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प्रदूषण : घंटेभर में फेफड़े में पहुंच रहा एक सिगरेट का धुआं

Sat, 20 Nov 2021 01:57 AM IST
Agra Bureau आगरा ब्यूरो
Updated Sat, 20 Nov 2021 01:57 AM IST
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heavy pollution in agra
आगरा। शहर की हवा बीते 15 दिन से बेहद खराब है। औसत एक्यूआई (एयर क्वालिटी इंडेक्स) 300 के आसपास है। ऐसी प्रदूषित हवा में घंटेभर तक रहने से एक सिगरेट के बराबर धुआं फेफड़ों में पहुंच रहा है। इससे स्वस्थ लोगों को धूम्रपान करने वालों जैसी परेशानियां मिल रही हैं। छाती रोग विशेषज्ञों के पास इन दिनों 20 फीसदी तक नए मरीज पहुंच रहे हैं।
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एसोसिएशन ऑफ चेस्ट फिजीशियन के सचिव डॉ. जीवी सिंह ने बताया कि एक सिगरेट में 250 से अधिक एक्यूआई के लगभग प्रदूषण होता है। इसके धुएं में कार्बन मोनोऑक्साइड, कार्बन डाईऑक्साइड, नाइट्रोजन, एरोमेटिक कार्बन समेत अन्य खतरनाक गैसें होती हैं। यही तत्व शहर की दूषित हवा में हैं और बीते 15 दिनों से शहर का औसत एक्यूआई भी इससे ज्यादा ही है। ऐसे महौल में बिना मास्क घंटेभर रहने पर फेफड़ों में एक सिगरेट जितना धुआं पहुंच रहा है। इससे नलिकाओं में सूजन होने के साथ स्वस्थ लोगों को सूखी खांसी, छाती में जकड़न और सांस लेने में दिक्कत जैसी समस्या मिल रही है। जल्द सांस भी फूल रही। इससे नींद पूरी नहीं होने से लोग चिड़चिड़े भी हो रहे हैं। चिकित्सकों के पास रोजाना 15 से 20 फीसदी नए मरीज आ रहे हैं।
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कैंसर का तीन गुना तक खतरा
एसोसिएशन ऑफ चेस्ट फिजीशियन के डॉ. अनुकूल जैन ने बताया कि प्रदूषित क्षेत्रों में लंबे समय तक रहने से अस्थमा, सांस रोग और फेफड़ों में कैंसर का खतरा ढाई से तीन गुना बढ़ जाता है। अस्थमा, सांस और टीबी के मरीजों को ज्यादा परेशानी होती है, जिससे उनको दवाओं-इन्हेलर की डोज बढ़ाकर देनी पड़ रही है।
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गले में खराश, नाक में खुजली
एसएन मेडिकल कॉलेज के ईएनटी रोग विभागाध्यक्ष डॉ. ऋतु गोयल ने बताया कि ईएनटी रोग विभाग में सामान्य दिनों में 120 से 150 मरीज आते थे, लेकिन इन दो सप्ताहों में संख्या 280 को भी पार कर गई, इनमें प्रदूषण के चलते गले में खराश, दर्द, नाक में खुजली, बार-बार छींक आना, जुकाम की परेशानी मिली। इनमें बच्चे और कामकाजी युवाओं की संख्या 65 फीसदी रही।

इन क्षेत्रों के लोगों की मुसीबत अधिक
एसएन के वक्ष एवं क्षय रोग विभाग के डॉ. संतोष कुमार ने बताया कि सड़क किनारे, निर्माण कार्य वाले और टूटी सड़कों के किनारे वाले क्षेत्र में रहने वाले लोगों की परेशानी ज्यादा बढ़ी मिली। इन क्षेत्र के दमा, सांस के रोगियों की सांस उखड़ रही थी। टीबी के मरीजों में खांसी में बलगम के साथ खून भी आया। इन 15 दिन में इन क्षेत्रों के 37 मरीज भर्ती किए, जिनको ऑक्सीजन देनी पड़ी।
बीते 15 दिन में यह रहा हवा का हाल
क्षेत्र एक्यूआई
आवास विकास 259-488
शाहजहां पार्क 244-490
संजय प्लेस 228-486
शास्त्रीपुरम 251-480
मनोहरपुर 208-460
बढ़ते प्रदूषण की वजह ये भी
- सर्दी पड़ने से टायर, अलाव जलाकर हाथ सेंकना
- त्योहार और सहालग के चलते लोगों की गतिविधियां बढ़ना
- मौसम में नमी के कारण धूल-धुएं से ग्राउंड लेवल ओजोन बनना
- त्योहार-शादी समारोह में आतिशबाजी होना
- खेतों में पराली, कूड़ा-कचरा को जलाना
- टूटी सड़कों पर वाहनों की गति प्रभावित होना
ये बरतें सावधानियां
- पौधे लगाएं, आसपास छिड़काव करें
- कचरा न जलाएं
- वाहनों का इस्तेमाल कम करें
- सड़कों की मरम्मत, ढककर निर्माण कार्य हों
- थ्री लेयर या फिर एन-95 मास्क लगाएं
- गर्म पानी की भाप लें, गुनगुना पानी पीएं
- सुबह-शाम घर से बाहर जाने से बचें
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