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जब जिम्मेदार ही लापरवाह तो कैसे मिले बाढ़ से मुक्ति
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कासगंज कछला गंगाघाट पर बुधवार को गंगा के जलस्तर का दृश्य
- फोटो : KASGANJ
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कासगंज। शासन और प्रशासन ने बांध परियोजनाओं को लेकर लापरवाही की हदें पार कर दीं हैं। करीब 10 वर्षों से यह प्रस्ताव शासन में लंबित हैं जिसे लेकर शासन, प्रशासन और जनप्रतिनिधि गंभीर नहीं। किसी को भी बाढ़ की त्रासदी झेल रहे ग्रामीणों की सुध नहीं है कि ग्रामीण किन हालातों में रह रहे हैं।
मात्र 31 करोड़ लागत के ये प्रस्ताव धन आवंटन के लिए रुके पड़े हैं और पिछले 10 वर्षों में न पिछली और न ही मौजूदा सरकार इन बांधों के निर्माण के लिए धन आवंटन कर सकी है। जन प्रतिनिधियों के पास भी इसका जवाब नहीं हैं। गंगा नदी के दाहिने किनारे पर ग्राम बड़ौदा से दतलाना तक ग्राम बघेला, खड़ेरी, लहरा, कादरवाड़ी, घटिया, बनुपुर सहित अन्य गांव की आबादी एवं कृषि भूमि को बाढ़ सुरक्षा प्रदान करने के लिए 15.4 किलोमीटर लंबाई का तटबंध निर्माण योजना का प्रस्ताव 15 करोड़ 64 लाख रुपये का लंबित है। इसके अलावा समसपुर, नरदौली तटबंध का प्रस्ताव समसपुर से नरदौली तक 21.06 किलोमीटर की लंबाई का प्रस्ताव 16.21 करोड़ लाख रुपये का लंबित है। यह दोनों ही प्रस्ताव प्रदेश की बाढ़ नियंत्रण परिषद की स्थायी संचालन समिति के द्वारा स्वीकृत हैं। इसके बावजूद धन आवंटन नहीं हुआ। यदि ये दोनों बांध बन जाएं तो प्रभावित गांव को बाढ़ से सुरक्षा मिल जाए। बांधों का निर्माण न होने से हर वर्ष जिले के 72 गांव के बाशिंदे बाढ़ की त्रासदी का सामना करने को मजबूर हैं। जनजीवन बेपटरी हो जाने के बाद ग्रामीणों को कड़ी मशक्कत करनी पड़ती है। इसके बाद फिर बाढ़ का सामना करना पड़ता है। बाढ़ प्रभावित इलाके की सड़कें भी टूट जाती हैं जिससे शासन को इन सड़कों को सही कराने के लिए लाखों-करोड़ों रुपये खर्च करने पड़ते हैं।
- बांध बनवाने के लिए लगातार शासन में प्रयास किए जा रहे हैं। सिंचाई मंत्री को भी व्यक्तिगत रूप से मिलकर बाढ़ प्रभावित इलाके की समस्या की जानकारी दी है। सिंचाई मंत्री ने भरोसा भी दिया है कि शीघ्र ही धन आंवटित किया जाएगा। धन आवंटन की प्रतिक्षा कर रहे हैं। यदि इस माह में धन आवंटित नहीं होता तो पुन: कोशिश की जाएगी। ममतेश शाक्य, विधायक पटियाली।
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- दतलाना सहित कई तटबंधों की मरम्मत का धन मिला है। जिनसे दतलाना, कादरगंज सहित अन्य तटबंधों की मरम्मत कराई गई है। कुछ स्टड और परक्यूपाइन के लिए धन मिला था जिससे कटानरोधी काम कराया गया है। जो प्रस्ताव शासन में लंबित हैं उनके लिए बजट की प्रतिक्षा है। पंजाबी शर्मा, जेई, सिंचाई विभाग।
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मात्र 31 करोड़ लागत के ये प्रस्ताव धन आवंटन के लिए रुके पड़े हैं और पिछले 10 वर्षों में न पिछली और न ही मौजूदा सरकार इन बांधों के निर्माण के लिए धन आवंटन कर सकी है। जन प्रतिनिधियों के पास भी इसका जवाब नहीं हैं। गंगा नदी के दाहिने किनारे पर ग्राम बड़ौदा से दतलाना तक ग्राम बघेला, खड़ेरी, लहरा, कादरवाड़ी, घटिया, बनुपुर सहित अन्य गांव की आबादी एवं कृषि भूमि को बाढ़ सुरक्षा प्रदान करने के लिए 15.4 किलोमीटर लंबाई का तटबंध निर्माण योजना का प्रस्ताव 15 करोड़ 64 लाख रुपये का लंबित है। इसके अलावा समसपुर, नरदौली तटबंध का प्रस्ताव समसपुर से नरदौली तक 21.06 किलोमीटर की लंबाई का प्रस्ताव 16.21 करोड़ लाख रुपये का लंबित है। यह दोनों ही प्रस्ताव प्रदेश की बाढ़ नियंत्रण परिषद की स्थायी संचालन समिति के द्वारा स्वीकृत हैं। इसके बावजूद धन आवंटन नहीं हुआ। यदि ये दोनों बांध बन जाएं तो प्रभावित गांव को बाढ़ से सुरक्षा मिल जाए। बांधों का निर्माण न होने से हर वर्ष जिले के 72 गांव के बाशिंदे बाढ़ की त्रासदी का सामना करने को मजबूर हैं। जनजीवन बेपटरी हो जाने के बाद ग्रामीणों को कड़ी मशक्कत करनी पड़ती है। इसके बाद फिर बाढ़ का सामना करना पड़ता है। बाढ़ प्रभावित इलाके की सड़कें भी टूट जाती हैं जिससे शासन को इन सड़कों को सही कराने के लिए लाखों-करोड़ों रुपये खर्च करने पड़ते हैं।
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- बांध बनवाने के लिए लगातार शासन में प्रयास किए जा रहे हैं। सिंचाई मंत्री को भी व्यक्तिगत रूप से मिलकर बाढ़ प्रभावित इलाके की समस्या की जानकारी दी है। सिंचाई मंत्री ने भरोसा भी दिया है कि शीघ्र ही धन आंवटित किया जाएगा। धन आवंटन की प्रतिक्षा कर रहे हैं। यदि इस माह में धन आवंटित नहीं होता तो पुन: कोशिश की जाएगी। ममतेश शाक्य, विधायक पटियाली।
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- दतलाना सहित कई तटबंधों की मरम्मत का धन मिला है। जिनसे दतलाना, कादरगंज सहित अन्य तटबंधों की मरम्मत कराई गई है। कुछ स्टड और परक्यूपाइन के लिए धन मिला था जिससे कटानरोधी काम कराया गया है। जो प्रस्ताव शासन में लंबित हैं उनके लिए बजट की प्रतिक्षा है। पंजाबी शर्मा, जेई, सिंचाई विभाग।