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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Agra News ›   Hindi Diwas 2022 first time in Kendriya Hindi Sansthan trilingual folk dictionary has been prepared

हिंदी दिवस 2022: ठल्ल, रंड़ुआ, लुच्चा-लुच्ची गुम हुए ये शब्द, अब इनका मतलब समझेंगे देशी-विदेशी

Wed, 14 Sep 2022 08:00 AM IST
धीरेन्द्र सिंह धर्मेंद्र त्यागी, आगरा
धर्मेंद्र त्यागी, आगरा Published by: धीरेन्द्र सिंह Updated Wed, 14 Sep 2022 08:00 AM IST
सार

Hindi Diwas 2022:  केंद्रीय हिंदी संस्थान में पहली बार त्रिभाषीय लोक शब्द कोश तैयार हुआ है, जिसमें ब्रज क्षेत्र के रोजमर्रा के 8249 शब्दों का हिंदी और अंग्रेजी में रूपांतरण है। 

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Hindi Diwas 2022 first time in Kendriya Hindi Sansthan trilingual folk dictionary has been prepared
केंद्रीय हिंदी संस्थान - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

ब्रजभाषा में ठल्ल, लुच्चा-लुच्ची, रंड़ुआ, बिटौरा, घंटारौ जैसे तमाम शब्द हैं। नई पीढ़ी, देहात से ताल्लुक न रखने वाले अधिकांश इनका आशय नहीं समझते। ब्रजभाषा भविष्य में नष्ट न हो जाए, इसके लिए केंद्रीय हिंदी संस्थान ने त्रिभाषीय लोक शब्दकोश तैयार किया है। इनके अर्थ हिंदी-अंग्रेजी में है। आसानी के लिए वाक्य प्रयोग भी लिखे हैं। 

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संस्थान की अनुसंधान एवं भाषा विकास विभागाध्यक्ष डॉ. सपना गुप्ता ने बताया कि रिहायशी शहरीकरण से बोलियां संकट में हैं। गांवों की नई पीढ़ियों में भी ये बोलियां सिमटती जा रही हैं। पढ़ना- समझना चाहें तो संग्रह नहीं है। ऐसे में संस्थान ने ब्रजभाषा हिंदी और अंग्रेजी लोक शब्दकोश तैयार किया है। इसमें रोजमर्रा में बोले जाने वाले 8249 शब्द चुने हैं। पढ़ने और समझने में आसानी हो, इसके लिए हिंदी-अंग्रेजी के साथ रोमन लिपि में लिखकर वाक्य प्रयोग भी किए हैं। इसी साल शब्दकोश प्रकाशित हुआ है। इसे इंटरनेशनल सॉफ्टवेयर के जरिये डिजिटलाइजेशन कर रहे हैं, जिससे देस-विदेश में इसकी उपलब्धता आसान हो जाएगी।

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12 साल में हुआ तैयार

त्रिभाषीय लोक शब्दकोश के परियोजना प्रभारी अनुपम श्रीवास्तव ने बताया कि 2008 में ये परियोजना शुरू हुई। इसमें भाषा संपादक डॉ. रामरज पाल के सहयोग से करीब 12 साल में पूरे बृज में घूमकर, विद्वान, क्षेत्रीय लोग, साहित्यकार समेत अन्य से जानकारी जुटाने के बाद शब्दकोश तैयार किया। 18 लोक भाषाओं के शब्दकोश तैयार किए जा रहे हैं। इसमें से राजस्थानी और भोजपुरी लोक शब्दकोश भी प्रकाशित हो चुकी है। अभी अवधी-बुंदेली शब्दकोश पर कार्य चल रहा है।  

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तीज-त्योहार समेत 100 परिशिष्ट

बृजभाषा शब्दकोश में 100 से अधिक परिशिष्ट भी हैं। इसमें व्रत-त्योहार, बाटमाप, पकवान, खेती, टीला, पेड़-पौधे, एतिहासिक स्थल, मिठाई समेत अन्य के बृजभाषा के शब्द हैं। इन शब्दों का अर्थ समझाया गया है। 

ब्रजभाषा के प्रचलित शब्द

ठल्ल : जो भैंस दूध नहीं देती हो।
लुच्चा : आवारा पुरुष।
लुच्ची : आवारा स्त्री। 
रंड़ुआ : जिस व्यक्ति की पत्नी की मौत हो गई हो
रांड : जिस महिला के पति की मौत हो गई हो
बिटौरा : घर के बाहर, खेत के कोने पर उपले रखने के लिए गोबर से बना स्थान।
बिजूका : घासफूस और मटका-लकड़ी से बना पुतला, जो पक्षियों-पशुआें से फसल को बचाने खेत में लगाते हैं। 
ठलुआ : बिना काम का, निष्क्रिय।
हप्पा : पका चावल, दलिया।
नसैनी : छत पर चढ़ने के लिए सीढ़ी।
कटिया : अंकुशनुमा मुड़ी कील।
अंटा : खेलने के लिए कांच की छोटी गोली।
गुइयां : साथ में रहने वाली सखी-सखा, सहेली, सहचर।
अड़ंगा : वाडे के दरवाजे में लगा डंडा।
ग्हौदुआ : नर गीदड़।
कंडा : गोबर से बने उपले।
पनारौ : छत से पानी की निकासी को बना टीन-प्लास्टिक पाइप से बना साधन।
मोरी : पानी निकलने की नाली।
खसमु : पति, मालिक।
ककई : स्त्रियों के बालों को सुलझाने वाली और जूं निकालने वाली छोटी दानेदार कंघी। 
प्हैलौटी : पहली बार पैदा हुई संतान 
घंटारौ : पशुओं के गले में बंधने वाला घंटा।

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