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UP: जामुन की खेती से होगी बंपर कमाई, कलमी पौधे तीन साल में देने लगते हैं फल; वैज्ञानिकों ने बताया पूरा तरीका
Wed, 24 Jun 2026 09:47 AM IST
Dhirendra Singh
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: Dhirendra Singh
Updated Wed, 24 Jun 2026 09:47 AM IST
सार
कृषि विज्ञान केंद्र बिचपुरी के विशेषज्ञों के अनुसार कलमी जामुन के पौधे तीन से चार साल और थाईलैंड ब्लैक किस्म दो से तीन साल में फल देना शुरू कर देती है। मानसून में वैज्ञानिक तरीके से रोपाई, उचित दूरी, जैविक खाद और सही देखभाल से जामुन की खेती से बेहतर उत्पादन और अच्छी आय प्राप्त की जा सकती है।
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जामुन की खेती
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
कृषि विज्ञान केंद्र बिचपुरी के उद्यान विशेषज्ञ अनुपम दुबे के अनुसार जामुन का नया बाग लगाने में उन्नत किस्मों और वैज्ञानिक विधि अपनाने से बेहतर उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है। कलमी जामुन के पौधे तीन से चार वर्ष में फल देने लगते हैं, जबकि थाईलैंड ब्लैक जैसी उन्नत किस्मों में दो से तीन वर्ष में ही उत्पादन शुरू हो जाता है। बीज से तैयार पौधों में फल आने में आठ से दस वर्ष लग सकते हैं।
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अनुपम दुबे ने बताया कि व्यावसायिक खेती के लिए राजा जामुन, सीआईएसएच जे-37, सीआईएसएच जे-42 तथा थाईलैंड ब्लैक किस्में उपयुक्त हैं। आगरा क्षेत्र में जुलाई-अगस्त का मानसून काल रोपाई के लिए सबसे अच्छा समय है, जबकि फरवरी-मार्च में भी पौधे लगाए जा सकते हैं। खेत में पौधों को 8×8 मीटर या 10×10 मीटर की दूरी पर लगाना चाहिए। मेड़ पर रोपाई करने पर 10 से 12 फीट की दूरी पर्याप्त रहती है।
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रोपाई से एक माह पहले 2×2×2 फीट के गड्ढे तैयार कर उनमें 10 से 15 किलो सड़ी गोबर की खाद, 50 ग्राम ट्राइकोडर्मा और 50 ग्राम क्लोरपायरीफॉस मिलाना चाहिए। उन्होंने बताया कि जामुन के लिए दोमट मिट्टी उपयुक्त है, लेकिन जलभराव नहीं होना चाहिए। पौधा लगाते समय कलम का जोड़ मिट्टी से 2 से 3 इंच ऊपर रखें तथा नीचे निकलने वाली अतिरिक्त टहनियों को हटाते रहें। नए पौधों को बांस का सहारा दें और शुरुआती दो वर्षों तक जैविक खाद को प्राथमिकता दें। सिंचाई आवश्यकता अनुसार करें तथा सर्दियों में पाले से बचाव के लिए हल्की सिंचाई अवश्य करें।
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