मथुरा: होली की मस्ती और गोवर्धन में गायन का आनंद, 'मेरी चुनरी में लग गयौ दाग री, ऐसौ चटक रंग डारौ...'
भगवान श्रीकृष्ण की नगरी में होली की मस्ती छाई हुई है, तो वहीं गिरिराज मुकुट मुखारबिंद मानसी गंगा के तट पर समाज गायन का भक्त आनंद उठा रहे हैं।
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गोवर्धन में गिरिराज मुकुट मुखारबिंद मानसी गंगा के तट पर गुलाल की होली के मध्य रात्रि में समाज गायन बसंत पंचमी से चल रहा है। होली समाज गायन का बृजवासी एवं दूर-दराज से श्रद्धालु आनंद ले रहे हैं। ब्रज के प्रमुख तीर्थ स्थल गिरिराज महाराज की नगरी में गिरिराज महाराज के विग्रहों का बसंत पंचमी से प्रतिदिन रबड़ी से अभिषेक कराया जाता है तथा दोपहर के समय गर्मी के हिसाब से ठंडाई का प्रसाद लगाया जाता है।
ब्रज के रसिया कर रहे मंत्रमुग्ध
बृजवासी प्रतिदिन रात्रि आठ बजे से गिरिराज मुकुट मुखारबिंद मानसी गंगा के तट पर होली के प्रसिद्ध रसिया गायन ढोलक, मजीरा, ढप, मृदंग के साथ अबीर गुलाल उड़ाते हुए गाते हैं। समाज गायन में ब्रज के रसिया गाये जाते हैं, मेरी चुनरी में लग गयौ दाग री ऐसौ चटक रंग डारौ, दूसरी पंक्ति में गिरवर ते दौड़ लगाई ली जौ जब आवै गोवर्धन में, होली खेलन श्याम आज याय रंग में बोरो री आदि अनेकों प्रकार के गायन गाए जाते हैं।
सवा महीने तक चलेगा होली का उत्सव
गायन में घासीराम एवं नारायण स्वामी, रोशन लाल भक्त कवियों द्वारा रचित धमार पदों का होली रसिया गायन गिरिराज महाराज को सुनाते हैं। गिरिराज महाराज की नगरी में सवा महीने तक होली उत्सव मनाया जाता है। बसंत पंचमी से श्रद्धालु होली मनाने आने लग जाते हैं। यह समाज गायन बसंत पंचमी से फाल्गुन की पूर्णिमा तक चलता है। इस अवसर पर सन्तोष अन्जाना, राजू शर्मा, मुरारी लाल तिवारी, लखन शर्मा, पप्पन नेता, पंकज पाठक, नृत्य गोपाल शर्मा, भारत शर्मा आदि मौजूद रहे।