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लापरवाही से उठ रहीं आग की लपटें
ब्यूरो, अमर उजाला अागरा
Updated Wed, 09 Sep 2015 02:04 AM IST
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शहर में एक के बाद एक हुए अग्निकांड के पीछे दमकल विभाग की बड़ी लापरवाही सामने आई है। एक तो दमकल अधिकारी उन कारखानों के मुआयने तक नहीं कर रहे, जिनमें ज्वलनशील केमिकल रखे रहते हैं। दूसरा, अगर कोई उद्यमी फायर एनओसी लेने जाए, तो उसे परेशान किया जाता है। नतीजा यह है कि लोग एनओसी लिए बगैर की सेटिंग कर कारखाने चला रहे हैं। सोमवार को चार जगह लगी आग में भी यही वजह सामने आई है।
प्रकाश नगर की पथवारी गली में जिस कारखाने में आग लगी, वह घर में चल रहा था। इसकी फायर एनओसी नहीं ली गई थी। अग्निशमन विभाग ने इसके खिलाफ कोई रिपोर्ट भी प्रशासन को नहीं दे रखी थी। जयपुर हाउस के विश्वकर्मा कांप्लेक्स मेें इलेक्ट्रानिक्स आइटम के गोदाम में भी सोमवार को आग लगी थी। यहां भी फायर एनओसी नहीं थी। न ही आग बुझाने के उपकरण थे।
ताजमहल के पूर्वी गेट के पास भी शोरूम में आग लगी थी। जांच हुई तो पता चला कि यह भी बगैर एनओसी के चल रहा था। ताजमहल के आसपास के क्षेत्र में भी फायर ब्रिगेड के अधिकारी ध्यान नहीं दे रहे। यही स्थिति नूरी दरवाजा में प्राचीन पेठा के कारखाने में मिली है।
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हाइड्रेंट प्वाइंट भी नहीं
शहर के भीड़भाड़ वाले इलाके से लेकर तंग गलियों तक में हाइड्रेंट प्वाइंट नहीं हैं। ऐसा कई बार हुआ कि किनारी बाजार, सुभाष बाजार, प्रकाश नगर, राजामंडी, सहित ऐसे कई घने इलाकों में आग लगी पर दमकलें वहां तक नहीं पहुंच पाईं। ऐसे में हाइड्रेंट प्वाइंट काम आते हैं, लेकिन वह भी सड़क के नीचे दफन हो गए हैं।
कारखाने 7000, एनओसी सिर्फ 35 के पास
शहर में छोटे-बड़े सात हजार से अधिक कारखाने हैं। इसके अलावा 150 से ज्यादा बड़ी फैक्ट्री हैं। इन फैक्ट्रियों में से विभाग से 35 के पास ही फायर विभाग की एनओसी है। कारखानों की बात करें तो वह गलियों में संचालित हो रहे हैं। ज्यादा घरों में बनाए गए हैं, लेकिन विभाग आंखें मूंदकर बैठा हुआ है।
बगैर जांच के एनओसी
जिन कारखानों को फायर ब्रिगेड ने एनओसी दे रखी है, उनमें भी कई में आग लग चुकी है। ऐसा भी हो चुका जब आग बुझाने के उपकरणों ने काम नहीं किया। जाहिर है एनओसी देते समय ठीक से पड़ताल नहीं की गई। इसके विपरीत जब किसी को परेशान करता हो, तो एनओसी के लिए बार बार मुआयना किया जाता है। एसआरके मॉल में एफएसओ, सीएफओ और उप निदेशक मुआयने के लिए गई लेकिन एनओसी नहीं दी।
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प्रकाश नगर की पथवारी गली में जिस कारखाने में आग लगी, वह घर में चल रहा था। इसकी फायर एनओसी नहीं ली गई थी। अग्निशमन विभाग ने इसके खिलाफ कोई रिपोर्ट भी प्रशासन को नहीं दे रखी थी। जयपुर हाउस के विश्वकर्मा कांप्लेक्स मेें इलेक्ट्रानिक्स आइटम के गोदाम में भी सोमवार को आग लगी थी। यहां भी फायर एनओसी नहीं थी। न ही आग बुझाने के उपकरण थे।
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ताजमहल के पूर्वी गेट के पास भी शोरूम में आग लगी थी। जांच हुई तो पता चला कि यह भी बगैर एनओसी के चल रहा था। ताजमहल के आसपास के क्षेत्र में भी फायर ब्रिगेड के अधिकारी ध्यान नहीं दे रहे। यही स्थिति नूरी दरवाजा में प्राचीन पेठा के कारखाने में मिली है।
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हाइड्रेंट प्वाइंट भी नहीं
शहर के भीड़भाड़ वाले इलाके से लेकर तंग गलियों तक में हाइड्रेंट प्वाइंट नहीं हैं। ऐसा कई बार हुआ कि किनारी बाजार, सुभाष बाजार, प्रकाश नगर, राजामंडी, सहित ऐसे कई घने इलाकों में आग लगी पर दमकलें वहां तक नहीं पहुंच पाईं। ऐसे में हाइड्रेंट प्वाइंट काम आते हैं, लेकिन वह भी सड़क के नीचे दफन हो गए हैं।
कारखाने 7000, एनओसी सिर्फ 35 के पास
शहर में छोटे-बड़े सात हजार से अधिक कारखाने हैं। इसके अलावा 150 से ज्यादा बड़ी फैक्ट्री हैं। इन फैक्ट्रियों में से विभाग से 35 के पास ही फायर विभाग की एनओसी है। कारखानों की बात करें तो वह गलियों में संचालित हो रहे हैं। ज्यादा घरों में बनाए गए हैं, लेकिन विभाग आंखें मूंदकर बैठा हुआ है।
बगैर जांच के एनओसी
जिन कारखानों को फायर ब्रिगेड ने एनओसी दे रखी है, उनमें भी कई में आग लग चुकी है। ऐसा भी हो चुका जब आग बुझाने के उपकरणों ने काम नहीं किया। जाहिर है एनओसी देते समय ठीक से पड़ताल नहीं की गई। इसके विपरीत जब किसी को परेशान करता हो, तो एनओसी के लिए बार बार मुआयना किया जाता है। एसआरके मॉल में एफएसओ, सीएफओ और उप निदेशक मुआयने के लिए गई लेकिन एनओसी नहीं दी।