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UP: आगरा में बन रहा हाईटेक पोस्टमार्टम हाउस, एआई से खुलेगा संदिग्ध परिस्थितियों में हुई माैत का राज
Fri, 01 Aug 2025 10:24 AM IST
धीरेन्द्र सिंह
धर्मेंद्र त्यागी, अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
धर्मेंद्र त्यागी, अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Fri, 01 Aug 2025 10:24 AM IST
सार
पोस्टमार्टम में देरी की वजह से शवों की बेकदरी नहीं होगी। संदिग्ध परिस्थितियों में हुई माैत का राज एआई से खुलेगा। इसके लिए आगरा में हाईटेक पोस्टमार्टम हाउस तैयार किया जा रहा है।
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पोस्टमार्टम हाउस का नक्शा
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
एसएन मेडिकल कॉलेज में करीब पांच करोड़ रुपये से हाईटेक पोस्टमार्टम हाउस बन रहा है। इसमें विसरा जांच के लिए फोरेंसिक लैब भी होगी। खास बात यह है कि आर्टिफिशियल इंटेलीजेंसी (एआई) की मदद से संदिग्ध परिस्थितियों में हुई माैत का राज भी खुल सकेगा। इससे मृतकों के परिजनों को जांच रिपोर्ट के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। न्यायिक प्रक्रिया में भी तेजी आएगी। शवों को बेकदरी से बचाने के लिए दो कोल्डरूम बनेंगे।
इंटीग्रेडेड योजना के तहत दो मंजिला पोस्टमार्टम हाउस एंड ट्रेनिंग सेंटर के निर्माण प्रक्रिया लेडी लायल परिसर में शुरू हो गई है। पोस्टमार्टम के लिए हॉल बनेगा। इसमें शवों को सुरक्षित रखने के लिए कोल्डरूम में आधुनिक चैंबर बनेंगे। वीडियो काॅन्फ्रेंसिंग कक्ष भी होगा, जिसमें कोर्ट में संचालित किसी भी मामले की सुनवाई से चिकित्सक जुड़ सकेंगे। छात्रों की पढ़ाई के लिए सेमिनार कक्ष होगा, जिसमें पोस्टमार्टम के सजीव प्रसारण के जरिये छात्र शरीर के आंतरिक भागों की जानकारी प्राप्त कर सकेंगे। वेटिंग एरिया और पुलिस कक्ष भी होगा। यहां प्रदेश भर के चिकित्सकों को भी पोस्टमार्टम के लिए प्रशिक्षण दिया जाएगा। अभी एसएन में सामान्य पाेस्टमार्टम हाउस ही संचालित है।
फाॅरेंसिक लैब में होंगी सभी व्यवस्थाएं
पोस्टमार्टम हाउस में फाॅरेंसिक लैब भी बनाई जाएगी। इसमें शव के आंतरिक अंगों किडनी, लिवर, पेट, मूत्राशय के नमूनों की जांच की जाती है। इसमें विशेषज्ञ ये पता करते हैं कि मृतक के शरीर के अंगों में जहर या फिर अन्य जानलेवा रसायन तो नहीं है। विसरा रखने के लिए विशेष जार, उपकरण और रसायनों की भी खरीद की जाएगी। इसमें पोस्टमार्टम के लिए जरूरी आधुनिक उपकरण की भी खरीद होगी।
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वर्चुअल ऑटोप्सी में बिना चीरफाड़ के होगा परीक्षण
इमारत में वर्चुअल ऑटोप्सी कक्ष भी बनेगा। इसमें शव की चीरफाड़ किए बिना ही पोस्टमार्टम हो सकेगा। इसके लिए उपकरण और मशीनों की भी खरीद होगी। शव की चोटों का पता करने के लिए रेडियो डायग्नोस्टिक कक्ष भी बनेगा, जहां शव के एक्सरे समेत अन्य जांचें हो सकेंगी। अभी इसके लिए शव को रेडियो डायग्नोस्टिक सेंटर लेकर जाना पड़ता है।
2027 में हो जाएगा शुरू
प्राचार्य डॉ. प्रशांत गुप्ता ने बताया कि अत्याधुनिक पोस्टमार्टम हाउस का टेंडर होने के साथ निर्माण प्रक्रिया शुरू हो गई है। आसपास के जिलों में भी ऐसा पोस्टमार्टम हाउस नहीं होगा। 2027 में निर्माण पूरा होने के बाद इसे शुरू करा दिया जाएगा।
वैज्ञानिक ढंग से हो सकेगा शव का परीक्षण
फाॅरेंसिक विभाग की अध्यक्ष डाॅ. रिचा गुप्ता ने बताया कि शवों का पोस्टमार्टम वैज्ञानिक ढंग से होगा। इससे मौत की सही जानकारी पता चल सकेगी, जिससे मौत की गुत्थी को सुलझाया जा सकेगा। विसरा जांच के लिए भी नहीं भटकना पड़ेगा। पीड़ितों को बड़ी राहत मिलेगी।
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इंटीग्रेडेड योजना के तहत दो मंजिला पोस्टमार्टम हाउस एंड ट्रेनिंग सेंटर के निर्माण प्रक्रिया लेडी लायल परिसर में शुरू हो गई है। पोस्टमार्टम के लिए हॉल बनेगा। इसमें शवों को सुरक्षित रखने के लिए कोल्डरूम में आधुनिक चैंबर बनेंगे। वीडियो काॅन्फ्रेंसिंग कक्ष भी होगा, जिसमें कोर्ट में संचालित किसी भी मामले की सुनवाई से चिकित्सक जुड़ सकेंगे। छात्रों की पढ़ाई के लिए सेमिनार कक्ष होगा, जिसमें पोस्टमार्टम के सजीव प्रसारण के जरिये छात्र शरीर के आंतरिक भागों की जानकारी प्राप्त कर सकेंगे। वेटिंग एरिया और पुलिस कक्ष भी होगा। यहां प्रदेश भर के चिकित्सकों को भी पोस्टमार्टम के लिए प्रशिक्षण दिया जाएगा। अभी एसएन में सामान्य पाेस्टमार्टम हाउस ही संचालित है।
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फाॅरेंसिक लैब में होंगी सभी व्यवस्थाएं
पोस्टमार्टम हाउस में फाॅरेंसिक लैब भी बनाई जाएगी। इसमें शव के आंतरिक अंगों किडनी, लिवर, पेट, मूत्राशय के नमूनों की जांच की जाती है। इसमें विशेषज्ञ ये पता करते हैं कि मृतक के शरीर के अंगों में जहर या फिर अन्य जानलेवा रसायन तो नहीं है। विसरा रखने के लिए विशेष जार, उपकरण और रसायनों की भी खरीद की जाएगी। इसमें पोस्टमार्टम के लिए जरूरी आधुनिक उपकरण की भी खरीद होगी।
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वर्चुअल ऑटोप्सी में बिना चीरफाड़ के होगा परीक्षण
इमारत में वर्चुअल ऑटोप्सी कक्ष भी बनेगा। इसमें शव की चीरफाड़ किए बिना ही पोस्टमार्टम हो सकेगा। इसके लिए उपकरण और मशीनों की भी खरीद होगी। शव की चोटों का पता करने के लिए रेडियो डायग्नोस्टिक कक्ष भी बनेगा, जहां शव के एक्सरे समेत अन्य जांचें हो सकेंगी। अभी इसके लिए शव को रेडियो डायग्नोस्टिक सेंटर लेकर जाना पड़ता है।
2027 में हो जाएगा शुरू
प्राचार्य डॉ. प्रशांत गुप्ता ने बताया कि अत्याधुनिक पोस्टमार्टम हाउस का टेंडर होने के साथ निर्माण प्रक्रिया शुरू हो गई है। आसपास के जिलों में भी ऐसा पोस्टमार्टम हाउस नहीं होगा। 2027 में निर्माण पूरा होने के बाद इसे शुरू करा दिया जाएगा।
वैज्ञानिक ढंग से हो सकेगा शव का परीक्षण
फाॅरेंसिक विभाग की अध्यक्ष डाॅ. रिचा गुप्ता ने बताया कि शवों का पोस्टमार्टम वैज्ञानिक ढंग से होगा। इससे मौत की सही जानकारी पता चल सकेगी, जिससे मौत की गुत्थी को सुलझाया जा सकेगा। विसरा जांच के लिए भी नहीं भटकना पड़ेगा। पीड़ितों को बड़ी राहत मिलेगी।