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UP: डिजिटल अरेस्ट में क्या होता है, युवती ने 31 दिन क्या कुछ नहीं झेला, जान लें...ऐसे गवां दिए 16.20 लाख रुपये
Mon, 26 May 2025 08:26 AM IST
धीरेन्द्र सिंह
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Mon, 26 May 2025 08:26 AM IST
सार
डिजिटल अरेस्ट की दहशत वो ही जान सकता है, जो इसका शिकार हुआ हो। आगरा की युवती ने 31 दिन तक ऐसी दहशत में जीवन बिताया, कि सोचने में भी डर रही है। इस दौरान युवती ने 16.20 लाख रुपये भी गवां दिए।
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युवती का सांकेतिक फोटो
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
साइबर ठगों ने सिंगापुर में फर्जी कूरियर भेजने के नाम पर शाहगंज की युवती को धमकाकर डिजिटल अरेस्ट किया। मुंबई पुलिस, सीबीआई, ईडी और नारकोटिक्स डिपार्टमेंट के अधिकारी बनकर 31 दिन तक स्काइप एप से जोड़कर उसकी हर गतिविधि पर नजर रखे रहे। हांगकांग सहित 4 नंबरों से वीडियो काॅल किए। 4 बैंक खातों में 16.20 लाख रुपये जमा कराने के बाद भी 5 लाख और मांगे। रकम नहीं देने पर निजी वीडियो बनाने के बाद काॅल काट दिया।
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पीड़ित युवती को दोस्तों से साइबर ठगी का पता चला, तब उन्होंने पुलिस से शिकायत की। पुलिस ने 5 महीने बाद एक आरोपी रविंद्र प्रसाद वर्मा को सीकर, राजस्थान से गिरफ्तार करने में सफलता प्राप्त की है। उसके खाते में 9 लाख रुपये जमा हुए थे। उसके साथ साइबर ठग अभी पुलिस की पकड़ से बाहर हैं। शाहगंज क्षेत्र की रहने वाली युवती एक प्राइवेट कंपनी में कार्यरत हैं। उनके पास 24 दिसंबर 2024 को विदेश के नंबर से व्हाट्सएप काॅल आई थी।
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युवती ने बताया कि काॅल पर एक अन्य युवती थी। उसने अपना नाम मेघा बताया। कहा कि वह कूरियर कंपनी से बोल रही है। आपके नाम से एक पार्सल होल्ड है। उन्होंने पार्सल भेजने से मना किया तो युवती बोली कि यह आपका ही है। इसमें 5 पासपोर्ट, 3 क्रेडिट कार्ड, स्माल बैंक के कागजात, 3.5 किलोग्राम कपड़े, 58 पैकेट में दवाएं, 17354 रुपये हैं। रिसीवर की जगह पर सिंगापुर का पता लिखा है।
मना करने पर बताया कि उनकी पहचान का गलत प्रयोग किया जा रहा है। मुंबई पुलिस से बात करने की सलाह दी। बाद में हेमराज नामक पुलिस अधिकारी ने बात कर सीबीआई के दस्तावेज भेजे, जिनमें उनका नाम और आधार नंबर लिखा था। उन्होंने काॅल काटने से मना कर दिया। मुंबई में केस दर्ज करने की जानकारी देकर रुपयों की मांग की। बाद में मोबाइल की जगह स्काइप एप पर लैपटाॅप से कनेक्ट करके बाहर जाने से मना कर दिया।
काॅल भी नहीं काटने दिया। 27 दिसंबर से पुलिस, सीबीआई, ईडी, नारकोटिक्स के अधिकारी बनकर 16.20 लाख रुपये लेने के बाद भी 5 लाख और देने के लिए दबाव बनाया। मगर, रुपये नहीं थे। इस पर उनके वीडियो भी बनाए। 23 जनवरी को काॅल कट किया। बाद में उन्होंने इस बारे में अपने दोस्तों को बताया। तब उन्हें डिजिटल अरेस्ट का पता चला।
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ई-रिक्शा चालक कर रहा था आईफोन का प्रयोग
साइबर थाना पुलिस के मुताबिक, आरोपी रविंद्र प्रसाद वर्मा ठग गिरोह की सबसे निचली कड़ी है। उसने अपने खाते में रकम ली थी। वह ई-रिक्शा चलाता है। पुलिस ने कई दिन तक नजर रखने के बाद गिरफ्तारी की। वह रिक्शा दिखाने के लिए अपने पास रखता है। दिनभर मोबाइल पर लगा रहता है। परिवार में इकलाैता है। बीए पास है। उसने हाल ही में 60 हजार रुपये आईफोन भी खरीदा था। पूछताछ में उसने अपने साथियों के नाम नहीं बताए हैं। पुलिस की जांच में सामने आया है कि पीड़ित युवती से रकम 4 खातों में जमा कराई थी। काॅल भी हांगकांग, तमिलनाडु और असम की वर्चुअल आईडी के नंबर से किए गए थे।
साइबर थाना पुलिस के मुताबिक, आरोपी रविंद्र प्रसाद वर्मा ठग गिरोह की सबसे निचली कड़ी है। उसने अपने खाते में रकम ली थी। वह ई-रिक्शा चलाता है। पुलिस ने कई दिन तक नजर रखने के बाद गिरफ्तारी की। वह रिक्शा दिखाने के लिए अपने पास रखता है। दिनभर मोबाइल पर लगा रहता है। परिवार में इकलाैता है। बीए पास है। उसने हाल ही में 60 हजार रुपये आईफोन भी खरीदा था। पूछताछ में उसने अपने साथियों के नाम नहीं बताए हैं। पुलिस की जांच में सामने आया है कि पीड़ित युवती से रकम 4 खातों में जमा कराई थी। काॅल भी हांगकांग, तमिलनाडु और असम की वर्चुअल आईडी के नंबर से किए गए थे।
वीडियो काॅल कर कोई धमकाए तो कट कर दें
डीसीपी सिटी सोनम कुमार ने बताया कि डिजिटल अरेस्ट करने के लिए साइबर ठग लोगों को जेल भेजने का भय दिखाते हैं। फर्जी कागजात भेजते हैं। इसके बाद रुपयों की मांग करते हैं। पुलिस कभी फोन पर किसी को अरेस्ट नहीं करती है। इसकी शिकायत नजदीक के थाने में करें। 1930 पर भी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। पुलिस सख्त कार्रवाई करेगी।
डीसीपी सिटी सोनम कुमार ने बताया कि डिजिटल अरेस्ट करने के लिए साइबर ठग लोगों को जेल भेजने का भय दिखाते हैं। फर्जी कागजात भेजते हैं। इसके बाद रुपयों की मांग करते हैं। पुलिस कभी फोन पर किसी को अरेस्ट नहीं करती है। इसकी शिकायत नजदीक के थाने में करें। 1930 पर भी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। पुलिस सख्त कार्रवाई करेगी।