पुलिस पीएसी आरक्षी भर्ती में बड़ा खुलासा, टीसीएस कर्मचारियों ने कराया मुन्नाभाइयों का सत्यान
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पुलिस पीएसी आरक्षी भर्ती में दस्तावेज एवं बायोमेट्रिक सत्यापन का कार्य कर रही टाटा टेलीकॉम सर्विसेज (टीसीएस) कंपनी के वर्तमान और पूर्व कर्मचारी फर्जीवाड़ा करने में लगे थे। पुलिस ने एक कर्मचारी सहित चार लोगों को पकड़कर इसका खुलासा किया है।
पुलिस की पूछताछ में पता चला है कि कर्मचारी अपने आवास पर मुन्नाभाइयों का सत्यापन कर रहा था। इसके लिए 60-60 हजार रुपये प्रत्येक अभ्यर्थी से वसूल किए जाते थे। दो मुन्नाभाइयों का सत्यापन करने की बात कबूल की है। कर्मचारी ने ही कंपनी के अधिकारी को भी धमकी दी थी।
पुलिस पीएसी आरक्षी भर्ती परीक्षा के दस्तावेज सत्यापन और शारीरिक मानक परीक्षण का कार्य 15 दिन से पुलिस लाइन में चल रहा है। इसमें 20 मुन्नाभाई पकड़े गए थे। दस्तावेज सत्यापन का कार्य देख रही टीसीएस कंपनी के अधिकारी को पिछले दिनों धमकी दी गई थी।
हरीपर्वत थाने में रिपोर्ट दर्ज होने के बाद पुलिस ने जांच शुरू की थी। इसमें सामने आया कि कंपनी के ही कर्मचारी फर्जीवाड़ा करके सत्यापन का कार्य करा रहे हैं।
एसएसपी बबलू कुमार ने बताया कि हरीपर्वत के खंदारी से चार लोगों को पकड़ा है। इसमें मथुरा के बल्देव थाना क्षेत्र स्थित गांव भरतिया निवासी तरुण गौतम, उसका भाई प्रवीण, फरह स्थित गांव चौकीपुरा निवासी रुपेंद्र और फिरोजाबाद के एका स्थित गांव मदीपुरा निवासी विक्रम हैं।
तरुण टीसीएस कंपनी का कर्मचारी है। वहीं रुपेंद्र पूर्व कर्मचारी है। उसने मार्च में नौकरी छोड़ दी थी। तरुण बायोमेट्रिक सत्यापन में लगाया गया था। पूछताछ में पता चला कि तरुण अपने खंदारी स्थित आवास पर बायोमेट्रिक मशीन को ले जाता था।
इस दौरान मुन्नाभाइयों का सत्यापन करता था। अगले दिन मुन्नाभाई के आने पर फर्जी तरीके से हाजिरी लगा देता था। 12 दिसंबर को फतेहाबाद के गांव कुटुकपुरा गूजर निवासी भगवती और खेरागढ़ के शेखपुरा निवासी दलवीर का परीक्षण होना था। उन्होंने परीक्षा में मुन्नाभाई बैठाए थे। इसलिए तरुण से संपर्क किया।
11 दिसंबर को तरुण ने अपने साथियों के साथ मिलकर दोनों अभ्यर्थियों के स्थान पर मुन्नाभाइयों के सत्यापन का कार्य कर दिया था। उनसे 60-60 हजार रुपये लिए गए थे। तरुण के इशारे पर रुपेंद्र ने ही टीसीएस कंपनी के अधिकारी को धमकी दी थी। उनके पास से लैपटॉप, बायोमेट्रिक मशीन और छह मोबाइल बरामद हुए हैं।
लॉगिन आईडी के पासवर्ड का उठाया फायदा
एसएसपी बबलू कुमार ने बताया कि टीसीएस कंपनी का कर्मचारी तरुण लॉगिन आईडी और पासवर्ड की मदद से फर्जीवाड़ा करने में सफल रहा। कंपनी 24 घंटे के लिए लॉगिन आईडी का पासवर्ड जारी करती थी। इससे अभ्यर्थियों के सत्यापन का कार्य किया जा रहा था। मगर, वाराणसी में पिछले दिनों टीसीएस कंपनी के कर्मचारी फर्जीवाड़ा करते पकड़े गए थे।
उन्होंने भी होटल में सत्यापन का कार्य किया था। इसके बाद कंपनी ने 15 दिसंबर से लॉगिन आईडी के पासवर्ड की अवधि सुबह दस बजे से शाम पांच बजे तक तय कर दी थी। इस अवधि के दौरान ही परीक्षण का कार्य हो सकता है। इस कारण अब फर्जीवाड़ा नहीं कर पा रहे थे।
कई मुन्नाभाइयों को पास कराने की आशंका
टीसीएस कंपनी के कर्मचारियों का फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद पुलिस को आशंका है कि कर्मचारी और पूर्व कर्मचारी ने कई मुन्नाभाइयों के सत्यापन कराए हैं। इसमें कंपनी के और भी कर्मचारी शामिल हो सकते हैं। पुलिस की विशेष टीम जांच करने में लगी है।