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Agra News: आरपीएफ जवान से मारपीट में स्टेशन मास्टर पर प्राथमिकी

Fri, 16 Oct 2026 03:11 AM IST
Agra Bureau आगरा ब्यूरो
Updated Fri, 16 Oct 2026 03:11 AM IST
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FIR against station master for assaulting RPF personnel
आगरा। डीआरएम कार्यालय में धरना-प्रदर्शन के दौरान मोबाइल से वीडियो बनाने पर हुए विवाद के मामले में कोर्ट के आदेश पर थाना सदर में प्राथमिकी दर्ज की गई है। आरपीएफ जवान ने शिकायत में स्टेशन मास्टर और अन्य पर मोबाइल और सोने की चेन छीनने, मारपीट और जाति सूचक शब्द बोलने के आरोप लगाए हैं।
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मामले में एससी-एसटी एक्ट सहित अन्य धारा में प्राथमिकी दर्ज की गई है। पूर्व में घटना का वीडियो भी वायरल हुआ था। रेलवे ने भी प्रकरण की जांच कराई थी। आरपीएफ के सिपाही हरेश प्रताप सिंह ने कोर्ट में प्रार्थनापत्र देकर बताया कि 14 जुलाई को डीआरएम कार्यालय परिसर में स्टेशन अधीक्षकों सहित अन्य लोगों ने धरना-प्रदर्शन किया था।
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इस दौरान डीएसएस नरेंद्र सिंह चाहर व प्रदर्शनकारियों का उनसे विवाद हो गया। हरेश प्रताप का कहना है कि उन्हें उच्च अधिकारियों ने आदेश दिया था कि वह प्रदर्शन के दौरान शांति व्यवस्था भंग करने वालों की वीडियोग्राफी कर लें। इस पर वह सिविल कपड़ों में पहुंच गए थे। नरेंद्र सिंह चाहर अपने साथियों के साथ आए, नाम पूछने लगे। परिचय देने पर भी उन्होंने गाली देना शुरू कर दिया। विरोध पर जातिसूचक शब्द बोले, मारपीट भी की।
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आरोप लगाया कि इस दौरान 40 हजार रुपये कीमत का मोबाइल, ढाई लाख रुपये कीमत की चेन और पहचानपत्र छीन लिया। कुछ लोगों के आने पर छोड़ा। जातिसूचक शब्द बोलने के बाद धमकी दी कि किसी से शिकायत की तो छोड़ेंगे नहीं। पुलिस ने मेडिकल कराया लेकिन प्राथमिकी दर्ज नहीं की। इस पर कोर्ट में प्रार्थनापत्र दिया।

दोनों ओर से की गई थी शिकायत

स्टेशन मास्टर से पिटाई के मामले में डीआरएम कार्यालय पर स्टेशन अधीक्षक सहित अन्य लोग धरना देने पहुंचे थे। इसी दौरान सिपाही ने मोबाइल से वीडियो बनाया था। तब विवाद हो गया था। दोनों पक्ष ने पुलिस से शिकायत दर्ज कराई थी।
यह था पूरा मामला
कैंट रेलवे स्टेशन पर 12 जुलाई को चलती ट्रेन में चढ़ रही महिला यात्री की मदद के लिए ट्रेन रुकवाने पर स्टेशन पर तैनात डीएसएस नरेंद्र सिंह चाहर और आरपीएफ जवानों के बीच विवाद हो गया था। आरोप है कि जवानों ने अधिकारी को पीटा और करीब 300 मीटर तक घसीटकर आरपीएफ पोस्ट ले गए। इसका एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। मामले में दोनों पक्ष ने पुलिस से शिकायत दर्ज कराई थी। घटना में कान का पर्दा फटने, कर्मचारी संगठनों के प्रदर्शन, आरपीएफ के पांच कर्मियों के निलंबन, कमांडेंट के तबादले तक मामला पहुंचा। सितंबर में जांच समिति ने चार आरपीएफ कर्मियों को दोषी मानते हुए 11 सुधारात्मक दिशा-निर्देश भी जारी किए थे।

वर्जन
अपना बचाव करने के लिए ये झूठा मामला दर्ज कराया गया है। इससे पहले वे एससी-एसटी आयोग भी गए थे लेकिन वहां कोई सुनवाई नहीं हुई। सीनियर कमांडेंट के कहने पर ये मामला दर्ज कराया गया है। इसके खिलाफ पहले से एफआईआर है। इसी के बचाव के लिए उन्होंने एससी-एसटी का इस्तेमाल किया है। हम अपना पक्ष कोर्ट में रखेंगे। हमारे पास साक्ष्य हैं। - नरेंद्र सिंह चाहर, डीएसएस आगरा कैंट
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