब दीपक की मौत के घटनाक्रम से जोड़कर देख रही है।
जांच के लिए भेजा मोबाइल
पुलिस सीसीटीवी और आश्रम में रहने वाले लोगों से पूछताछ कर रही है। दीपक का मोबाइल भी जांच के लिए भेजा है। जांच में सामने आया है कि आश्रम में बाहरी लोगों का प्रवेश प्रतिबंधित है। सफाई से लेकर सभी व्यवस्थाएं आश्रम में रहने वाले लोग ही करते हैं। पुलिस फॉरेंसिक रिपोर्ट आने के बाद घटना से पर्दा हटने की संभावना है। - श्लोक कुमार, एसएसपी
पुलिस सीसीटीवी और आश्रम में रहने वाले लोगों से पूछताछ कर रही है। दीपक का मोबाइल भी जांच के लिए भेजा है। जांच में सामने आया है कि आश्रम में बाहरी लोगों का प्रवेश प्रतिबंधित है। सफाई से लेकर सभी व्यवस्थाएं आश्रम में रहने वाले लोग ही करते हैं। पुलिस फॉरेंसिक रिपोर्ट आने के बाद घटना से पर्दा हटने की संभावना है। - श्लोक कुमार, एसएसपी
संत प्रेमानंद के शिष्यों की फाइनल दीक्षा पर रोक
संत प्रेमानंद के शिष्य रसिक दुलारी शरण की मौत के बाद आश्रमों में हलचल मची हुई है। इसके बाद संत प्रेमानंद के शिष्यों की फाइनल दीक्षा और समय-समय पर शिष्यों के दर्शन पर भी अनिश्चितकाल के लिए रोक लगा दी है। इतना ही नहीं अब वृंदावनवास कर रहे दीक्षा पा चुके शिष्यों के लिए नियम कड़े कर दिए हैं। ड्रेस कोड में भी बदलाव किया गया है। फाइनल दीक्षा और उपस्थिति पर लगी रोक एवं संत दर्शन न मिलने से विभिन्न शहरों से आ रहे श्रद्धालु निराश होकर लौट रहे हैं।
संत प्रेमानंद के शिष्य रसिक दुलारी शरण की मौत के बाद आश्रमों में हलचल मची हुई है। इसके बाद संत प्रेमानंद के शिष्यों की फाइनल दीक्षा और समय-समय पर शिष्यों के दर्शन पर भी अनिश्चितकाल के लिए रोक लगा दी है। इतना ही नहीं अब वृंदावनवास कर रहे दीक्षा पा चुके शिष्यों के लिए नियम कड़े कर दिए हैं। ड्रेस कोड में भी बदलाव किया गया है। फाइनल दीक्षा और उपस्थिति पर लगी रोक एवं संत दर्शन न मिलने से विभिन्न शहरों से आ रहे श्रद्धालु निराश होकर लौट रहे हैं।
वराह घाट क्षेत्र स्थित जिस भवन में संत प्रेमानंद के शिष्यजन रह रहे हैं, उसकी चौथी मंजिल से गिरकर संत प्रेमानंद महाराज के शिष्य रसिक दुलारी शरण की संदिग्ध परिस्थिति में मौत हो गई। आश्रम की व्यवस्था में कई बड़े बदलाव किए गए हैं। इसे लेकर सोशल मीडिया पर ब्रज संत महिमा के प्लेटफार्म पर पोस्ट डालकर जानकारी साझा की है। हालांकि इसे श्रीहित केलिकुंज आश्रम की अधिकृत पोस्ट नहीं बताया है। लेकिन इसमें दी कुछ बातों की पुष्टि की है।
केलिकुंज के पूछताछ केंद्र पर तैनात सेवक ने बताया कि जहां संत द्वारा दी जाने वाली फाइनल दीक्षा देने एवं एक निश्चित पर श्रद्धालुओं की होने वाली उपस्थिति पर भी अनिश्चितकाल के लिए रोक लगा दी है। यह प्रतिबंध एक अक्तूबर से लागू किया जाएगा। संत आश्रम के साधक की संदिग्ध परिस्थिति में मौत के मामले में लोगों की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। इसी वजह से नकारात्मक टिप्पणी भी देखने को मिल रही हैं।
इसे देखते हुए विशेष रूप से वृंदावनवास कर रहे दीक्षित शिष्यों के पहनावे और मर्यादा संबंधी नियमों में बदलाव किया गया है, जिसमें अब शिष्य पीले और सफेद रंग की पहनावा न पहनकर आमजन जैसे वस्त्रों में रहेंगे। सिर्फ साधक और संत के निजी सेवक ही सफेद और पीले रंग के कपड़ों में रहेंगे। संत फिलहाल मांट के बेलवन स्थित आश्रम में एकातंवास में हैं।
बदला ड्रेस कोड, मायूस होकर लौटे श्रद्धालु
संत प्रेमानंद के शिष्य की मौत के बाद रमणरेती स्थित उनके आश्रम श्रीहित राधा केलि कुंज में श्रद्धालुओं की संख्या में कमी आई है। शिष्यों के ड्रेस कोड में किए गए बदलाव का असर भी बुधवार को देखने मिला। वृंदावनवास कर रहे संत के शिष्य मुख पर तिलक एवं ब्रजरज लगाकर प्रतिदिन की तरह आश्रम जाते दिखे, उनका पहनावा पीले और सफेद रंग का न होकर सामान्य श्रद्धालुओं की तरह रंगीन कपड़ों में देखने को मिला।
संत प्रेमानंद के शिष्य की मौत के बाद रमणरेती स्थित उनके आश्रम श्रीहित राधा केलि कुंज में श्रद्धालुओं की संख्या में कमी आई है। शिष्यों के ड्रेस कोड में किए गए बदलाव का असर भी बुधवार को देखने मिला। वृंदावनवास कर रहे संत के शिष्य मुख पर तिलक एवं ब्रजरज लगाकर प्रतिदिन की तरह आश्रम जाते दिखे, उनका पहनावा पीले और सफेद रंग का न होकर सामान्य श्रद्धालुओं की तरह रंगीन कपड़ों में देखने को मिला।
वहीं संत के सेवक पुराने ड्रेस कोड सफेद रंग का घुटनों तक अगोछा और शरीर के ऊपरी हिस्से पर बनियान एवं पीले रंग की लोई ओढ़े देखे गए। इधर फाइनल दीक्षा और उपस्थिति में अनिश्चितकाल तक प्रतिबंध लगने से श्रद्धालु मायूस होकर लौट रहे हैं। राजस्थान हनुमान गढ़ से आए सुबोध कुमार ने बताया कि वह संत दर्शन के लिए आए थे, लेकिन किन्ही कारण दर्शन नहीं हो पा पाए हैं।