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फरैंजी में प्रधान के डोंगल से सचिव ने निकाले 32 लाख
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मैनपुरी। विकास खंड किशनी की ग्राम पंचायत फरैंजी में बिना प्रधान की जानकारी के सचिव ने लाखों रुपये ग्राम निधि खाते से साफ कर दिए। जानकारी होने पर प्रधान ने जिलाधिकारी से मामले की शिकायत की है। वहीं विभागीय अधिकारी इस मामले को दबाने में जुटे हुए हैं।
जानकारी के अनुसार ग्राम पंचायत फरैंजी में ग्राम प्रधान गोरेलाल और पंचायत सचिव के पद पर नरेंद्र यादव की तैनाती है। तीन माह पहले पंचायत सचिव ने ग्राम निधि खाते से बिना प्रधान की जानकारी के 32.28 लाख रुपये की धनराशि निकाल ली। ये धनराशि तीन बार में निकाली गई। प्रधान को जब मामले की जानकारी हुई तो उन्होंने जिलाधिकारी से मामले की शिकायत की थी। शिकायत की जांच के आदेश दिए गए हैं। सचिव द्वारा लाखों की धनराशि निकालने के चलते पंचायत राज विभाग में खलबली मच गई। मामले की गोपनीय जांच की जा रही है। सूत्रों के अनुसार सचिव को नोटिस जारी कर डीपीआरओ ने जवाब मांगा है। जवाब आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। वहीं सचिव नरेंद्र यादव का कहना है कि मेरे ऊपर लगाए गए आरोप निराधार हैं। डोंगल प्रधान ने ही रिसीव किया है और पैसा भी प्रधान ने ही निकाला है। मुझे बेवजह पूरे मामले में फंसाया जा रहा है।
फर्जी हस्ताक्षर कर सचिव ने लिया डोंगल
प्रधान गोरेलाल का आरोप है कि डीपीआरओ कार्यालय से सीधे सचिव नरेंद्र यादव ने ही प्रधान का डोंगल ले लिया था। इसके लिए उन्होंने प्रधान के फर्जी हस्ताक्षर कर डोंगल प्राप्त किया। प्रधान ने बताया कि जब वे कार्यालय डोंगल लेने गए तो उन्हें डोंगल नहीं मिल सका।
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फर्जीवाड़े पर गठित हुई थी समिति
ग्राम पंचायत फरैंजी पहले भी चर्चा में रह चुका है। बीते वर्ष अक्तूबर में ग्रामीणों ने यहां फर्जी पट्टे किए जाने को लेकर ग्रामीणों ने भूख हड़ताल की थी। जांच में मामला सही पाए जाने के बाद 23 अक्तूबर को तत्कालीन जिलाधिकारी पीके उपाध्याय ने प्रधान के अधिकार सीज करते हुए तीन सदस्यीय समिति गठित कर दी थी। समिति ने गोरेलाल को प्रधान चुना था।
मामले में प्रधान द्वारा शिकायत की गई थी। पूरे प्रकरण की जांच कराई जा रही है जो भी जांच में सामने आएगा उसके अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
स्वामीदीन, डीपीआरओ।
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जानकारी के अनुसार ग्राम पंचायत फरैंजी में ग्राम प्रधान गोरेलाल और पंचायत सचिव के पद पर नरेंद्र यादव की तैनाती है। तीन माह पहले पंचायत सचिव ने ग्राम निधि खाते से बिना प्रधान की जानकारी के 32.28 लाख रुपये की धनराशि निकाल ली। ये धनराशि तीन बार में निकाली गई। प्रधान को जब मामले की जानकारी हुई तो उन्होंने जिलाधिकारी से मामले की शिकायत की थी। शिकायत की जांच के आदेश दिए गए हैं। सचिव द्वारा लाखों की धनराशि निकालने के चलते पंचायत राज विभाग में खलबली मच गई। मामले की गोपनीय जांच की जा रही है। सूत्रों के अनुसार सचिव को नोटिस जारी कर डीपीआरओ ने जवाब मांगा है। जवाब आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। वहीं सचिव नरेंद्र यादव का कहना है कि मेरे ऊपर लगाए गए आरोप निराधार हैं। डोंगल प्रधान ने ही रिसीव किया है और पैसा भी प्रधान ने ही निकाला है। मुझे बेवजह पूरे मामले में फंसाया जा रहा है।
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फर्जी हस्ताक्षर कर सचिव ने लिया डोंगल
प्रधान गोरेलाल का आरोप है कि डीपीआरओ कार्यालय से सीधे सचिव नरेंद्र यादव ने ही प्रधान का डोंगल ले लिया था। इसके लिए उन्होंने प्रधान के फर्जी हस्ताक्षर कर डोंगल प्राप्त किया। प्रधान ने बताया कि जब वे कार्यालय डोंगल लेने गए तो उन्हें डोंगल नहीं मिल सका।
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फर्जीवाड़े पर गठित हुई थी समिति
ग्राम पंचायत फरैंजी पहले भी चर्चा में रह चुका है। बीते वर्ष अक्तूबर में ग्रामीणों ने यहां फर्जी पट्टे किए जाने को लेकर ग्रामीणों ने भूख हड़ताल की थी। जांच में मामला सही पाए जाने के बाद 23 अक्तूबर को तत्कालीन जिलाधिकारी पीके उपाध्याय ने प्रधान के अधिकार सीज करते हुए तीन सदस्यीय समिति गठित कर दी थी। समिति ने गोरेलाल को प्रधान चुना था।
मामले में प्रधान द्वारा शिकायत की गई थी। पूरे प्रकरण की जांच कराई जा रही है जो भी जांच में सामने आएगा उसके अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
स्वामीदीन, डीपीआरओ।