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Agra News: जमीन घोटाले के बाद एडीए ने 12 खसरों में रजिस्ट्रियों पर लगाई रोक

Wed, 10 Jun 2026 02:40 AM IST
Agra Bureau आगरा ब्यूरो
Updated Wed, 10 Jun 2026 02:40 AM IST
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Following the land scam, the ADA has halted registrations for 12 Khasra plots.
आगरा। शास्त्रीपुरम स्थित मोहम्मदपुर में आगरा विकास प्राधिकरण (एडीए) की बेशकीमती जमीन पर अवैध खरीद-फरोख्त का पर्दाफाश होने के बाद अब 12 खसरों की रजिस्ट्रियों पर रोक लगा दी गई है। एडीए सचिव ने सहायक महानिरीक्षक निबंधन और एडीएम वित्त को पत्र लिखकर चेतावनी दी है कि बिना अनुमति रजिस्ट्रियां करने पर संबंधित उप निबंधक को जिम्मेदार ठहराया जाएगा।
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अमर उजाला ने मंगलवार के अंक में ‘जमीन घोटाला : राजस्व परिषद का आदेश दरकिनार, एडीए की जमीन को बेचने का खेल’ शीर्षक से इस मामले का प्रमुखता से खुलासा किया। इसके बाद हरकत में आए एडीए सचिव संजय कुमार ने सहायक महानिरीक्षक (एआईजी स्टांप) योगेश कुमार को पत्र भेजकर संबंधित खसरों के जमीन की खरीद-फरोख्त पर रोक लगाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने बिना अनुमति हो रही रजिस्ट्रियों पर तत्काल रोक लगाने के लिए कहा है। आरोप है कि यहां पिछले 10 साल में करीब 50 से अधिक बैनामे हो चुके हैं और अरबों रुपये की एडीए की संपत्ति खुर्द-बुर्द की जा चुकी है। इससे न केवल प्राधिकरण को भारी राजस्व की हानि हुई है बल्कि भविष्य के लिए अनावश्यक कानूनी विवाद और जटिलताएं भी खड़ी हो गई हैं।
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इन खसरा नंबरों पर हुआ जमीन घोटाला

पूरा मामला तहसील सदर के ग्राम मोहम्मदपुर का है। यहां खसरा संख्या 208, 210/1, 210/2, 215, 218, 219/1, 219/2, 219/3, 220, 261, 278 और 298 के विभिन्न भागों की भूमि एडीए ने अधिगृहीत की थी। एडीए ने 19 नवंबर, 2023 को पत्र जारी कर सब रजिस्ट्रार (प्रथम, द्वितीय, तृतीय, चतुर्थ एवं पंचम) को खसरा संख्या 215 और 276 की रजिस्ट्री न करने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद एडीए के स्वामित्व वाली इन जमीनों के बैनामे लगातार पंजीकृत किए जाते रहे।
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उप निबंधक की तय होगी जिम्मेदारी
एडीए सचिव ने पत्र में एआईजी निबंधन से कहा है कि वह अपने स्तर से तहसील सदर के सभी उप निबंधकों को निर्देशित करें। चेतावनी दी है कि यदि अवैध क्रय-विक्रय से भविष्य में कोई विवाद उत्पन्न होता है तो संबंधित उप निबंधक और निबंधन विभाग के अधिकारी जिम्मेदार होंगे। पत्र की प्रतिलिपि एडीए उपाध्यक्ष, अपर जिलाधिकारी (वित्त) और प्रभारी भू-अर्जन को भी भेजी गई है।
जोंस मिल में डीएम की रोक का असर नहीं

दूसरी तरफ जीवनी मंडी स्थित जोंस मिल के अंतर्गत खसरा नंबर 1734, 1737, 1739, 1741, 2078, 2079, 2080, 2081, 2085, 2086 और 2087 पर तत्कालीन जिलाधिकारी प्रभु एन. सिंह ने 22 दिसंबर, 2020 को बैनामे और निर्माण पर रोक लगाई थी। उन्होंने सहायक महानिरीक्षक और एडीएम वित्त को निगरानी के आदेश दिए थे। एडीए को नक्शा पास न करने और टोरंट पावर को बिजली कनेक्शन व लोड परिवर्तित न करने के भी निर्देश थे। लेकिन, डीएम के बदलते ही ये आदेश हवा हो गए।


मिलीभगत से खेल का आरोप

पिछले 6 साल में रोक के बावजूद जोंस मिल क्षेत्र में 20 से अधिक बैनामे हो चुके हैं। बैनामे में खसरा नंबर की जगह भूमाफिया नगर निगम के असेसमेंट नंबर लिख रहे हैं, जिससे सत्यापन में प्रतिबंधित खसरा नंबरों की पहचान न हो सके। इस खेल में उप निबंधक, तहसील के दस्तावेज लेखक और वकील तक शामिल होने के आरोप लग रहे हैं। जोंस मिल की जमीनों की जांच में सामने आया था कि 2596 करोड़ रुपये के बाजार मूल्य की करीब 100 बीघा जमीन खुर्द-बुर्द हो चुकी है। इसमें 107 करोड़ रुपये की वह नजूल भूमि भी है जो तत्कालीन कलेक्टर की ओर से शर्तों के तहत जोंस मिल को लीज पर दी गई थी।
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