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#LadengeCoronaSe: संकट काल में मसीहा बने डॉक्टर, लोगों की जान बचाने को दिन-रात कर रहे काम
Mon, 26 Apr 2021 04:38 PM IST
मुकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मैनपुरी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मैनपुरी
Published by: मुकेश कुमार
Updated Mon, 26 Apr 2021 04:38 PM IST
सार
कोरोना संक्रमितों की बढ़ती संख्या से जहां आमजनों में भय पैदा हो रहा है, वहीं चिकित्सक और स्वास्थ्य कर्मियों की जिम्मेदारी और बढ़ती जा रही है।
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कोरोना योद्धा: डॉ. आरके सिंह, स्टाफ नर्स रुचि यादव, डॉ. राजकुमार
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
कोरोना संकट के इस दौर में डॉक्टर और नर्सिंग स्टॉफ मरीजों के लिए मसीहा बने हुए हैं। घर-परिवार छोड़कर डॉक्टर और मेडिकल स्टॉफ दिन रात मरीजों को बेहतर इलाज मुहैया कराने में जुटे हुए हैं। मैनपुरी जिले में कई डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी दो महीने से अपने घर नहीं गए हैं। फोन से ही बच्चों और परिजनों का हाल ले रहे हैं।
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अस्पताल में ही बना लिया आशियाना
स्वास्थ्य विभाग ने जिला अस्पताल में कोविड लेवल टू अस्पताल बनाया है। अस्पताल में डॉ. आरके सिंह को नोडल अधिकारी बनाया है। डॉ. आरके सिंह ने बताया कि वह 24 घंटे में मात्र तीन से चार घंटे ही सो पा रहे हैं। यहां भर्ती मरीजों की जान बचाने के लिए लगातार डॉक्टरों और तैनात स्टाफ का उत्साहवर्धन किया जा रहा है। संक्रमण की स्थिति को देखते हुए दो महीने से अस्पताल परिसर में ही अपना आशियाना बनाया है। घर पर आना-जाना बंद कर दिया है।
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इमरजेंसी ड्यूटी के साथ दे रहे लोगों को सलाह
कोरोना संक्रमण के बीच डॉ. राजकुमार लगातार इमरजेंसी ड्यूटी कर रहे हैं। ऐसे में उन्होंने जहां परिजनों से दूरियां बनाकर रखी हैं। वहीं इमरजेंसी में आने वाले मरीजों को हर संभव उपचार भी दे रहे हैं। यही नहीं फोन पर भी होम आइसोलेट लोगों को उनके द्वारा कोरोना संक्रमण से निजात के लिए उपचार का सुझाव दिया जा रहा है। उनका कहना है कि सभी लोग हौसला बनाकर रखें शीघ्र ही वे स्वस्थ होंगे।
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सेवा के लिए परिजनों से बनाई दूरी
जिला अस्पताल में तैनात स्टाफ नर्स रुचि यादव लगातार इमरजेंसी में मरीजों की देखभाल कर रही हैं। वे यहां आने वाले संक्रमित और गैर संक्रमितों को उपचार दे रही हैं। संक्रमितों की सेवा के लिए उन्होंने अपने परिजनों से दूरियां बना ली हैं। परिजनों का हाल चाल फोन से ले रही हैं। घर में यदि किसी को कोई दिक्कत होती है तो फोन से ही डॉक्टरों से सलाह भी दिलवा रही हैं।
उपचार के साथ जांच में भी कर रहे सहयोग
जिला अस्पताल की इमरजेंसी में कार्यकरत स्टाफ नर्स विपिन कुमार दोहरी जिम्मेदारी निभा रहे हैं। एक तरफ जहां वे इमरजेंसी में आने वाले मरीजों को उपचार दे रहे हैं। वहीं कोरोना संदिग्ध दिखने वालों की एंटीजन कार्ड से किट पहनकर जांच भी कर रहे हैं। विपिन का कहना है कि कोरोना संक्रमितों की बीच में रहने के कारण परिजनों से घर में रहते हुए भी दूरियां बना ली गई हैं। घर पहुचंने पर अपने को कमरे के अंदर ही बंद कर लेते हैं।
जिला अस्पताल में तैनात स्टाफ नर्स रुचि यादव लगातार इमरजेंसी में मरीजों की देखभाल कर रही हैं। वे यहां आने वाले संक्रमित और गैर संक्रमितों को उपचार दे रही हैं। संक्रमितों की सेवा के लिए उन्होंने अपने परिजनों से दूरियां बना ली हैं। परिजनों का हाल चाल फोन से ले रही हैं। घर में यदि किसी को कोई दिक्कत होती है तो फोन से ही डॉक्टरों से सलाह भी दिलवा रही हैं।
उपचार के साथ जांच में भी कर रहे सहयोग
जिला अस्पताल की इमरजेंसी में कार्यकरत स्टाफ नर्स विपिन कुमार दोहरी जिम्मेदारी निभा रहे हैं। एक तरफ जहां वे इमरजेंसी में आने वाले मरीजों को उपचार दे रहे हैं। वहीं कोरोना संदिग्ध दिखने वालों की एंटीजन कार्ड से किट पहनकर जांच भी कर रहे हैं। विपिन का कहना है कि कोरोना संक्रमितों की बीच में रहने के कारण परिजनों से घर में रहते हुए भी दूरियां बना ली गई हैं। घर पहुचंने पर अपने को कमरे के अंदर ही बंद कर लेते हैं।