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मथुरा: होली पर 'प्रहलाद के गांव' में धधकती आग से गुजरा पंडा, फिर जीवंत हुई हैरतअंगेज परंपरा

Mon, 29 Mar 2021 06:43 AM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा Published by: मुकेश कुमार Updated Mon, 29 Mar 2021 06:43 AM IST
सार

  • मथुरा के फालैन गांव को प्रह्लाद का गांव कहा जाता है
  • होलिका दहन पर अग्नि के बीच से गुजरता है मोनू पंडा

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Holi in Mathura Monu Panda Walks On Fire Of Holi In Falain Village
होलिका दहन - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मथुरा के गांव फालैन में होली पर एक बार फिर भक्त प्रह्लाद की लीला जीवंत हो उठी। सोमवार तड़के होलिका दहन के बाद मोनू पंडा जब धधकती होली के अंगारों से गुजरा तो वहां मौजूद लोग यह देखकर दंग रह गए। होली की इस अनूठी परंपरा के हजारों लोग साक्षी बने। इस दौरान होलिका माता और भक्त प्रह्लाद के जयकारों से गांव की गलियां गूंज उठीं।  

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कोसीकलां क्षेत्र के गांव फालैन में मंगलवार तड़के करीब चार बजे मोनू पंडा ने अखंड दीपक की लौ पर होलिका से गुजरने की इजाजत मांगी। होलिका में प्रवेश की लग्न प्रारंभ होते ही श्रद्धालुओं का सैलाब होलिका के आसपास उमड़ पड़ा। मंत्रोच्चार के बीच मोनू पंडा बार-बार दीपक पर हाथ रख होलिका में प्रवेश की इजाजत मांगी। 
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करीब सवा घंटे बाद दीपक की लौ से मोनू पंडा को शीतलता का आभास हुआ तो उन्होंने प्रह्लादजी महाराज की जयघोष की। मोनू पंडा का इशारा मिलते ही होलिका में अग्नि प्रवेश कराई गई। कुछ ही देर में धधक उठी होलिका के ताप से हर कोई छिपने को मजबूर हो गया। 

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प्रह्लादजी की माला गले में धारण कर मोनू पंडा ने प्रह्लाद कुंड में स्नान कर होलिका की ओर दौड़ लगा दी। मोनू पंडा 15 फीट ऊंची होलिका पर कुल 19 कदम रखकर सकुशल प्रह्लादजी के मंदिर में जा पहुंचे। पंडा के सकुशल मंदिर में पहुंचते ही सैलाब ने भक्त वत्सल भगवान के जयघोष से पूरा वातावरण गूंज उठा।

यह है मान्यता
जिला मुख्यालय से करीब 55 किलोमीटर दूर फालैन गांव है, जिसे प्रहलाद का गांव भी कहा जाता है। मान्यता है कि गांव के निकट ही साधु तप कर रहे थे। उन्हें स्वप्न में डूगर के पेड़ के नीचे एक मूर्ति दबी होने की बात बताई। इस पर गांव के कौशिक परिवारों ने खोदाई कराई। जिसमें भगवान नृसिंह और भक्त प्रहलाद की प्रतिमाएं निकलीं। 

प्रसन्न होकर तपस्वी साधु ने आशीर्वाद दिया कि इस परिवार का जो व्यक्ति शुद्ध मन से पूजा करके धधकती होली की आग से गुजरेगा, उसके शरीर में स्वयं प्रहलादजी विराजमान हो जाएंगे। आग की ऊष्मा का उस पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। इसके बाद यहां प्रहलाद मंदिर बनवाया गया। 

मंदिर के पास ही प्रह्लाद कुंड का निर्माण हुआ। तब से आज तक प्रहलाद लीला को साकार करने के लिए फालैन गांव में आसपास के पांच गांवों की होली रखी जाती है। फालैन को प्रहलाद का गांव भी कहा जाता है। गांव का पंडा परिवार प्रहलाद लीला की जीवंत किए हुए हैं। 

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