{"_id":"69c7809eb2edcf74dc0529a2","slug":"from-waste-to-wealth-agra-turns-plastic-garbage-into-shoes-and-roads-2026-03-28","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"UP: जिस प्लास्टिक को कूड़ा समझ फेंकते थे, उससे हो रही कमाई; पाइप, शू लास्ट और तैयार हो रहीं सड़कें","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
UP: जिस प्लास्टिक को कूड़ा समझ फेंकते थे, उससे हो रही कमाई; पाइप, शू लास्ट और तैयार हो रहीं सड़कें
Sat, 28 Mar 2026 12:47 PM IST
Dhirendra Singh
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: Dhirendra Singh
Updated Sat, 28 Mar 2026 12:47 PM IST
सार
आगरा नगर निगम ने कुबेरपुर लैंडफिल साइट पर प्लास्टिक कचरे से शू लास्ट, सिंचाई पाइप और सड़क निर्माण सामग्री बनाकर कमाई शुरू कर दी है। पीपीपी मॉडल पर चल रही इस यूनिट से निगम को 20% राजस्व मिल रहा है और कचरे के निपटान की बड़ी समस्या भी हल हो रही है।
विज्ञापन
लैंडफिल साइट
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विस्तार
आगरा के कुबेरपुर लैंडफिल साइट से कचरे के पहाड़ खत्म करने के बाद नगर निगम ने प्लास्टिक कचरे से कमाई करना शुरू कर दिया है। प्लास्टिक वेस्ट प्रोसेसिंग प्लांट लगाकर इससे जूते के निर्माण के लिए जरूरी शू लास्ट बनाए जा रहे हैं। करीब सात फीसदी प्लास्टिक कचरा सड़कों के निर्माण में उपयोग किया जा रहा है।
विज्ञापन
नगर निगम ने कुबेरपुर स्थित इंटीग्रेटेड वेस्ट मैनेजमेंट सिटी में एमआरएफ (मैटेरियल रिकवरी फैसिलिटी) कम प्लास्टिक वेस्ट प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित की है। पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल पर बनाए गए प्लांट से ऐसी प्लास्टिक जो री-साइकिल नहीं की जा सकती, उससे सिंचाई का पाइप, जूते के शू लास्ट और प्लास्टिक ग्रेन्यूल बनाए जा रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
खेतों में सिंचाई के लिए पाइप का निर्माण बड़े पैमाने पर किया जा रहा है। इसी तरह खराब गुणवत्ता की प्लास्टिक से दाने का निर्माण कर इसे सड़कों में बिटुमिन के विकल्प के रूप में करीब सात प्रतिशत तक किया जा रहा है। इससे सड़कों की गुणवत्ता और मजबूती दोनों में सुधार हो रहा है, साथ ही प्लास्टिक कचरा भी निपट रहा है।
20 फीसदी मिल रहा है राजस्व
सहायक नगर आयुक्त अशोक प्रिय गौतम ने बताया कि पीपीपी मॉडल पर आधारित प्लांट के संचालन और रखरखाव का पूरा खर्च निजी भागीदार उठा रहा है। निगम को इस परियोजना के शुद्ध लाभ का 20 प्रतिशत राजस्व के रूप में प्राप्त हो रहा है। इस साल करीब 20 लाख रुपये राजस्व मिलेगा। यह प्रदेश की पहली ऐसी यूनिट है जो कचरे से पाइप, शू लास्ट और प्लास्टिक दाना बना रही है।
सहायक नगर आयुक्त अशोक प्रिय गौतम ने बताया कि पीपीपी मॉडल पर आधारित प्लांट के संचालन और रखरखाव का पूरा खर्च निजी भागीदार उठा रहा है। निगम को इस परियोजना के शुद्ध लाभ का 20 प्रतिशत राजस्व के रूप में प्राप्त हो रहा है। इस साल करीब 20 लाख रुपये राजस्व मिलेगा। यह प्रदेश की पहली ऐसी यूनिट है जो कचरे से पाइप, शू लास्ट और प्लास्टिक दाना बना रही है।
चुनौती भरा था काम
नगर आयुक्त अंकित खंडेलवाल ने बताया कि ऐसा प्लास्टिक कचरा, जो री-साइकिल नहीं हो सकता, उसका निपटारा करना चुनौती था। इससे सिंचाई के पाइप बनाने के साथ शू लास्ट बनाए हैं। कुछ और उत्पाद भी तैयार कराए जाएंगे, जिससे कचरे से कमाई हो और यह री-साइकिल कर फिर उपयोग के लायक बने।
नगर आयुक्त अंकित खंडेलवाल ने बताया कि ऐसा प्लास्टिक कचरा, जो री-साइकिल नहीं हो सकता, उसका निपटारा करना चुनौती था। इससे सिंचाई के पाइप बनाने के साथ शू लास्ट बनाए हैं। कुछ और उत्पाद भी तैयार कराए जाएंगे, जिससे कचरे से कमाई हो और यह री-साइकिल कर फिर उपयोग के लायक बने।