DBRAU Agra: बीएड की कॉपियों में चार प्रोफेसरों ने बढ़वाए थे अंक, जांच में हुआ खुलासा, सात लोग पाए गए दोषी
करीब आठ साल बाद जांच पूरी हुई और इसे शनिवार को हुई परीक्षा समिति की बैठक में रखा गया। 25 पेज की इस रिपोर्ट में मूल्यांकन की जिम्मेदारी संभाल रहे चार वरिष्ठ प्रोफेसरों और तीन कर्मचारियों को अंक बढ़ाने का दोषी बताया है।
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आगरा के डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के बीएड 2012-13 सत्र के फर्जीवाड़े में चार वरिष्ठ प्रोफेसर और तीन कर्मचारी दोषी पाए गए हैं। सेवानिवृत्त जज की जांच रिपोर्ट में उस समय तैनात रहे तीन कुलसचिवों की भूमिका भी संदिग्ध बताई गई है। जांच पूरी होने के बाद समिति ने इसे शनिवार को परीक्षा समिति की बैठक में रखा था। बैठक में कुछ और बिंदुओं पर जांच करने की संस्तुति करते हुए वापस समिति को भेजा गया है।
बीएड के 2012-13 सत्र में 250 से अधिक कॉलेजों के करीब 18 हजार छात्रों ने परीक्षा दी थी। इनके मूल्यांकन में धांधली की गई। प्राप्तांकों से छेड़छाड़ करते हुए अंक बढ़ाकर दर्ज कर दिए। रिकॉर्ड के तौर पर सुरक्षित रखे जाने वाली फॉइल और चार्ट भी गायब कर दिए गए थे। मामला सामने आने पर छात्र संगठनों ने जमकर विरोध किया, इस पर तत्कालीन कुलपति ने वर्ष 2014 में इसकी जांच सेवानिवृत्त जज को सौंपी।
आठ साल बाद पूरी हुई जांच
करीब आठ साल बाद जांच पूरी हुई और इसे शनिवार को हुई परीक्षा समिति की बैठक में रखा गया। 25 पेज की इस रिपोर्ट में मूल्यांकन की जिम्मेदारी संभाल रहे चार वरिष्ठ प्रोफेसरों और तीन कर्मचारियों को अंक बढ़ाने का दोषी बताया है। साथ ही कहा गया कि उस दौरान तैनात रहे तीन कुलसचिवों ने इसकी जांच नहीं की। उनकी भूमिका भी संदिग्ध मिली है।
परीक्षा समिति की बैठक में रिपोर्ट पढ़ने के बाद समिति के सदस्यों ने कुछ और बिंदुओं पर जांच करने की सिफारिश की है। कुलसचिव डॉ. विनोद कुमार सिंह ने बताया कि पूर्व के मामले की जांच रिपोर्ट परीक्षा समिति में रखी गई थी, इसमें कुछ बिंदु और जोड़कर, इनकी भी जांच करने के लिए समिति के अध्यक्ष से अपील की है। इन बिंदुओं पर जांच होने के बाद दोषी प्रोफेसरों और कर्मचारियाें कार्रवाई तय होगी।
कोर्ट के आदेश पर दी गई अंकतालिका
बीएड 2012-13 की कॉपियों में छेड़छाड़ के बाद परिणाम भी रुक गया था। इस पर फरवरी-मार्च 2019 में छात्रों ने 32 दिन तक धरना दिया। कुछ छात्र कोर्ट चले गए। कोर्ट से अनुमति लाने वाले छात्रों को अंकतालिका और डिग्री दी गई। साथ ही विश्वविद्यालय की ओर से बनी आंतरिक समिति ने उन कॉपियों का परिणाम तैयार कर दिया जिनमें कोई गड़बड़ी नहीं मिली थी। 6674 कॉपियों में छेड़छाड़ मिलने के बाद उनसे संबधित परीक्षार्थियों का परिणाम अभी तक रुका हुआ है।