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जिद की हुई जीत: दस हजार रुपये के ब्याज के लिए लड़ी लड़ाई, एडीए से पांच साल बाद मिलेगी रकम
Fri, 24 Jan 2025 10:08 AM IST
धीरेन्द्र सिंह
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Fri, 24 Jan 2025 10:08 AM IST
सार
जिद ऐसी जिसकी वजह से पांच साल तक जिला उपभोक्ता प्रतितोष आयोग में लड़ाई लड़ी। वो भी महज 10 हजार रुपये के ब्याज के लिए। जानें पूरा मामला...
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- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
आगरा विकास प्राधिकरण ने आवेदक महिला को भवन पंजीकरण के लिए जमा की गई 32 साल बाद धनराशि तो वापस कर दी, लेकिन ब्याज की रकम नहीं दी। इस पर महिला ने जिला उपभोक्ता प्रतितोष आयोग में वाद दायर किया।
आयोग अध्यक्ष आशुतोष और सदस्य पारुल कौशिक ने एडीए उपाध्यक्ष को 30 दिन के अंदर पंजीकरण के 10 हजार रुपयों का 32 वर्ष 5 महीने का 6 प्रतिशत साधारण ब्याज अदा करने के साथ वाद व्यय के रूप में 5 हजार रुपये अलग से अदा करने के आदेश दिए है।एटा के छविकुंज की रहने वाली तारा देवी ने मई 2019 में आयोग में वाद दायर किया था।
बताया कि उन्होंने आगरा विकास प्राधिकरण का भवन पंजीकरण के लिए विज्ञापन देखा था। 11 फरवरी 1985 को शमसाबाद विस्तार योजना में मध्यम आय वर्ग के भवन पंजीकरण के लिए 10 हजार रुपये बरेली कॉरपोरेशन बैंक लिमिटेड रघुनाथ नगर, आगरा में जमा किए थे। जिसका प्राधिकरण ने पंजीकरण प्रमाणपत्र भी दिया था। मगर भवन नहीं मिला। 7 अक्तूबर 1997 को उन्होंने पंजीकरण की रकम कार्यालय में प्रार्थना देकर वापस मांगी थी।
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आयोग अध्यक्ष आशुतोष और सदस्य पारुल कौशिक ने एडीए उपाध्यक्ष को 30 दिन के अंदर पंजीकरण के 10 हजार रुपयों का 32 वर्ष 5 महीने का 6 प्रतिशत साधारण ब्याज अदा करने के साथ वाद व्यय के रूप में 5 हजार रुपये अलग से अदा करने के आदेश दिए है।एटा के छविकुंज की रहने वाली तारा देवी ने मई 2019 में आयोग में वाद दायर किया था।
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बताया कि उन्होंने आगरा विकास प्राधिकरण का भवन पंजीकरण के लिए विज्ञापन देखा था। 11 फरवरी 1985 को शमसाबाद विस्तार योजना में मध्यम आय वर्ग के भवन पंजीकरण के लिए 10 हजार रुपये बरेली कॉरपोरेशन बैंक लिमिटेड रघुनाथ नगर, आगरा में जमा किए थे। जिसका प्राधिकरण ने पंजीकरण प्रमाणपत्र भी दिया था। मगर भवन नहीं मिला। 7 अक्तूबर 1997 को उन्होंने पंजीकरण की रकम कार्यालय में प्रार्थना देकर वापस मांगी थी।
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