रोजी-रोटी के लिए बदला रोजगार: ताजनगरी में गाइड ठेल लगाने को मजबूर, सरकार से मदद की गुहार
कोरोना संकट काल में ताजनगरी के गाइडों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। स्मारक बंद होने के कारण रोजगार बंद है, जिससे कई गाइड ठेल लगाने को मजबूर हो गए हैं।
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कोरोना के कारण 14 माह से आगरा का पर्यटन उद्योग बदहाली झेल रहा है। होटल रेस्टोरेंट के साथ ही ताजमहल से जुड़े गाइडों के सामने रोजी रोटी का संकट छाया हुआ है। देश के एंबेसडर के तौर पर कहे जाने वाले इन गाइडों का साथ इस संकट के समय सरकार ने छोड़ा और कोई राहत, मदद नहीं दी तो पुराना पेशा छोड़ गाइडों ने रोजी रोटी के लिए नया काम शुरू कर लिया।
नए ट्रेड में वह संघर्ष के साथ जुड़े हैं। हिम्मत नहीं छोड़ी। शहर में ताजमहल के कारण 2600 से ज्यादा गाइड हैं, जिनमें से यूपी टूरिज्म के लाइसेंस प्राप्त 1800 और भारत सरकार के लाइसेंस प्राप्त 400 से ज्यादा एप्रूव्ड गाइड हैं। इसके अलावा एएसआई के गाइड और लोकल गाइड भी हैं, जो ताजमहल बंद होने के बाद से परेशान हैं।
लोकल गाइड सौरभ सिंह ताजमहल पर भारतीय पर्यटकों को दीदार कराते थे, लेकिन बीते साल लॉकडाउन के बाद जमा पूंजी खर्च हो गई तो अब बिजलीघर चौराहे पर दूध की बोतलों का काम शुरू किया। सौरभ सिंह के मुताबिक घर चलाने और पेट पालने के लिए कुछ तो करना पड़ेगा। सरकार से कोई मदद मिली नहीं तो नया काम शुरू करना पड़ा। ताजमहल खुलेगा तो फिर गाइड का काम शुरू कर देंगे।
ऑनलाइन जूतों का कारोबार शुरू किया
सुभाष चंद्र यूपी टूरिज्म से लाइसेंस प्राप्त टूरिस्ट गाइड हैं। ताजमहल बंद होने से पहले बीते साल मार्च में पर्यटकों को ताज घुमाया था। तब से सितंबर तक खाली बैठे तो रोजी रोटी का संकट सामने आ गया। घर की किस्त भरनी थी इसलिए ऑनलाइन जूतों का कारोबार शुरू किया। जमा पूंजी लगाकर काम तो शुरू कर लिया, पर पटरी पर जिंदगी आती, उससे पहले ही फिर से लॉकडाउन लग गया। अब दो महीने से फिर घर बैठे हैं।
शकील चौहान भारत सरकार के लाइसेंस प्राप्त टूरिस्ट गाइड हैं। स्मारक बंद होने के बाद पर्यटकों का आना बंद हो गया। रेस्टोरेंट व टिफिन सर्विस की शुरुआत की। शकील चौहान के मुताबिक खर्चे पूरे हैं, लेकिन आमदनी एकाएक खत्म हो गई तो बचत कितने दिन, कितने महीने चलती, इसलिए दूसरा काम शुरू करना पड़ा ताकि परिवार का भरण पोषण तो चलता रहे।
गौरव गर्ग यूपी टूरिज्म के गाइड हैं। कोरोना संक्रमण के बाद जब ताज 188 दिन बंद रहा तो घर खर्च चलाने के लिए बीमा पॉलिसी का काम शुरू किया। भविष्य में कोरोना की दूसरी, तीसरी लहर में फिर लॉकडाउन के डर से उन्होंने यह काम चुना ताकि बीमा पॉलिसी का काम घर से भी चल जाए। उन्हें भी बच्चों और घर की जरूरतें पूरी करने के लिए पेशा बदलना पड़ा।
यूपीटी गाइड वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष दीपक दान ने कहा कि गाइड देश के एंबेसडर हैं, लेकिन 14 माह से संकट के दौरान उन्हें सरकार से कोई मदद नहीं मिली। दूसरे पेशों से संबंधित लोगों को टैक्स, बिल, स्कूल फीस समेत अन्य रियायतें दीं, लेकिन गाइडों को मदद नहीं दी गई। लॉकडाउन अवधि के लिए ही मानदेय तय कर दिए जाते।
एप्रूव्ड गाइड एसोसिएशन आगरा के अध्यक्ष शमशुद्दीन ने कहा कि बिजली का बिल, घर की किस्त, बच्चों की स्कूल फीस, रसोई खर्च, ये कैसे चलेगा, जब 14 माह से हम घर बैठे हैं। कुछ लोगों ने पेशा बदलकर काम शुरू किया, लेकिन वह भी जम नहीं पा रहा। दोबारा लॉकडाउन ने उन्हें फिर सड़क पर ला दिया। सरकार की मदद की दरकार है, वरना जीवन संकट में आ जाएगा।