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अच्छी खबर: चंबल के कुनबे में शामिल हुए 5160 कछुओं के नन्हे मेहमान
Fri, 05 Jun 2026 02:19 AM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
Updated Fri, 05 Jun 2026 02:19 AM IST
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चंबल में रिकॉर्ड हैचिंग
बाह। अच्छी खबर ये है कि दुनिया में लुप्तप्राय स्थिति में पहुंचे बटागुर कछुओं की साल और ढोर प्रजाति के 5160 नन्हें मेहमान चंबल नदी के कुनबे में शामिल हो गए हैं। कुल 235 नेस्ट में 5455 अंडे रिकॉर्ड किए गये थे। 5160 बच्चों का जन्म हुआ है। बाह के रेंजर कुलदीप सहाय पंकज ने बताया कछुओं की हैचिंग का काम पूरा हो गया है। हैचिंग के दौरान सरसराहट की आवाज पर पहुंची मादा कछुआ ने नेस्ट की बालू को कुरेदा तो अंडों के भीतर विकसित हुए नन्हें कछुए बाहर निकले। मादा ने अपने बच्चों को दुनिया में आने का रास्ता दिखाया और वन कर्मियों ने उन्हें चंबल नदी तक पहुंचाने का काम किया। उन्होंने बताया कि फरवरी-मार्च में मादा कछुआ नदी किनारे की बालू में करीब एक फीट गहरा गड्ढा अपने पंजों से खोद कर 10 से 30 अंडे देती है। उन्होंने बताया कि ढोर प्रजाति के 182 नेस्ट में 4300 अंडे थे, जिनमें से हैचिंग के जरिए 4144 नन्हें मेहमानों का जन्म हुआ है। जबकि साल प्रजाति के 53 नेस्ट थे, जिनमें 1155 अंडे थे, 1016 नन्हें मेहमानों का जन्म हुआ है।
रेंजर ने बताया कि चंबल नदी में कछुओं की 8 प्रजातियां संरक्षित हो रही हैं। ये संकटग्रस्त प्रजातियां हैं ढोर, साल, पचेड़ा, काली ढोर, स्योत्तर, कटहवा, सुंदरी, मोरपंखी। जिनमें कठोर कवच वाली ढोर, साल, पचेड़ा, काली ढोर तथा नरम कवच वाली स्योत्तर, कटहवा, सुंदरी, मोरपंखी शामिल हैं। कठोर कवच वाले कछुए शाकाहारी होते हैं, इनका कवच अस्थियों का बना होता है। नदी की सड़ी गली वनस्पतियों को खाकर पानी को साफ रखते हैं, जबकि नरम कवच वाले कछुए मांसाहारी होते हैं। इनका कवच मांस पेशियों का बना होता है। नदी के मरे और सड़े गले जीव जंतुओं को खाकर पानी को साफ रखते हैं।
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रेंजर ने बताया कि चंबल नदी में कछुओं की 8 प्रजातियां संरक्षित हो रही हैं। ये संकटग्रस्त प्रजातियां हैं ढोर, साल, पचेड़ा, काली ढोर, स्योत्तर, कटहवा, सुंदरी, मोरपंखी। जिनमें कठोर कवच वाली ढोर, साल, पचेड़ा, काली ढोर तथा नरम कवच वाली स्योत्तर, कटहवा, सुंदरी, मोरपंखी शामिल हैं। कठोर कवच वाले कछुए शाकाहारी होते हैं, इनका कवच अस्थियों का बना होता है। नदी की सड़ी गली वनस्पतियों को खाकर पानी को साफ रखते हैं, जबकि नरम कवच वाले कछुए मांसाहारी होते हैं। इनका कवच मांस पेशियों का बना होता है। नदी के मरे और सड़े गले जीव जंतुओं को खाकर पानी को साफ रखते हैं।
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