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गंगा में जलस्तर बढ़ते ही उफान पर आईं नहर, निगरानी बढ़ाई
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कासगंज में उफान पर हजारा नहर
- फोटो : KASGANJ
कासगंज। पहाड़ों पर हो रही लगातार बारिश से इन दिनों राजस्थान और गुजरात में भयंकर बाढ़ के हालात हैं। ऐसे हालात गंगा में न बन जाए इसे लेकर तराई क्षेत्र के लोगों की चिंताएं बढ़ गई हैं। हालांकि अभी गुजरात-राजस्थान जैसी स्थिति नहीं हैं लेकिन बैराजों से निरंतर छोड़े जा रहे हजारों क्यूसेक पानी ने नहर-नदियों में काफी दबाव बढ़ा दिया है। इस असर नहरों में दिखने लगा है। हजारा नहर और गोरहा नहर में पूरी क्षमता के अनुसार पानी निकाला जा रहा है। पानी का दबाव कम करने के लिए सिंचाई विभाग ने जिले भर के सभी माइनरों में पानी छोड़ा है वहीं दूसरे जिलों के सिंचाई विभाग के अफसरों से संपर्क कर वहां के भी माइनर खुलवा दिए हैं।
जिलेभर में नहर और नदियों का जाल बिछा हुआ है। पहाड़ों पर हो रही निरंतर बारिश के बाद बैराजों से पानी छोड़ा जा रहा है। यह पानी नहर और नदियों में काफी दबाव बना रहा है। कछला गंगा नदी में जलस्तर जरूर बढ़ गया है, लेकिन अभी बाढ़ का खतरा नहीं है। हजारा और गोरहा नहरें तो उफान पर है और निर्धारित क्षमता के आधार पर फुल हैं। बैराजों से और भी पानी छोड़ा गया है। ऐसे में इन नहरों में पानी क्षमता से अधिक पहुंच सकता है। सिंचाई विभाग ने सतर्कता बरतते हुए सभी माइनर पानी के लिए खोल दिए हैं। जिससे कि माइनरों के रास्ते पानी खेतों में पहुंच जाए और नहर नदियों में पानी का दबाव कम हो सके। सिंचाई विभाग ने काली नदी में भी पानी छोड़ा है। विभागीय अफसरों ने फर्रुखाबाद और कानपुर के अफसरों से संपर्क कर वहां भी माइनरों में पानी छोड़े जाने का अनुरोध किया है। बता दें कि गोरहा नहर फर्रुखाबाद जिले तक के खेतों को पानी देती है और हजारा नहर कानपुर तक पानी पहुंचाती है।
आंकड़े की नजर से-
- 37 माइनर हैं जिलेभर में।
- 2 शाखाओं की तीन नहरें हैं जिले में।
- 2 नदियां गुजरतीं हैं जिले की सीमा से।
गंगा के जलस्तर पर एक नजर-
- 47282 क्यूसेक पानी हरिद्वार से छोड़ा गया।
- 49142 क्यूसेक पानी बिजनौर से छोड़ा गया।
- 16806 क्यूसेक पानी नरौरा से छोड़ा गया।
- 162 मीटर के निशान पर है कछला में जलस्तर।
नहरों का जलस्तर-
- 1100 क्यूसेक पानी की क्षमता है गोरहा नहर की।
- 13000 क्यूसेक पानी की क्षमता है हजारा नहर की।
- सभी माइनरों में पानी छोड़ दिया गया है। नहर नदियों में पानी का दबाव कम करने के लिए माइनर खोले गए हैं। हजारा नहर, गोरहा नहर की जितनी क्षमता है उनमें उतना पानी छोड़ा जा चुका है। पंजाबी शर्मा, सहायक बाढ़ प्रभारी।
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जिलेभर में नहर और नदियों का जाल बिछा हुआ है। पहाड़ों पर हो रही निरंतर बारिश के बाद बैराजों से पानी छोड़ा जा रहा है। यह पानी नहर और नदियों में काफी दबाव बना रहा है। कछला गंगा नदी में जलस्तर जरूर बढ़ गया है, लेकिन अभी बाढ़ का खतरा नहीं है। हजारा और गोरहा नहरें तो उफान पर है और निर्धारित क्षमता के आधार पर फुल हैं। बैराजों से और भी पानी छोड़ा गया है। ऐसे में इन नहरों में पानी क्षमता से अधिक पहुंच सकता है। सिंचाई विभाग ने सतर्कता बरतते हुए सभी माइनर पानी के लिए खोल दिए हैं। जिससे कि माइनरों के रास्ते पानी खेतों में पहुंच जाए और नहर नदियों में पानी का दबाव कम हो सके। सिंचाई विभाग ने काली नदी में भी पानी छोड़ा है। विभागीय अफसरों ने फर्रुखाबाद और कानपुर के अफसरों से संपर्क कर वहां भी माइनरों में पानी छोड़े जाने का अनुरोध किया है। बता दें कि गोरहा नहर फर्रुखाबाद जिले तक के खेतों को पानी देती है और हजारा नहर कानपुर तक पानी पहुंचाती है।
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आंकड़े की नजर से-
- 37 माइनर हैं जिलेभर में।
- 2 शाखाओं की तीन नहरें हैं जिले में।
- 2 नदियां गुजरतीं हैं जिले की सीमा से।
गंगा के जलस्तर पर एक नजर-
- 47282 क्यूसेक पानी हरिद्वार से छोड़ा गया।
- 49142 क्यूसेक पानी बिजनौर से छोड़ा गया।
- 16806 क्यूसेक पानी नरौरा से छोड़ा गया।
- 162 मीटर के निशान पर है कछला में जलस्तर।
नहरों का जलस्तर-
- 1100 क्यूसेक पानी की क्षमता है गोरहा नहर की।
- 13000 क्यूसेक पानी की क्षमता है हजारा नहर की।
- सभी माइनरों में पानी छोड़ दिया गया है। नहर नदियों में पानी का दबाव कम करने के लिए माइनर खोले गए हैं। हजारा नहर, गोरहा नहर की जितनी क्षमता है उनमें उतना पानी छोड़ा जा चुका है। पंजाबी शर्मा, सहायक बाढ़ प्रभारी।
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