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Agra News: दो बच्चों संग शौचालय में घुसी मादा कबर बिज्जू, घरवालों की निकली चीख
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बाह: चित्राहाट के पई गांव से रेस्क्यू कर कबर बिज्जू यमुना के बीहड़ में छोड़ा
बाह। यमुना के बीहड़ से अपने बच्चों के साथ निकली मादा कबर बिज्जू पई गांव के एक व्यक्ति के शौचालय में घुस गई। यह देख परिवार के लोगों की चीखें निकल गईं, बस्ती में अफरा तफरी मच गई। वन विभाग की टीम ने करीब 4 घंटे की मशक्कत के बाद इसे पकड़कर बीहड़ में छोड़ा। रेस्क्यू किए जाने तक गांव के लोग दहशत में रहे।
जैतपुर के पई गांव के कोटेदार कप्तान सिंह के घर के शौचालय में सोमवार दोपहर 1 बजे दो बच्चों के साथ मादा कबर बिज्जू घुस गई। शौच के लिए गए परिजन की कबर बिज्जू को देख कर चीखें निकल गई। बस्ती में भी दहशत फैल गई। लोग सहम उठे। ग्रामीणों की सूचना पर वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची। करीब 4 घंटे तक वन विभाग के कर्मचारी के इसे पकड़ने के लिए परेशान हुए। किसी तरह कबर बिज्जू को रेस्क्यू कर यमुना के बीहड़ में सुरक्षित छोड़ा गया। रेस्क्यू के दौरान कई बार कबर बिज्जू हमलावर भी हुई थी।
-ग्रामीणों की सूचना पर वन विभाग की टीम मौके पर गई थी। करीब 4 घंटे में कबर बिज्जू को रेस्क्यू कर यमुना के बीहड़ के प्राकृतिक रहवास में सुरक्षित छोड़ दिया गया। -राजवीर सिंह सेंगर, रेंजर जैतपुर।
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ऐसे होते हैं कबर बिज्जू
रेंजर के मुताबिक कबर बिज्जू (वैज्ञानिक नाम मेलिवोरा कैपेनसिस) की आंखें बेहद छोटी होती है। वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972 के शेड्यूल-1 में संरक्षित कबर बिज्जू नदियों, तालाबों के तटों में 25-30 फीट लंबी मांद (गुफानुमा घर) बनाकर रहते हैं। इसके शरीर का ऊपरी भाग भूरा, बगल और पेट काला तथा माथे पर चौड़ी सफेद धारी होती है। हर पैर पर पांच नाखून होते हैं जो मांद खोदने के काम आते हैं। यह अगले पैर से मांद खोदता है और पिछले पैरों से मिट्टी हटाता है। अपने नाखूनों से कब्र खोदकर मुर्दा तक खा लेता है। यह सर्वभक्षी है, जो फल मूल से लेकर कीट पतंग तक खाता है।
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जैतपुर के पई गांव के कोटेदार कप्तान सिंह के घर के शौचालय में सोमवार दोपहर 1 बजे दो बच्चों के साथ मादा कबर बिज्जू घुस गई। शौच के लिए गए परिजन की कबर बिज्जू को देख कर चीखें निकल गई। बस्ती में भी दहशत फैल गई। लोग सहम उठे। ग्रामीणों की सूचना पर वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची। करीब 4 घंटे तक वन विभाग के कर्मचारी के इसे पकड़ने के लिए परेशान हुए। किसी तरह कबर बिज्जू को रेस्क्यू कर यमुना के बीहड़ में सुरक्षित छोड़ा गया। रेस्क्यू के दौरान कई बार कबर बिज्जू हमलावर भी हुई थी।
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-ग्रामीणों की सूचना पर वन विभाग की टीम मौके पर गई थी। करीब 4 घंटे में कबर बिज्जू को रेस्क्यू कर यमुना के बीहड़ के प्राकृतिक रहवास में सुरक्षित छोड़ दिया गया। -राजवीर सिंह सेंगर, रेंजर जैतपुर।
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ऐसे होते हैं कबर बिज्जू
रेंजर के मुताबिक कबर बिज्जू (वैज्ञानिक नाम मेलिवोरा कैपेनसिस) की आंखें बेहद छोटी होती है। वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972 के शेड्यूल-1 में संरक्षित कबर बिज्जू नदियों, तालाबों के तटों में 25-30 फीट लंबी मांद (गुफानुमा घर) बनाकर रहते हैं। इसके शरीर का ऊपरी भाग भूरा, बगल और पेट काला तथा माथे पर चौड़ी सफेद धारी होती है। हर पैर पर पांच नाखून होते हैं जो मांद खोदने के काम आते हैं। यह अगले पैर से मांद खोदता है और पिछले पैरों से मिट्टी हटाता है। अपने नाखूनों से कब्र खोदकर मुर्दा तक खा लेता है। यह सर्वभक्षी है, जो फल मूल से लेकर कीट पतंग तक खाता है।