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अफसर बेफिक्र: 15 साल में 36 लोगों की जान ले चुके... दो गांवों के पटाखे, शहर से देहात तक होता अवैध भंडारण
Wed, 18 Sep 2024 06:25 PM IST
भूपेन्द्र सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला नेटवर्क, आगरा
Published by: भूपेन्द्र सिंह
Updated Wed, 18 Sep 2024 06:25 PM IST
सार
तानजगरी में दो गांवों के पटाखे 15 साल में 36 लोगों की जान ले चुके हैं। शहर से लेकर देहात तक इनका अवैध भंडारण होता है।
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सुहागनगरी में पटाखा गोदाम में भीषण विस्फोट
- फोटो : संवाद
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विस्तार
सुहागनगरी फिरोजाबाद के नौशेहरा में सोमवार रात घनी आबादी में अवैध आतिशबाजी गोदाम में हुए विस्फोट से पांच लोगों की मौत हो गई। दीवाली से पहले घटना से आतिशबाजी के अवैध भंडारण को लेकर पुलिस अलर्ट हो गई है। आगरा कमिश्नरेट में दुकान और घरों में बने गोदामों में घटनाएं हो चुकी हैं। कई लोगों की जान भी जा चुकी है। इसके बावजूद जिम्मेदार नींद से नहीं जाग रहे हैं। चेकिंग के नाम पर भी खानापूर्ति की जाती है।
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आगरा कमिश्नरेट में 30 आतिशबाजी बिक्री और 18 गोदाम के लाइसेंस हैं। गोदाम से थोक विक्रेताओं का आतिशबाजी की बिक्री की जाती है। निर्धारित मात्रा में ही आतिशबाजी रखी जा सकती है। गोदाम और दुकान जगदीशपुरा, सिकंदरा, अछनेरा, एत्मादपुर में हैं।
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इसके बावजूद शहर में शाहगंज, बोदला, दरेसी, यमुना किनारा, ताजगंज, सदर इलाके में आतिशबाजी की बिक्री होती है। दिवाली पर माल भी अधिक मंगवा लिया जाता है। इससे हादसे की आशंका रहती है। इसके बावजूद पुलिस और अग्निशमन विभाग चेकिंग नहीं करता है।
शाहगंज में चमन मंसूरी के घर में हुआ था विस्फोट
19 अक्तूबर 2020 को शाहगंज में चमन मंसूरी के घर में विस्फोट हुआ था। इसमें 4 लोगों की जान चली गई थी। इनमें चमन मंसूरी के भाई शेरू, चाचा सलाउद्दीन, बेटे आबिद और कर्मचारी फरमान की माैत हुई थी। घनी आबादी में गोदाम बनाया हुआ था। धमाके से मकान की छत उड़ गई थी। आसपास के मकानों में भी दरार आ गई थी। पुलिस ने विस्फोटक अधिनियम में मुकदमा दर्ज किया। आरोप पत्र भी दाखिल किया था। इसके अलावा भी घटनाएं हो चुकी हैं।पुलिस को किया अलर्ट, चेकिंग होगी
पुलिस आयुक्त जे रविन्दर गौड ने बताया कि दीवाली से पहले आतिशबाजी का भंडारण होता है। लाइसेंस धारकों के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है। कितना माल रख रहे हैं, और कितना बेचा जा रहा है। इस बारे में लाइसेंस धारकों से पता किया जाएगा। नियमों की अनदेखी करने वालों पर कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए सभी थाना प्रभारियों को निर्देशित कर दिया गया है। चेकिंग का अभियान चलाया जाएगा।ये हैं कुछ घटनाएं
- 2015 : छलेसर पर टाटा मैजिक में आतिशबाजी में धमाका हुआ। तीन की मौत, 9 घायल हुए।
- 2016 : जगदीशपुरा थाने के पास ऑटो और साइकिल टकरा गई थी। इससे साइकिल पर टंकी आतिशबाजी में धमाका हुआ था। एक मृत्यु हो गई थी।
- 2017 : रुनकता में दुकानदार संजीव अग्रवाल के घर में पटाखा चलाने पर आतिशबाजी में आग लगी थी। बेटी वैष्णवी और चीनू की मृत्यु हुई थी।
- 2017 : धाकरान चौराहा पर चलती एक्टिवा पर रखे आतिशबाजी से भरी बोरी में विस्फाेट हुआ था। दो की मृत्यु हुई थी।
एत्मादपुर के गांव धौर्रा में कई बार हुईं घटनाएं
- वर्ष 2003 में जब्त पटाखों में एत्मादपुर थाने में हादसा दो की मौत।
- वर्ष 2003 में ही धौर्रा में पटाखे बनाने के दौरान हादसे में एक की मौत।
- वर्ष 2004 में धौर्रा से आतिशबाजी लेकर जाते समय जवाहर पुल पर वाहन में धमाका हुआ था, एक की मौत हुई थी।
- वर्ष 2004 में ही धौर्रा से पटाखे ले जाते समय टेंपो में हादसा होने से दो की मौत हुई थी।
- वर्ष 2005 में धौर्रा में गोदाम में में धमाका हुआ था, इसमें तीन की मौत।
- वर्ष 2006 में नगला खरगा में घर में आतिशबाजी बनाते समय धमाका हुआ था, इसमें तीन की मौत हुई थी।
- वर्ष 2007 में नगला खरगा में घर के बाहर धमाका हुआ था, इसमें पांच की मौत हुई थी।
- वर्ष 2009 में नगला खरगा में आतिशबाजी मेें धमाके में पति-पत्नी की मौत हुई थी।
- वर्ष 2010 में गांव धौर्रा में धमाके में दो लोगों की मौत हुई थी।
- वर्ष 2011 में पटाखे ले जाते समय टेंपो में कुबेरपुर पर धमाके में दो की मौत हुई थी।
- वर्ष 2015 में भागूपुर के पास टेंपो में हादसे में दो की मौत हुई थी।
- वर्ष 2016 में स्कूटर से पटाखे ले जाते समय जगदीशपुरा के पास दो की मौत हुई थी।
15 साल में 36 लोगों की जान ले चुके हैं, नगला खरगा और धौर्रा के पटाखे
आगरा के एत्मादपुर स्थित गांव नगला खरगा और धौर्रा गांव में बनने वाले देशी पटाखों की मांग दीवाली पर नहीं, बल्कि सालभर होती है। आगरा के अलावा आसपास के जिलों के ग्रामीण इलाकों तक में है। हर साल बड़ी संख्या में दुकानदार आते है। चोरी छिपे आतिशबाजी को बेचा जाता है।
आगरा के एत्मादपुर के दोनों गावों में आतिशबाजी के सात लाइसेंस है। अभी तक इन लाइसेंस को नवीनीकरण नहीं किया गया है। खेतों में पटाखे तैयार होते हैं। घरों में भंडारण होता है। यह पटाखे 15 साल में 20 हादसों में 36 लोगों की जान ले चुके हैं।
वर्ष 2003 में थाना एत्मादपुर पुलिस ने अवैध आतिशबाजी पकड़ी थी। इसे थाने के एक कमरे में रखा गया था। पुलिसकर्मियों ने आतिशबाजी पर पानी डाला था। गैस बनने से धमाका हो गया था। थाने की छत उड़ गई थी। इसमें चाय लेकर आए युवक और एक पुलिसकर्मी की जान गई चली गई थी।