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#LadengeCoronaSe: घबराएं नहीं, संयम के साथ घर पर कराएं इलाज, जीतें कोरोना वायरस से जंग

Wed, 19 May 2021 01:29 PM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कासगंज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कासगंज Published by: Abhishek Saxena Updated Wed, 19 May 2021 01:29 PM IST
सार

शहर की महिला रुचि अग्रवाल का कहना है कि मैं और उनकी बेटी एक साथ कोरोना संक्रमित हुए। मुझे और बेटी को बुखार आया। गले में दर्द और थकान जैसे लक्षण आए। लगने लगा कि कोरोना जैसे लक्षण बन रहे हैं। तत्काल निजी चिकित्सक से संपर्क किया। 

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Fight With Corona Virus Woman Defeat Covid
कोरोना को मात देने वालीं रुचि अग्रवाल - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कोरोना महामारी में तमाम लोग संयम और हौंसले के साथ कोरोना से जंग जीत रहे हैं। जो समय से जांच नहीं करा रहे और इलाज में लापरवाही बरत रहे हैं ऐसे संक्रमित गंभीर स्थिति में पहुंच रहे हैं। होम आइसोलेशन में ठीक होने वाले संक्रमितों का आंकड़ा 90 फीसदी है। जो बिना किसी चिकित्सालय जाए घर पर ही चिकित्सकों से परामर्श करके इलाज लेकर ठीक हो रहे हैं। 
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मैं और बेटी ने घर में रहकर जीती जंग
शहर की महिला रुचि अग्रवाल का कहना है कि मैं और उनकी बेटी एक साथ कोरोना संक्रमित हुए। मुझे और बेटी को बुखार आया। गले में दर्द और थकान जैसे लक्षण आए। लगने लगा कि कोरोना जैसे लक्षण बन रहे हैं। तत्काल निजी चिकित्सक से संपर्क किया। उन्होंने जांच का परामर्श दिया। कोविड टेस्ट कराया जिसमें टेस्ट पॉजिटिव आया। इसके बाद चिकित्सक ने जो दवाएं बताईं वह दवाएं लीं और योग, प्रणायाम किया। गुनगुना पानी पिया। पूरे 14 दिन तक आइसोलेशन में रहे। घर के परिजनों से दूरी बनाकर रखी। काफी परेशानी हो रही थी, लेकिन संयम और हौसले से समय काटा। खुद भी जंग जीत ली और परिवार के लोग में संक्रमण में आने से बच गए।
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माता पिता बढ़ाते रहे हौंसला
16 वर्षीय बालक शौर्य प्रताप सिंह पुत्र सत्येंद्र पाल सिंह बैस निवासी दीनदयालपुरम कॉलोनी ने बताया कि वे 3 मई को कोरोना संक्रमित हुए थे। सबसे पहले उन्हें बुखार आया। पिता ने 5 मई को कोरोना की जांच कराई। जिसमें रिपोर्ट पॉजिटिव आई। मैं घबराया हुआ था, लेकिन पिता और मां ने सकारात्मक सोच बनाए रखने को कहा। इसके बाद परिवार के लोगों ने उनकी दवाईयां शुरू कराईं। इम्युनिटी बूस्टर दिए। सुबह शाम योग प्राणायाम कराया। जिससे बहुत हौसला मिला। शौर्य का कहना है कि कोरोना को सकारात्मक सोच के साथ हराया जा सकता है। 6 दिन बाद वह ठीक हो गए और अब कोई परेशानी नहीं है। परिजनों की सलाह के मुताबिक योग-प्रणायाम कर रहे हैं।
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