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जीएसटी की सर्च: सलोनी तेल ने स्टेट जीएसटी में जमा कराए 2.15 करोड़ रुपये, 100 से ज्यादा अधिकारियों ने की जांच

Sat, 16 Dec 2023 09:41 AM IST
धीरेन्द्र सिंह अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा Published by: धीरेन्द्र सिंह Updated Sat, 16 Dec 2023 09:41 AM IST
सार

प्रदेश के सात जोन में सलोनी तेल के 42 गोदाम पर जांच हुई। 24 घंटे चली जांच के बाद सलोनी तेल ने स्टेट जीएसटी में  2.15 करोड़ रुपये जमा कराए।

 

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GST Search Saloni Oil deposited Rs 2.15 crore in State GST
Agra: सरसों तेल के बड़े कारोबारी सलोनी ग्रुप पर जीएसटी टीम की छापेमारी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सलोनी ब्रांड से सरसों का तेल बनाने वाली फर्म महेश एडिबल ऑयल इंडस्ट्रीज और इसकी सहयोगी कंपनियों पर स्टेट जीएसटी की विशेष अनुसंधान शाखा (एसआईबी) की जांच 24 घंटे में पूरी हो गई। महेश एडिबल ऑयल ने 2.15 करोड़ रुपये का टैक्स स्टेट जीएसटी को छापे के दौरान ही जमा कर दिया। कंपनी के आगरा में 14 और प्रदेश के अन्य 7 जोन में कुल 42 परिसरों पर जांच की गई थी, जिनमें फर्जी फर्मों से खरीद, ई-वे बिल के दुरुपयोग और स्टॉक में बड़ा अंतर पाया गया।
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स्टेट जीएसटी के एडिशनल कमिश्नर ग्रेड 1 मारुति शरण चौबे ने बताया कि पूरे प्रदेश में सलोनी तेल के गोदामों और प्लांट को जांच में शामिल किया गया था। चार महीने से कंपनी के रिटर्न और ई-वे बिल, बिक्री पर नजर रखी जा रही थी। विशेष अनुसंधान शाखा ने महेश एडिबल ऑयल और महेश एडिबल ऑयल मिल्स के साथ इसकी सभी सहयोगी फर्मों पर जांच में पाया कि कंपनी ने सरसों की खरीद फर्जी फर्मों से की है।
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एसआईबी के एडिशनल कमिश्नर ग्रेड-2 सर्वजीत और ज्वाइंट कमिश्नर एसआईबी प्रमोद दुबे ने कंपनी के प्लांट और गोदामों से बड़ी संख्या में संदिग्ध अभिलेख सीज किए हैं। अधिकारियों के मुताबिक जांच में बड़े पैमाने पर टैक्स की चोरी सामने आने की संभावना है। कंपनी ने नकद में खरीद और अपना मुनाफा बेहद कम दिखा रखा है। एक फीसदी मुनाफे को ही कंपनी दिखा रही है, जबकि खर्चों को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया गया है।
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ई-वे बिल के दुरुपयोग और स्टॉक में अंतर
शमसाबाद और दिगनेर के प्लांट पर जो कागजात मिले हैं, उनमें ई-वे बिल के दुरुपयोग और स्टॉक रजिस्टर में भारी अंतर मिला है। प्रदेश के अन्य जोन के गोदामों में भी स्टॉक में भारी अंतर मिला है। आगरा और पूर्वी उत्तर प्रदेश के गोदामों में स्टॉक कागजों में अलग है और भौतिक सत्यापन में एकदम अलग पाया गया है। कंपनी ने 10 करोड़ रुपये से ज्यादा का आईटीसी क्लेम ऐसा किया है, जो गलत है। राजस्थान की कई फर्म ऐसी मिली हैं, जिनके कागज संदिग्ध पाए गए हैं। स्टेट जीएसटी की इस जांच में प्रदेशभर के 500 अधिकारी और अकेले आगरा से दो ज्वाइंट कमिश्नर प्रमोद दुबे और भास्करेंदु शुक्ला रहे, जबकि 25 डिप्टी कमिश्नर, 40 असिस्टेंट कमिश्नर और 50 कर अधिकारी शामिल हुए।
 
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