Agra: बेटों की टीम में खेलकर मजबूत बन रहीं क्रिकेटर बेटियां, आगरा क्रिकेट में शुरू हुआ नया प्रयोग
आगरा क्रिकेट में बालक वर्ग की टीमों में बेटियां भी जमकर चौके-छक्के लगा रही हैं। जिला क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ आगरा के अध्यक्ष सुनील जोशान कहते हैं कि निश्चित रूप से इस प्रयोग से बालक और बालिका दोनों खिलाड़ियों में आत्मविश्वास बढ़ता है।
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आगरा जिले के क्रिकेट में शुरू हुआ नया प्रयोग टीम के साथ-साथ क्रिकेटर बेटियों में नया जोश भर रहा है। आत्मविश्वास बढ़ने से वो मजबूत बन रही हैं। कई बार अभ्यास मैच में उनका शानदार प्रदर्शन मिसाल बनकर उभर रहा है। ज्यादातर एकेडमी ने खेले जाने वाले बालक वर्ग के मैत्री क्रिकेट मैचों में यह नया प्रयोग शुरू किया है।
जिला क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ आगरा के अध्यक्ष सुनील जोशान कहते हैं कि निश्चित रूप से इस प्रयोग से बालक और बालिका दोनों खिलाड़ियों में आत्मविश्वास बढ़ता है। यह पल उस समय ज्यादा खास हो जाता है, जब मैच में बालिका क्रिकेटर को सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी घोषित किया जाता है।
एक महीने में खेले गए 20 मैच
कॉसमॉस क्रिकेट एकेडमी के हेड कोच फिरोज खान का कहना है कि काफी अच्छे परिणाम सामने आ रहे हैं। एकेडमी में पिछले एक महीने में 20 मैच खेले गए। इनमें से सात मैचों में एकेडमी की क्रिकेटर पूजा, रागिनी और विनती सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी रहीं।
जिला क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ आगरा के पूर्व संयुक्त सचिव तपेश शर्मा ने इस नए प्रयोग को आगे ले जाने की जिम्मेदारी ली है। तपेश कहते हैं कि दिसंबर के पहले सप्ताह में आयोजित होने वाली क्रिकेट प्रतियोगिता में हरेक टीम से दो महिला खिलाड़ियों का खेलना जरूरी होगा।
पहली बार में बनाए 53 रन
अरुणाचल प्रदेश की सीनियर वुमेंस क्रिकेट टीम सदस्य मेघा शर्मा ने बताया कि ज्यादा से ज्यादा मैच खेलना मेरा मकसद है। कोशिश रहती है कि लड़कों के साथ मैच खेलने का अवसर नहीं खोया जाए। मैंने एक बार अपने हेड कोच फिरोज खान सर से लड़कों के साथ मैच खेलने की इच्छा जताई थी। उन्होने मेरी इस पहल को सराहा। मुझे साथ में खेलने के मौका दिया। मुझे खुशी हुई कि पहले ही मैच में 53 रन बनाने और दो विकेट लेने पर मुझे मैच का सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी घोषित किया गया।
नया आत्मविश्वास पैदा हुआ
जिला क्रिकेटर प्रियंका लूथरा ने कहा कि मुझे काफी कम मैच खेलने को मिल रहे थे। मैं भी एक दिन लड़कों की टीम का हिस्सा बन गई। एक नया आत्मविश्वास पैदा हुआ। मुझे लगा कि काफी कुछ एक सा है। मैं कोशिश करने लगी कि अच्छे रन करूं। मैत्री मैच में दो बार अर्धशतक लगाया। इसके बाद लड़कों के साथ अभ्यास मैच खेलकर ज्यादा से ज्यादा मैच खेलने की सुविधा मुझे मिल गई है।
जिला स्तर पर होनी चाहिए ऐसी टीम
गोयनका चाहर क्रिकेट एकेडमी के सहायक कोच पुनीत वशिष्ठ मानते हैं कि जिला स्तर पर भी इस तरह के क्रिकेट मैच आयोजित होने चाहिए। इसके लिए महिला और पुरुषों की संख्या तय कर देनी चाहिए। इसके काफी अच्छे परिणाम सामने आएंगे। क्रिकेटर बेटियों को भी ज्यादा से ज्यादा मैच खेलने के लिए मिल सकेंगे।