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लाडलों पर नहीं पड़ने दिया एड्स का साया
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एटा। गर्भवती महिलाओं की समय-समय पर जांच बेहद जरूरी है। उनके खून की जांच में 11 महिलाओं में एचआईवी पॉजिटिव पाया गया था, लेकिन इनकी निरंतर निगरानी की वजह से उनके द्वारा जन्मे बच्चों को पॉजिटिव होने से बचा लिया गया। हालांकि दो बच्चों की रिपोर्ट पॉजिटिव आई है।
चिकित्सकों के मुताबिक एचआईवी पॉजिटिव होने के कारण संक्रमित रक्त चढ़ना, संक्रमित सिरिंज से इंजेक्शन लगाना, असुरक्षित यौन संबंध बनाना आदि हैं। इनमेें से किसी कारण वश यदि महिला एचआईवी पॉजिटिव पाई जाती है तो उसके गर्भ में पल रहे बच्चे को बचाना बहुत मुश्किल हो जाता है। समय रहते एचआईवी पॉजिटिव होने की जानकारी हो जाती है तो उपचार से गर्भस्थ शिशु को बचाया जा सकता है।
वर्ष 2018 (जनवरी से दिसंबर तक) में जिले में गर्भवती महिलाओं के पांच केस एचआईवी पॉजिटिव मिले थे, जबकि 2019 में जनवरी से जून तक ऐसे ही छह मामले सामने आ चुके हैं। जो महिलाएं पॉजिटिव मिलीं, स्वास्थ्य विभाग ने उनकी सतर्कता के साथ निगरानी की। इनके एक बच्चा पिछले और एक बच्चा इस साल पॉजिटिव आया था, जबकि नौ महिलाओं द्वारा जन्मे बच्चों की निगेटिव रिपोर्ट आई है।
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18 माह की जाती है मॉनीटरिंग
एचआईवी पॉजिटिव गर्भवती महिलाओं से जन्मे बच्चों की 18 महीने होने तक मॉनीटरिंग की जाती है। जांच के लिए उनके खून का पहला नमूना डेढ़ माह पर लिया जाता है, दूसरा तीन, तीसरा छह, चौथा नौ, पांचवां 12 और छठा नमूना 18 माह पर लिया जाता है। नमूने की जांच के जरिये स्वास्थ्य विभाग की टीम निरंतर मॉनीटरिंग करती है।
वर्ष 2018 से अब तक 11 गर्भवती महिलाएं एचआईवी पॉजिटिव पाई गईं। उनका उपचार अलीगढ़ मेडिकल कॉलेज के एआरटी सेंटर में शुरू कराया गया तो नौ महिलाओं के बच्चों को एचआईवी पॉजिटिव होने से बचाया। जबकि दो बच्चों की रिपोर्ट पॉजिटिव आई है।
डॉ. सौरभ राजपूत, वरिष्ठ चिकित्सक, महिला चिकित्सालय।
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चिकित्सकों के मुताबिक एचआईवी पॉजिटिव होने के कारण संक्रमित रक्त चढ़ना, संक्रमित सिरिंज से इंजेक्शन लगाना, असुरक्षित यौन संबंध बनाना आदि हैं। इनमेें से किसी कारण वश यदि महिला एचआईवी पॉजिटिव पाई जाती है तो उसके गर्भ में पल रहे बच्चे को बचाना बहुत मुश्किल हो जाता है। समय रहते एचआईवी पॉजिटिव होने की जानकारी हो जाती है तो उपचार से गर्भस्थ शिशु को बचाया जा सकता है।
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वर्ष 2018 (जनवरी से दिसंबर तक) में जिले में गर्भवती महिलाओं के पांच केस एचआईवी पॉजिटिव मिले थे, जबकि 2019 में जनवरी से जून तक ऐसे ही छह मामले सामने आ चुके हैं। जो महिलाएं पॉजिटिव मिलीं, स्वास्थ्य विभाग ने उनकी सतर्कता के साथ निगरानी की। इनके एक बच्चा पिछले और एक बच्चा इस साल पॉजिटिव आया था, जबकि नौ महिलाओं द्वारा जन्मे बच्चों की निगेटिव रिपोर्ट आई है।
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18 माह की जाती है मॉनीटरिंग
एचआईवी पॉजिटिव गर्भवती महिलाओं से जन्मे बच्चों की 18 महीने होने तक मॉनीटरिंग की जाती है। जांच के लिए उनके खून का पहला नमूना डेढ़ माह पर लिया जाता है, दूसरा तीन, तीसरा छह, चौथा नौ, पांचवां 12 और छठा नमूना 18 माह पर लिया जाता है। नमूने की जांच के जरिये स्वास्थ्य विभाग की टीम निरंतर मॉनीटरिंग करती है।
वर्ष 2018 से अब तक 11 गर्भवती महिलाएं एचआईवी पॉजिटिव पाई गईं। उनका उपचार अलीगढ़ मेडिकल कॉलेज के एआरटी सेंटर में शुरू कराया गया तो नौ महिलाओं के बच्चों को एचआईवी पॉजिटिव होने से बचाया। जबकि दो बच्चों की रिपोर्ट पॉजिटिव आई है।
डॉ. सौरभ राजपूत, वरिष्ठ चिकित्सक, महिला चिकित्सालय।