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Agra News: हत्या और दलित उत्पीड़न के मामले में चार दोषियों को उम्रकैद, कोर्ट ने जुर्माना भी लगाया
Thu, 29 Jan 2026 10:51 PM IST
अरुन पाराशर
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
Published by: अरुन पाराशर
Updated Thu, 29 Jan 2026 10:51 PM IST
सार
सरेराह हत्या की घटना को अंजाम दिया गया था। घटना के दौरान दहशत के चलते आसपास के दुकानदार दुकानों के शटर गिराकर अंदर बंद हो गए थे। यात्री अपना सामान छोड़कर मौके से भाग गए थे। मामले में 11 वर्ष बाद दोषियों को सजा मिली है।
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कोर्ट
- फोटो : ANI
विस्तार
हत्या, जानलेवा हमला, दलित उत्पीड़न व अन्य आरोपों में अदालत ने थाना हरीपर्वत क्षेत्र के बापू नगर निवासी युसूफ उर्फ बैंगन, चांद, ताजगंज थाना क्षेत्र के नसीम नगर निवासी वसीम और टेढ़ी बगिया निवासी रवि उर्फ हकला को दोषी पाया। विशेष न्यायाधीश एससीएसटी एक्ट शिव कुमार ने सश्रम उम्रकैद के साथ 1.97 लाख रुपये के जुर्माने की सजा सुना दी। अदालत ने जुर्माने की आधी रकम मृतक सूरज के परिजन को दिलाने के आदेश दिए हैं।
थाना हरीपर्वत में दर्ज प्राथमिकी के अनुसार बापू नगर खंदारी निवासी दयालु ने तहरीर दी थी। आरोप लगाया था कि 31 अगस्त 2014 की शाम करीब 7 बजे वह मनोज, आकाश, सतीश और सूरज के साथ घर से आईएसबीटी जा रहे थे। आईएसबीटी चौराहे के पास हाईवे पर कुछ लोग उनके मोहल्ले में रहने जगदीश की पिटाई करते दिखे। वह बचाने पहुंच गए। आरोपियों ने उन्हें भी पीटकर गंभीर रूप से घायल कर दिया।
सतीश और सूरज को मरा हुआ समझकर आरोपियों ने वादी और मनोज पर तमंचे से फायर कर दिया। उन्होंने छिपकर जान बचाई। लोगों के आने पर आरोपी जान से मारने की धमकी देते हुए भाग गए थे। उनके जाने के बाद वह सतीश और सूरज को इलाज के लिए अस्पताल लेकर गए, जहां डाक्टरों ने सूरज को मृत घोषित कर दिया।
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घटना के दौरान आसपास के दुकानदार दुकानों के शटर गिराकर अंदर बंद हो गए थे। यात्री अपना सामान छोड़कर मौके से भाग गए थे। पुलिस ने जानलेवा हमला, दलित उत्पीड़न और 7 क्रिमिनल ला अमेंडमेंट एक्ट के तहत प्राथमिकी दर्ज की थी। सितंबर 2014 में सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर पुलिस ने अदालत में पेश करने के बाद जेल भेजा था। 9 फरवरी 2015 को आरोपपत्र दाखिल किया। मुकदमे के विचारण के दौरान एक आरोपी कालू की मौत हो गई। उसके विरुद्ध अदालत ने कार्रवाई समाप्त कर दी।
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थाना हरीपर्वत में दर्ज प्राथमिकी के अनुसार बापू नगर खंदारी निवासी दयालु ने तहरीर दी थी। आरोप लगाया था कि 31 अगस्त 2014 की शाम करीब 7 बजे वह मनोज, आकाश, सतीश और सूरज के साथ घर से आईएसबीटी जा रहे थे। आईएसबीटी चौराहे के पास हाईवे पर कुछ लोग उनके मोहल्ले में रहने जगदीश की पिटाई करते दिखे। वह बचाने पहुंच गए। आरोपियों ने उन्हें भी पीटकर गंभीर रूप से घायल कर दिया।
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सतीश और सूरज को मरा हुआ समझकर आरोपियों ने वादी और मनोज पर तमंचे से फायर कर दिया। उन्होंने छिपकर जान बचाई। लोगों के आने पर आरोपी जान से मारने की धमकी देते हुए भाग गए थे। उनके जाने के बाद वह सतीश और सूरज को इलाज के लिए अस्पताल लेकर गए, जहां डाक्टरों ने सूरज को मृत घोषित कर दिया।
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घटना के दौरान आसपास के दुकानदार दुकानों के शटर गिराकर अंदर बंद हो गए थे। यात्री अपना सामान छोड़कर मौके से भाग गए थे। पुलिस ने जानलेवा हमला, दलित उत्पीड़न और 7 क्रिमिनल ला अमेंडमेंट एक्ट के तहत प्राथमिकी दर्ज की थी। सितंबर 2014 में सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर पुलिस ने अदालत में पेश करने के बाद जेल भेजा था। 9 फरवरी 2015 को आरोपपत्र दाखिल किया। मुकदमे के विचारण के दौरान एक आरोपी कालू की मौत हो गई। उसके विरुद्ध अदालत ने कार्रवाई समाप्त कर दी।