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Agra News: मनरेगा में पति-पत्नी के जॉब कार्ड बनाकर किया फर्जीवाड़ा
Wed, 31 May 2023 11:00 PM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
Updated Wed, 31 May 2023 11:00 PM IST
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मैनपुरी।
विकास खंड मैनपुरी की ग्राम पंचायत नौनेर में रोजगार परक योजना मनरेगा का जमकर दुरुपयोग किया गया। यहां प्रधान और रोजगार सेवक ने धड़ल्ले से नियम विरुद्घ न केवल पति पत्नी के जॉब कार्ड बनवाए, बल्कि उनके खाते में भुगतान भी किया। सौ से अधिक परिवारों में पति-पत्नी के जॉब कार्ड बनवाकर एक बड़े फर्जीवाड़े को अंजाम दिया गया। लगभग 20 लाख रुपये का भुगतान इन खातों में किया गया।
ग्राम पंचायत नौनेर में जिम्मेदारों ने फर्जीवाड़ा करने का कोई मौका नहीं छोड़ा। कभी प्रधान ने अपने परिजन के खातों में सरकारी धनराशि डाल ली तो कभी बिना कार्य कराए ही भुगतान निकाल लिया गया। इतना ही नहीं ग्रामीणों को रोजगार देने के लिए केंद्र सरकार द्वारा संचालित मनरेगा में भी फर्जीवाड़ा कर डाला। नियमानुसार एक परिवार में एक ही जॉब कार्ड बनाया जाता है। इसी पर पति-पत्नी और उनके अविवाहित बच्चे भी मनरेगा में काम कर सकते हैं। लेकिन मनरेगा में फर्जीवाड़ा करने के लिए पूरी प्लानिंग के साथ काम किया गया। इसके तहत नियम विरुद्घ ग्राम पंचायत नौनेर के गांव नई बस्ती में बड़े पैमाने पर सौ के करीब परिवारों में पति-पत्नी के अलग-अलग जॉब कार्ड बनवाए गए। इसके बाद दोनों के जॉब कार्ड से डिमांड जनरेट कर उनके नाम मस्टर रोल भी भरे गए।
प्रक्रिया पूरी करते हुए उनके खातों में धनराशि का भुगतान किया गया। सभी खातों में 20 लाख रुपये से अधिक का भुगतान मनरेगा मजदूरी के रूप में किया गया। इतने बड़े फर्जीवाड़े के बाद भी सब साफ बच गए। लेकिन अब मामले की पोल खुलने के बाद दोषियों में हड़कंप मचा हुआ है। रोजगार सेवक सुधीर कुमार का कहना है कि अब पति-पत्नी के जॉब कार्ड निरस्त करा दिए गए हैं। लेकिन इससे फर्जीवाड़ा तो सही नहीं हो जाएगा।
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पोल खुलने पर निरस्त कराए जा रहे जॉब कार्ड
ग्राम पंचायत में एक बड़े फर्जीवाड़े को अंजाम देने के लिए एक ही परिवार में पति-पत्नी के जॉब कार्ड बनाए गए थे। लेकिन फर्जीवाड़े की पोल खुलने पर जिम्मेदारों के हाथ-पांव फूल गए हैं। अब कार्रवाई से बचने के लिए पति-पत्नी में से एक का जॉब कार्ड डिलीट कराया जा रहा है। हालांकि पूर्व में जो भुगतान किया गया है, उसका डाटा डिलीट करना संभव नहीं होगा।
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केस एक:
ग्राम पंचायत नौनेर के गांव नई बस्ती निवासी नरेंद्र सिंह का मनरेगा में जॉब कार्ड बनाया गया था। इसके साथ ही उनकी पत्नी सपना का भी जॉब कार्ड जारी बना दिया गया। वित्तीय वर्ष 2021-22 में जहां नरेंद्र के खाते में 99 कार्यदिवस की और पत्नी सपना के खाते में 63 कार्यदिवस की मनरेगा मजदूरी का भुगतान किया गया। वहीं वित्तीय वर्ष 2022-23 में नरेंद्र के खाते में 100 दिन और सपना के खाते में भी सौ दिन की मनरेगा मजदूरी का भुगतान किया गया।
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केस दो:
ग्राम पंचायत नौनेर के गांव नई बस्ती निवासी राजू का मनरेगा जॉब कार्ड बना था। इसके बाद भी उनकी पत्नी ललिता का जॉब कार्ड बनाया गया। वित्तीय वर्ष 2021-22 में जहां राजू के खाते में 95 कार्यदिवस की मजदूरी का भुगतान किया गया तो वहीं पत्नी ललिता के खाते में 99 कार्य दिवस की मजदूरी भेजी गई। इसी तरह वित्तीय वर्ष 2022-23 में भी राजू के खाते में सौ कार्यदिवस और ललिता के खाते में सौ कार्यदिवस की मजदूरी भेजी गई।
ग्राम पंचायत नौनेर में जल्द ही एक वृहद जांच शुरू होने जा रही है। इसमें प्रत्येक बिंदु की जांच कराई जाएगी। जहां भी फर्जीवाड़ा या अनियमितता की गई है, उसकी वसूली कराई जाएगी। दोषियों के विरुद्घ कठोर से कठोर कार्रवाई होगी।
-विनोद कुमार, मुख्य विकास अधिकारी।
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विकास खंड मैनपुरी की ग्राम पंचायत नौनेर में रोजगार परक योजना मनरेगा का जमकर दुरुपयोग किया गया। यहां प्रधान और रोजगार सेवक ने धड़ल्ले से नियम विरुद्घ न केवल पति पत्नी के जॉब कार्ड बनवाए, बल्कि उनके खाते में भुगतान भी किया। सौ से अधिक परिवारों में पति-पत्नी के जॉब कार्ड बनवाकर एक बड़े फर्जीवाड़े को अंजाम दिया गया। लगभग 20 लाख रुपये का भुगतान इन खातों में किया गया।
ग्राम पंचायत नौनेर में जिम्मेदारों ने फर्जीवाड़ा करने का कोई मौका नहीं छोड़ा। कभी प्रधान ने अपने परिजन के खातों में सरकारी धनराशि डाल ली तो कभी बिना कार्य कराए ही भुगतान निकाल लिया गया। इतना ही नहीं ग्रामीणों को रोजगार देने के लिए केंद्र सरकार द्वारा संचालित मनरेगा में भी फर्जीवाड़ा कर डाला। नियमानुसार एक परिवार में एक ही जॉब कार्ड बनाया जाता है। इसी पर पति-पत्नी और उनके अविवाहित बच्चे भी मनरेगा में काम कर सकते हैं। लेकिन मनरेगा में फर्जीवाड़ा करने के लिए पूरी प्लानिंग के साथ काम किया गया। इसके तहत नियम विरुद्घ ग्राम पंचायत नौनेर के गांव नई बस्ती में बड़े पैमाने पर सौ के करीब परिवारों में पति-पत्नी के अलग-अलग जॉब कार्ड बनवाए गए। इसके बाद दोनों के जॉब कार्ड से डिमांड जनरेट कर उनके नाम मस्टर रोल भी भरे गए।
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प्रक्रिया पूरी करते हुए उनके खातों में धनराशि का भुगतान किया गया। सभी खातों में 20 लाख रुपये से अधिक का भुगतान मनरेगा मजदूरी के रूप में किया गया। इतने बड़े फर्जीवाड़े के बाद भी सब साफ बच गए। लेकिन अब मामले की पोल खुलने के बाद दोषियों में हड़कंप मचा हुआ है। रोजगार सेवक सुधीर कुमार का कहना है कि अब पति-पत्नी के जॉब कार्ड निरस्त करा दिए गए हैं। लेकिन इससे फर्जीवाड़ा तो सही नहीं हो जाएगा।
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पोल खुलने पर निरस्त कराए जा रहे जॉब कार्ड
ग्राम पंचायत में एक बड़े फर्जीवाड़े को अंजाम देने के लिए एक ही परिवार में पति-पत्नी के जॉब कार्ड बनाए गए थे। लेकिन फर्जीवाड़े की पोल खुलने पर जिम्मेदारों के हाथ-पांव फूल गए हैं। अब कार्रवाई से बचने के लिए पति-पत्नी में से एक का जॉब कार्ड डिलीट कराया जा रहा है। हालांकि पूर्व में जो भुगतान किया गया है, उसका डाटा डिलीट करना संभव नहीं होगा।
केस एक:
ग्राम पंचायत नौनेर के गांव नई बस्ती निवासी नरेंद्र सिंह का मनरेगा में जॉब कार्ड बनाया गया था। इसके साथ ही उनकी पत्नी सपना का भी जॉब कार्ड जारी बना दिया गया। वित्तीय वर्ष 2021-22 में जहां नरेंद्र के खाते में 99 कार्यदिवस की और पत्नी सपना के खाते में 63 कार्यदिवस की मनरेगा मजदूरी का भुगतान किया गया। वहीं वित्तीय वर्ष 2022-23 में नरेंद्र के खाते में 100 दिन और सपना के खाते में भी सौ दिन की मनरेगा मजदूरी का भुगतान किया गया।
केस दो:
ग्राम पंचायत नौनेर के गांव नई बस्ती निवासी राजू का मनरेगा जॉब कार्ड बना था। इसके बाद भी उनकी पत्नी ललिता का जॉब कार्ड बनाया गया। वित्तीय वर्ष 2021-22 में जहां राजू के खाते में 95 कार्यदिवस की मजदूरी का भुगतान किया गया तो वहीं पत्नी ललिता के खाते में 99 कार्य दिवस की मजदूरी भेजी गई। इसी तरह वित्तीय वर्ष 2022-23 में भी राजू के खाते में सौ कार्यदिवस और ललिता के खाते में सौ कार्यदिवस की मजदूरी भेजी गई।
ग्राम पंचायत नौनेर में जल्द ही एक वृहद जांच शुरू होने जा रही है। इसमें प्रत्येक बिंदु की जांच कराई जाएगी। जहां भी फर्जीवाड़ा या अनियमितता की गई है, उसकी वसूली कराई जाएगी। दोषियों के विरुद्घ कठोर से कठोर कार्रवाई होगी।
-विनोद कुमार, मुख्य विकास अधिकारी।