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गिरिराज जी धाम में गोपाष्टमी महोत्सव: आश्रम, मठ मंदिर गोशालाओं में गोवंश की पूजा, विदेशी भक्तों ने मांगी मनौती

Thu, 11 Nov 2021 11:50 AM IST
Abhishek Saxena संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा
संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा Published by: Abhishek Saxena Updated Thu, 11 Nov 2021 11:50 AM IST
सार

गोपाअष्टमी का त्योहार दिवाली के समय होने वाली गोवर्धन पूजा के सात दिन बाद मनाया जाता है। इस दिन नंद बाबा ने श्रीकृष्ण और गाय के लिए एक समारोह का आयोजन किया था। भगवान श्रीकृष्ण और उनके बड़े भाई बलराम बाल्यावस्था में इस दिन पहली बार गाय को चराने ले गए थे।
 

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Gopashtami 2021: Cow Poja In Govardhan And Braj By Foreign Devotees
सुमंगला गोशाला में गौपूजन करते भक्त - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

गोपाष्टमी के दिन गिरिराजजी धाम में श्रद्धालु भक्तों का जनसैलाव उमड़ पड़ा। भक्तों ने मठ मंदिर आश्रम गोशालाओं में गोवंश की पूजा-अर्चना कर मनौती मांगी। गिरिराज तलहटी में जगह-जगह अन्नकूट छप्पन भोग लगाए गए। 

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गोवर्धन पूजा के बाद गुरुवार को गिरिराजजी धाम में गोपाष्टमी महोत्सव बड़े ही हर्षोल्लास के साथ गोपूजन कर मनाया गया। देश विदेश से श्रद्धालु भक्त गोपूजन के लिए गोवर्धन धाम पहुंचे। हनुमान बाग आश्रम में संत सियाराम दास के सानिध्य में भक्तों ने गोपूजन किया, नीमगांव स्थित सुमंगला गोशाला में कन्हैया लाल दीक्षित के सानिध्य में हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान, पंजाब से आए भक्तों ने गोपूजन कर मनौती मांगी। 
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अन्नकूट-छप्पन भोग लगाया
श्याम ढाक गोशाला पर भक्ति सेवा चैरिटेबल ट्रस्ट के श्रेयस गुजराती, शिशिर गुजराती, गो रक्षक दल के जिलाध्यक्ष ठा. नेत्र राज सिंह, धीरज कौशिक आदि ने गो पूजन कर गोपाष्टमी महोत्सव मनाया। गिरिराज तलहटी स्थित जहाज घर में ड्यूक पैलेस संचालक ने गौ-गोपाल महोत्सव अन्नकूट छप्पन भोग के साथ मनाया। हनुमान बाग आश्रम के महंत संत सियारामदास महाराज ने बताया, योगिराज भगवान कृष्ण और बलराम ने गोपाष्टमी के दिन ही गोचारण लीला की थी। द्वापर युग से यह परंपरा ब्रज में चली आ रही है। हर मनुष्य को गौपाष्टमी के दिन गोसेवा की प्रतिज्ञा लेनी चाहिए।
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गोपाअष्टमी की पूजन विधि
1. गाय और उसके बछड़े को नहला-धुलाकर उसका श्रंगार किया जाता है। उसके पैरों में घुंघरु बांधकर अन्य आभूषण पहनाए जाते हैं।
2. सुबह जल्दी उठकर गौमाता के चरण स्पर्श किये जाते हैं व उनकी सींग पर चुनरी बांधी जाती है।
3. गौमाता की परिक्रमा कर उन्हें चराने के लिए बाहर ले जाया जाता है।
4. इस दिन ग्वालों को तिलक लगाया जाता है व उन्हें दान भी दिया जाता है।
5. गाय शाम को चर कर जब घर लौटे तो फिर उनकी पूजा की जाती है। इस दिन अच्छा भोजन हरा चारा, गुड़ व हरा मटर खिलाया जाता है।
6. जिन घरों में गाय नहीं होती है वो लोग गौशाला जाकर उनकी पूजा करते हैं, गंगाजल व फूल चढ़ाकर गुड़ भी खिलाते हैं।
7. कुछ लोग इस दिन भगवान श्रीकृष्ण की पूजा करते हैं और श्री कृष्ण के भजन गाते हैं।

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