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Health: नींद नहीं आती है, सोने के बाद भी रहती है थकान...ये है मानसिक रोग की दस्तक, स्लीप लैब में होगा इलाज
Sat, 11 Oct 2025 10:19 AM IST
धीरेन्द्र सिंह
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Sat, 11 Oct 2025 10:19 AM IST
सार
मानसिक स्वास्थ्य संस्थान एवं चिकित्सालय में शुरू हुई स्लीप लैब में अनिद्रा का इलाज होगा। यहां मरीज को एक रात भर्ती कर अनिंद्रा की वजह को चिह्नित किया जाएगा।
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प्रो. दिनेश राठौर
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विस्तार
नींद नहीं आना, कई घंटे सोने पर भी थकान और आलस। ये मानसिक विकार की दस्तक है। मानसिक स्वास्थ्य संस्थान एवं चिकित्सालय स्लीप लैब में इसका इलाज होगा। इससे लोगों को चैन की नींद आएगी और खुद को तरोताजा महसूस करेंगे। यहां खर्राटे और स्लीप एप्निया का भी इलाज होगा। आगरा मंडल में पहली लैब बनी है।
संस्थान निदेशक प्रो. दिनेश राठौर ने बताया कि स्लीप लैब शुरू हो गई है। इसमें वीडियो पॉलीसोमनोग्राफी मशीन लगाई गई है। इसमें मरीज को एक रात के लिए भर्ती किया जाएगा। मरीज के मस्तिष्क, हृदय और नाक में इलेक्ट्रोड लगाए जाएंगे। 6-8 घंटे में मस्तिष्क की तरंगों से पता करेंगे कि किस घंटे में स्वस्थ नींद आई, किस समय नींद प्रभावित हुई। हृदय कितनी बार धड़का, किस समय ज्यादा धड़कनें हुईं, किस समय कम हुईं। नाक के जरिये ऑक्सीजन की मात्रा कितनी रही। रक्तचाप कितना है। मशीन ये सब रिकाॅर्ड करेगी। कक्ष में सीसीटीवी कैमरे भी लगे हैं, जिसमें मरीज ने कितनी बार करवटें लीं, बेचैनी-घबराहट तो नहीं हो रही। ये भी कैमरे में कैद हो जाएंगे। वैज्ञानिक ढंग से इनका अध्ययन कर अनिद्रा की वजह तलाशने के बाद इलाज करेंगे। इसमें नींद न आना, कई घंटे सोने पर भी सुस्ती रहना या फिर नींद की गोलियां लेने वाले मरीज इलाज करा सकते हैं। इसके बाद मरीज पूरी तरह से ठीक हो जाएंगे।
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संस्थान निदेशक प्रो. दिनेश राठौर ने बताया कि स्लीप लैब शुरू हो गई है। इसमें वीडियो पॉलीसोमनोग्राफी मशीन लगाई गई है। इसमें मरीज को एक रात के लिए भर्ती किया जाएगा। मरीज के मस्तिष्क, हृदय और नाक में इलेक्ट्रोड लगाए जाएंगे। 6-8 घंटे में मस्तिष्क की तरंगों से पता करेंगे कि किस घंटे में स्वस्थ नींद आई, किस समय नींद प्रभावित हुई। हृदय कितनी बार धड़का, किस समय ज्यादा धड़कनें हुईं, किस समय कम हुईं। नाक के जरिये ऑक्सीजन की मात्रा कितनी रही। रक्तचाप कितना है। मशीन ये सब रिकाॅर्ड करेगी। कक्ष में सीसीटीवी कैमरे भी लगे हैं, जिसमें मरीज ने कितनी बार करवटें लीं, बेचैनी-घबराहट तो नहीं हो रही। ये भी कैमरे में कैद हो जाएंगे। वैज्ञानिक ढंग से इनका अध्ययन कर अनिद्रा की वजह तलाशने के बाद इलाज करेंगे। इसमें नींद न आना, कई घंटे सोने पर भी सुस्ती रहना या फिर नींद की गोलियां लेने वाले मरीज इलाज करा सकते हैं। इसके बाद मरीज पूरी तरह से ठीक हो जाएंगे।
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युवाओं में स्क्रीन एडिक्शन से नींद हुई प्रभावित
मानसिक स्वास्थ्य संस्थान के चिकित्सा अधिकारी डॉ. मनीष जैन ने बताया कि जिस तरह से अधिकतर बीमारियों में बुखार प्रथम लक्षण होता है उसी तरह अनिद्रा भी मानसिक विकार की शुरूआत हो सकती है। 30-35 फीसदी लोगों में इस प्रकार की परेशानी मिल रही है। स्क्रीन एडिक्शन से किशोरों-युवाओं में अनिद्रा की परेशानी बढ़ रही है। इसकी रोशनी और तरंगें आंखों के जरिये मस्तिष्क में पहुंचकर नस पर दबाव डालती हैं। इससे सिर में दर्द, नींद नहीं आना, सिर भारी रहने, थकावट की परेशानी बन रही है। लंबे समय के बाद मानसिक विकार पनपते हैं। चिकित्सा अधीक्षक प्रो. अनिल सिसौदिया ने बताया कि कई बार नींद पूरी नहीं होने के कारण मरीज बैठे-बैठे भी सो जाता है,खर्राटे लेने लगता है। ये स्लीप एप्निया की वजह से होता है। ये युवाओं में भी तेजी से बढ़ रहा है। इसका भी लैब के जरिये इलाज होगा। कार्यक्रम का संचालन डॉ. पार्थ सिंह बघेल ने किया। वित्त अधिकारी राजेश कुमार, डॉ. मधु शर्मा, डॉ. चंचल चंद्रा, डॉ. बृजेश अग्रवाल मौजूद रहे।
मानसिक स्वास्थ्य संस्थान के चिकित्सा अधिकारी डॉ. मनीष जैन ने बताया कि जिस तरह से अधिकतर बीमारियों में बुखार प्रथम लक्षण होता है उसी तरह अनिद्रा भी मानसिक विकार की शुरूआत हो सकती है। 30-35 फीसदी लोगों में इस प्रकार की परेशानी मिल रही है। स्क्रीन एडिक्शन से किशोरों-युवाओं में अनिद्रा की परेशानी बढ़ रही है। इसकी रोशनी और तरंगें आंखों के जरिये मस्तिष्क में पहुंचकर नस पर दबाव डालती हैं। इससे सिर में दर्द, नींद नहीं आना, सिर भारी रहने, थकावट की परेशानी बन रही है। लंबे समय के बाद मानसिक विकार पनपते हैं। चिकित्सा अधीक्षक प्रो. अनिल सिसौदिया ने बताया कि कई बार नींद पूरी नहीं होने के कारण मरीज बैठे-बैठे भी सो जाता है,खर्राटे लेने लगता है। ये स्लीप एप्निया की वजह से होता है। ये युवाओं में भी तेजी से बढ़ रहा है। इसका भी लैब के जरिये इलाज होगा। कार्यक्रम का संचालन डॉ. पार्थ सिंह बघेल ने किया। वित्त अधिकारी राजेश कुमार, डॉ. मधु शर्मा, डॉ. चंचल चंद्रा, डॉ. बृजेश अग्रवाल मौजूद रहे।
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स्वस्थ नींद के लिए ये करें :
- सोने-जागने का समय तय करें, सुबह-शाम टहलें।
- दिन के समय में सोना नहीं है तो बेड पर लेटें नहीं।
- लेटकर टीवी और मोबाइल फोन नहीं देखें और पढ़ें भी नहीं।
- शाम को गुनगुने पानी से नहा सकते हैं, हल्का भोजन करें।
- शाम छह बजे के बाद चाय, काॅफी, एल्कोहल और धूम्रपान नहीं करें।
- तकिया के नीचे नहीं पहुंच से दूर रखें मोबाइल फोन।
- सोने से दो घंटे पहले मोबाइल, टीवी, लैपटॉप नहीं देखें।
- सोने-जागने का समय तय करें, सुबह-शाम टहलें।
- दिन के समय में सोना नहीं है तो बेड पर लेटें नहीं।
- लेटकर टीवी और मोबाइल फोन नहीं देखें और पढ़ें भी नहीं।
- शाम को गुनगुने पानी से नहा सकते हैं, हल्का भोजन करें।
- शाम छह बजे के बाद चाय, काॅफी, एल्कोहल और धूम्रपान नहीं करें।
- तकिया के नीचे नहीं पहुंच से दूर रखें मोबाइल फोन।
- सोने से दो घंटे पहले मोबाइल, टीवी, लैपटॉप नहीं देखें।