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यूपी: गारमेंट हब के लिए आगरा के नाम पर लगी मुहर, राज्यमंत्री ने किया एलान
Fri, 19 Jun 2020 02:56 PM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Fri, 19 Jun 2020 02:56 PM IST
सार
- प्रदेश में कम से कम पांच अपैरल पार्कों की स्थापना होगी
- हथकरघा एवं पावरलूम बुनकरों के लिए भी नई योजना
- कपड़ों को डाईंग एवं प्रिंटिंग की सुविधा आगरा-अलीगढ़ में भी
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प्रदेश के एमएसएमई राज्यमंत्री चौधरी उदयभान सिंह
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
गारमेंट हब (अपैरल पार्क) के लिए आगरा और अलीगढ़ के नाम पर मुहर लग गयी है। शुक्रवार को सर्किट हाउस में प्रदेश के एमएसएमई राज्यमंत्री चौधरी उदयभान सिंह ने प्रेसवार्ता कर ये जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए प्रदेश सरकार ने जो रोड मैप तैयार किया है उसमें आगरा और अलीगढ़ को भी शामिल कर लिया गया है।
प्रदेश में कम से कम पांच अपैरल पार्कों की स्थापना होनी है। योजना के तहत गारमेंटिंग एवं अपैरल क्षेत्र में काम करने के लिए युवाओं को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। हथकरघा एवं पावरलूम बुनकरों के लिए नई योजना भी लाई जाएगी।
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यह अपैरल पार्क यूपीईआईडीए द्वारा विकसित किए जाएंगे और यह एक्सप्रेस-वे के किनारे स्थापित होंगे। फैसीबिल्टी स्टडी और डीपीआर तैयार करने के लिए जल्दी ही कंसल्टेंट ट्रांसेक्शन एडवाइजर की नियुक्ति होगी।
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प्रदेश में कम से कम पांच अपैरल पार्कों की स्थापना होनी है। योजना के तहत गारमेंटिंग एवं अपैरल क्षेत्र में काम करने के लिए युवाओं को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। हथकरघा एवं पावरलूम बुनकरों के लिए नई योजना भी लाई जाएगी।
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प्रदेश में गारमेंट्स की करीब 4500 औद्योगिक इकाइयां हैं। करीब तीन हजार इकाइयां गौतम बुद्ध नगर में और 1500 इकाइयां गाजियाबाद, कानपुर, लखनऊ, बरेली में हैं। प्रतिवर्ष 22,000 करोड़ का निर्यात होता है। इस निर्यात को 50 हजार करोड़ तक बढ़ाया जा सकता है। अगले पांच वर्षों में 20 हजार करोड़ के निवेश से 20 लाख रोजगार सृजित हो सकते हैं।
अभी तक प्रदेश में स्थापित गारमेंट और अपैरल इकाइयों के लिए डाईंग एवं प्रिंटिंग की सुविधा यहां उपलब्ध नहीं है। प्रदेश में स्थापित ज्यादातर गारमेंट इकाइयों को भीलवाड़ा, सूरत आदि शहरों में अपने कपड़ों को डाईंग एवं प्रिंटिंग के लिए भेजना पड़ता है। इससे न केवल समय का नुकसान होता है बल्कि खर्चा भी अधिक हो रहा है।
उन्होंने बताया कि एनसीआर के बाहर अलीगढ़ आदि में डाईंग व प्रिंटिंग क्लस्टर की स्थापना की जा सकती है। इससे गारमेंट्स इकाइयों की कार्यदक्षता बढ़ेगी और खर्चों में भी कमी आएगी। इसके अलावा गांव में कैसे छोटे-छोटे उद्योगों का सृजन हो, इस पर भी मंथन चल रहा। इस दौरान लघु उद्योग भारती से राकेश गर्ग, एफमैक के अध्यक्ष पूरन डावर, नेशनल चैम्बर के अध्यक्ष राजीव अग्रवाल आदि मौजूद रहे।
अभी तक प्रदेश में स्थापित गारमेंट और अपैरल इकाइयों के लिए डाईंग एवं प्रिंटिंग की सुविधा यहां उपलब्ध नहीं है। प्रदेश में स्थापित ज्यादातर गारमेंट इकाइयों को भीलवाड़ा, सूरत आदि शहरों में अपने कपड़ों को डाईंग एवं प्रिंटिंग के लिए भेजना पड़ता है। इससे न केवल समय का नुकसान होता है बल्कि खर्चा भी अधिक हो रहा है।
उन्होंने बताया कि एनसीआर के बाहर अलीगढ़ आदि में डाईंग व प्रिंटिंग क्लस्टर की स्थापना की जा सकती है। इससे गारमेंट्स इकाइयों की कार्यदक्षता बढ़ेगी और खर्चों में भी कमी आएगी। इसके अलावा गांव में कैसे छोटे-छोटे उद्योगों का सृजन हो, इस पर भी मंथन चल रहा। इस दौरान लघु उद्योग भारती से राकेश गर्ग, एफमैक के अध्यक्ष पूरन डावर, नेशनल चैम्बर के अध्यक्ष राजीव अग्रवाल आदि मौजूद रहे।
बेशकीमती जमीन का हो उपयोग
राज्यमंत्री में मुताबिक ताजमहल, दयालबाग, सिकंदरा, एत्माद्दौला आदि में स्मारकों के पास विभिन्न सरकारी स्थानों की बेशकीमती जमीनें मौजूद हैं। जिनका कोई उपयोग नहीं हो पा रहा। ऐसी जगहों पर अस्थाई रूप से हुनर का बाजार बनाया जा सकता है।
दिल्ली हाट बाजार की तर्ज पर यहां इस तरह के बाजारों में अस्थाई स्टॉल देकर युवाओं को आगे बढ़ाया जा सकता है। ऐसा हाट बाजार विकसित हो जहां खादी ग्रामोद्योग, जूट उद्योग, माटी कला आदि के हुनरमंद लोग अपने उत्पाद पर्यटकों के समक्ष पेश कर सकें। वे जल्दी ही इस योजना का प्रारूप तैयार करके मुख्यमंत्री को अपना प्रेजेंटेशन देंगे।
राज्यमंत्री में मुताबिक ताजमहल, दयालबाग, सिकंदरा, एत्माद्दौला आदि में स्मारकों के पास विभिन्न सरकारी स्थानों की बेशकीमती जमीनें मौजूद हैं। जिनका कोई उपयोग नहीं हो पा रहा। ऐसी जगहों पर अस्थाई रूप से हुनर का बाजार बनाया जा सकता है।
दिल्ली हाट बाजार की तर्ज पर यहां इस तरह के बाजारों में अस्थाई स्टॉल देकर युवाओं को आगे बढ़ाया जा सकता है। ऐसा हाट बाजार विकसित हो जहां खादी ग्रामोद्योग, जूट उद्योग, माटी कला आदि के हुनरमंद लोग अपने उत्पाद पर्यटकों के समक्ष पेश कर सकें। वे जल्दी ही इस योजना का प्रारूप तैयार करके मुख्यमंत्री को अपना प्रेजेंटेशन देंगे।