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शासनादेश से लेकर पत्राचार तक सब हिंदी में
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मैनपुरी। हिंदी को सम्मान दिलाने के लिए कवि और साहित्यकारों ने अथक प्रयास किए। सरकारी कार्यालयों में हिंदी को पूरा सम्मान मिल रहा है। शासन के आदेशों से लेकर सरकारी कार्यालयों में होने वाले पत्राचार सभी हिंदी में होे रहे हैं।
कार्यालयों में कार्यरत कर्मचारी भी हिंदी के महत्व को बखूबी समझते हैं। यहां तक कि सरकारी कार्यालयों में होने वाली लिपिकीय भर्तियों में हिंदी की टाइपिंग का ही टेस्ट होता है। इससे कहीं न कहीं हिंदी की महत्ता को समझा जा सकता है। अगर गहनता से देखें तो न्यायालय संबंधी अभिलेखों के अलावा बाकी सभी अभिलेख हिंदी में ही होते हैं। केवल कर्मचारी ही नहीं भारतीय प्रशासनिक सेवा और पुलिस सेवा के अधिकारी भी हिंदी में ही सभी कार्य करते हैं।
हिंदी को सरकारी कार्यालयों में पूरा महत्व मिल रहा है। सभी कार्य हिंदी में ही संपादित किए जाते हैं। लोग भी हिंदी की महत्ता को समझें और उसे आगे बढ़ाने के लिए पहल करें।
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-बी. राम, एडीएम
आजादी से लेकर अब तक कार्यालयों में कार्य हिंदी में ही होते आए हैं। कहीं न कहीं इससे हिंदी को बढ़ावा भी मिला है। सभी सहयोग करें तो हिंदी की दशा को और सुधारा जा सकता है।
-राजेश कर्दम, एआरटीओ
आयकर विभाग को छोड़कर अन्य कार्यालयों में तो पहले से ही हिंदी का उपयोग होता आया है। अब आयकर विभाग के अधिकांश कार्य भी हिंदी में ही किए जाने लगे हैं।
-बीके केसरवानी, आयकर अधिकारी
हिंदी हमारी मातृ भाषा है, हम सभी को इसका सम्मान करना चाहिए। शिक्षा विभाग हिंदी के महत्व को बखूबी समझता है। छात्रों को भी बेहतर शिक्षा दी जा रही है।
-मनोज कुमार वर्मा, डीआईओएस
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कार्यालयों में कार्यरत कर्मचारी भी हिंदी के महत्व को बखूबी समझते हैं। यहां तक कि सरकारी कार्यालयों में होने वाली लिपिकीय भर्तियों में हिंदी की टाइपिंग का ही टेस्ट होता है। इससे कहीं न कहीं हिंदी की महत्ता को समझा जा सकता है। अगर गहनता से देखें तो न्यायालय संबंधी अभिलेखों के अलावा बाकी सभी अभिलेख हिंदी में ही होते हैं। केवल कर्मचारी ही नहीं भारतीय प्रशासनिक सेवा और पुलिस सेवा के अधिकारी भी हिंदी में ही सभी कार्य करते हैं।
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हिंदी को सरकारी कार्यालयों में पूरा महत्व मिल रहा है। सभी कार्य हिंदी में ही संपादित किए जाते हैं। लोग भी हिंदी की महत्ता को समझें और उसे आगे बढ़ाने के लिए पहल करें।
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-बी. राम, एडीएम
आजादी से लेकर अब तक कार्यालयों में कार्य हिंदी में ही होते आए हैं। कहीं न कहीं इससे हिंदी को बढ़ावा भी मिला है। सभी सहयोग करें तो हिंदी की दशा को और सुधारा जा सकता है।
-राजेश कर्दम, एआरटीओ
आयकर विभाग को छोड़कर अन्य कार्यालयों में तो पहले से ही हिंदी का उपयोग होता आया है। अब आयकर विभाग के अधिकांश कार्य भी हिंदी में ही किए जाने लगे हैं।
-बीके केसरवानी, आयकर अधिकारी
हिंदी हमारी मातृ भाषा है, हम सभी को इसका सम्मान करना चाहिए। शिक्षा विभाग हिंदी के महत्व को बखूबी समझता है। छात्रों को भी बेहतर शिक्षा दी जा रही है।
-मनोज कुमार वर्मा, डीआईओएस