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Agra News: गुजरती रहीं पीढ़ी, सपा नहीं चढ़ सकी नगर पालिका की सीढ़ी
Mon, 15 May 2023 01:05 AM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
Updated Mon, 15 May 2023 01:05 AM IST
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मैनपुरी।
सियासत में सपा और मैनपुरी का साथ चोली दामन का है। सपा के गठन के बाद से लेकर आज तक यहां लोकसभा और विधानसभा चुनाव में सपा का दबदबा रहा है। लेकिन निकाय चुनाव में पीढ़ी गुजरती रहीं, लेकिन सपा नगर पालिका की सीढ़ी नहीं चढ़ सकी। इस बार भी सपा को नगर पालिका के द्वार से लौटना पड़ा।
1992 में सपा के गठन के बाद से ही मैनपुरी की राजनीति में ऐसा जादू चला तो आज भी मतदाताओं के सिर चढ़कर बोलता है। लोकसभा सीट मैनपुरी जहां सपा का अभेद किला है तो वहीं विधानसभा चुनावों में भी सपा का वर्चस्व कायम रहा है। भगवा लहर में भी जिले की चार विधानसभा सीटों में से दो पर सपा का कब्जा है। इसमें करहल सीट से तो खुद सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव विधायक हैं।
लेकिन नगर पालिका की राहत सपा के लिए आज तक आसान नहीं हो सकी। तीन दशक से लगातार नगर पालिका की कुर्सी पर काबिज होने के लिए सपा भरसक कोशिश करती रही है। लेकिन यहां कामयाबी हासिल नहीं हो सकी। यहां भाजपा और कांग्रेस के साथ ही निर्दलीय का दबदबा रहा। इस बार भी सपा ने नगर पालिका चेयरमैन की कुर्सी के लिए खूब जोर लगाया। लेकिन नतीजे आए तो सपा को हार का मुंह देखना पड़ा। हार के साथ ही एक बार फिर नगर पालिका फतेह का सपना अधूरा रह गया है। वहीं भाजपा को एक बार फिर जीत मिली है। ऐसे में सपा को नगर पालिका की जीत के लिए कोई नया सियासी दांव लगाना होगा।
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लोधी कार्ड ने बढ़ाया सपा का जनाधार
नगर पालिका फतेेेह करने के लिए सपा ने इस बार लोधी कार्ड खेला था। भाजपा का कोर वोटर कहे जाने वाली लोधी वोट में सेंधमारी के लिए सुमन वर्मा को मैदान में उतारा था। सपा का ये कार्ड नगर पालिका चुनाव में खूब चला। लोधी कार्ड ने कहीं न कहीं पालिका में सपा के जनाधार को मजबूत किया है। आने वाले चुनावों में भी अब लोधी वोट बैंक में सपा की पकड़ अच्छी रहने की उम्मीद है।
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डिंपल यादव के लिए भी चुनौती है नगर पालिका
सपा के लिए ही नहीं बल्कि अब नगर पालिका चेयरमैन सीट डिंपल यादव के लिए चुनौती बन गई है। वे उप चुनाव में मैनपुरी से सांसद चुनी गई हैं। इससे पहले मैनपुरी की राजनीति में उनका दखल नहीं था। लेकिन अब उन्होंने ही मैनपुरी की कमान संभाल रखी है। ऐसे में अगर वे नगर पालिका की जीत का कारनामा कर पातीं तो उनकी पकड़ मजबूत होने के साथ ही एक चुनौती और कम हो जाती।
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सपा ने पूरी ईमानदारी के साथ नगर पालिका चेयरमैन पद का चुनाव लड़ा। जनता के भरपूर समर्थन के बाद भी मशीनरी द्वारा किए गए अन्याय के कारण सपा को हार का सामना करना पड़ा है। जनता ही अब इसका जवाब भी देगी।
-आलोक कुमार शाक्य, जिलाध्यक्ष सपा।
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सियासत में सपा और मैनपुरी का साथ चोली दामन का है। सपा के गठन के बाद से लेकर आज तक यहां लोकसभा और विधानसभा चुनाव में सपा का दबदबा रहा है। लेकिन निकाय चुनाव में पीढ़ी गुजरती रहीं, लेकिन सपा नगर पालिका की सीढ़ी नहीं चढ़ सकी। इस बार भी सपा को नगर पालिका के द्वार से लौटना पड़ा।
1992 में सपा के गठन के बाद से ही मैनपुरी की राजनीति में ऐसा जादू चला तो आज भी मतदाताओं के सिर चढ़कर बोलता है। लोकसभा सीट मैनपुरी जहां सपा का अभेद किला है तो वहीं विधानसभा चुनावों में भी सपा का वर्चस्व कायम रहा है। भगवा लहर में भी जिले की चार विधानसभा सीटों में से दो पर सपा का कब्जा है। इसमें करहल सीट से तो खुद सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव विधायक हैं।
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लेकिन नगर पालिका की राहत सपा के लिए आज तक आसान नहीं हो सकी। तीन दशक से लगातार नगर पालिका की कुर्सी पर काबिज होने के लिए सपा भरसक कोशिश करती रही है। लेकिन यहां कामयाबी हासिल नहीं हो सकी। यहां भाजपा और कांग्रेस के साथ ही निर्दलीय का दबदबा रहा। इस बार भी सपा ने नगर पालिका चेयरमैन की कुर्सी के लिए खूब जोर लगाया। लेकिन नतीजे आए तो सपा को हार का मुंह देखना पड़ा। हार के साथ ही एक बार फिर नगर पालिका फतेह का सपना अधूरा रह गया है। वहीं भाजपा को एक बार फिर जीत मिली है। ऐसे में सपा को नगर पालिका की जीत के लिए कोई नया सियासी दांव लगाना होगा।
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लोधी कार्ड ने बढ़ाया सपा का जनाधार
नगर पालिका फतेेेह करने के लिए सपा ने इस बार लोधी कार्ड खेला था। भाजपा का कोर वोटर कहे जाने वाली लोधी वोट में सेंधमारी के लिए सुमन वर्मा को मैदान में उतारा था। सपा का ये कार्ड नगर पालिका चुनाव में खूब चला। लोधी कार्ड ने कहीं न कहीं पालिका में सपा के जनाधार को मजबूत किया है। आने वाले चुनावों में भी अब लोधी वोट बैंक में सपा की पकड़ अच्छी रहने की उम्मीद है।
डिंपल यादव के लिए भी चुनौती है नगर पालिका
सपा के लिए ही नहीं बल्कि अब नगर पालिका चेयरमैन सीट डिंपल यादव के लिए चुनौती बन गई है। वे उप चुनाव में मैनपुरी से सांसद चुनी गई हैं। इससे पहले मैनपुरी की राजनीति में उनका दखल नहीं था। लेकिन अब उन्होंने ही मैनपुरी की कमान संभाल रखी है। ऐसे में अगर वे नगर पालिका की जीत का कारनामा कर पातीं तो उनकी पकड़ मजबूत होने के साथ ही एक चुनौती और कम हो जाती।
सपा ने पूरी ईमानदारी के साथ नगर पालिका चेयरमैन पद का चुनाव लड़ा। जनता के भरपूर समर्थन के बाद भी मशीनरी द्वारा किए गए अन्याय के कारण सपा को हार का सामना करना पड़ा है। जनता ही अब इसका जवाब भी देगी।
-आलोक कुमार शाक्य, जिलाध्यक्ष सपा।