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हीमोफीलिया दिवस: एसएन मेडिकल कॉलेज में हीमोफीलिया सोसाइटी, 200 से ज्यादा बच्चे करा रहे इलाज
Wed, 17 Apr 2024 03:30 PM IST
भूपेन्द्र सिंह
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: भूपेन्द्र सिंह
Updated Wed, 17 Apr 2024 03:30 PM IST
सार
ताजनगरी के एसएन मेडिकल कॉलेज में हीमोफीलिया सोसाइटी है। यहां पर फैक्टर चढ़ाने के साथ गंभीर मरीजों का भी इलाज किया जाता है।
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हीमोफीलिया दिवस-Hemophilia Day
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
हीमोफीलिया आनुवंशिक बीमारी है। इससे पीड़ित मरीजों में रक्त के थक्के बनने की प्रक्रिया धीमी पड़ जाती है। बच्चों में शिकायत अधिक मिलती है। आगरा के एसएन मेडिकल कॉलेज में इस समय आगरा मंडल के करीब 200 बच्चों का इलाज चल रहा है। इनको माह में दो से तीन बार फैक्टर चढ़ाया जाता है।
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मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. राम क्षितिज शर्मा ने बताया कि चोट लगने पर जब खून बहने लगता है तो उसे थक्के वाले फैक्टर रोकने का काम करते हैं। जिन लोगों में फैक्टर-7, 8, 9 और 11 की कमी होती है। उन्हें चोट लगने पर रक्तस्राव जल्दी रुकता नहीं। 90 फीसदी मरीजों में फैक्टर-8 की कमी ही पाई जाती है।
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इसके बाद फैक्टर-9 की कमी होती है। फैक्टर-7 व 11 वाले मरीजों की संख्या कम होती है। उन्होंने बताया कि बाहरी चोट लगने की स्थिति में खून न रुकने पर पता चल जाता है। अंदरूनी चोटों में बीमारी का पता जल्द नहीं चल पाता। जोड़ों पर चोट लगने से खून बहने लगता है। उसे हिस्से में सूजन आ जाती है और जल्द होता है। कई बार मरीजों की स्थिति गंभीर हो जाती है।
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हीमोफीलिया से पीड़ित मरीजों के उपचार के लिए एसएन मेडिकल कॉलज में हीमोफीलिया सोसाइटी है। मेडिकल कॉलेज में मरीजों को निशुल्क फैक्टर-8 व 9 चढ़ाया जाता है। इससे खून बहना रुक जाता है। डॉ. राम क्षितिज शर्मा ने बताया कि कई बच्चे इमरजेंसी में पहुंचते हैं। फैक्टर चढ़ाने के साथ उनका उपचार किया जाता है। बाहर उपचार महंगा है। एसएन मेडिकल कॉलेज में हीमोलिया के गंभीर से गंभीर मरीजों का उपचार किया जाता है।