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इतना विश्वास कि कंक्रीट से लिख दी योगगाथा

Sun, 21 Jun 2015 02:35 AM IST
नीरज शर्मा
नीरज शर्मा Updated Sun, 21 Jun 2015 02:35 AM IST
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father john farera wrote yoggatha
बात सेंट पीटर्स
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कालेज के पूर्व प्रिंसिपल फादर जान फरेरा की है। 1974-1981 तक सेंट गुरुकुल, इलाहाबाद में पढ़ाई के दौरान वह अक्सर बीमार रहते। वहीं उनके टीचर फादर भट्ट ने उन्हें योग अपनाने की सलाह दी। इससे स्वास्थ्य में सुधार हुआ तो उन्होंने आचार्य सत्यानंद सरस्वती से विधिवत योग शिक्षा ग्रहण की। स्वामी शिवानंद के ऋषिकेश आश्रम में भी रहे। जब सेंट फ्लैक्स के प्रधानाचार्य तो बने तो बच्चों को प्रार्थना के दौरान योग की टिप्स देते। फिर हाथरस व एटा के स्कूल में भी योग की क्लास चलाईं। सेंट पीटर्स कालेज में छह साल के कार्यकाल में उन्होंने काफी काम किए। कालेज में बनवाई अनूठी योग गैलरी इनमें खास है। गैलरी में 60-65 प्रतिमाएं हैं जिन्हें देखकर आसन सीखे जा सकते हैं। मकसद रिक्शा, आटो-वैन चालकों समेत कालेज आने वाले हर व्यक्ति में योग के प्रति रुचि पैदा करना है। प्राइमरी के बच्चों के लिए ‘ग्रोअप विद योगा’ ‘हेल्थ वैल्थ एंड हेप्पीनेस’ ‘फोटो जर्नी’ ‘योग और स्वास्थ्य’ पुस्तकें भी लिखीं। अमेरिका, आस्ट्रेलिया, फिलीपींस आदि उन देशों में भी योग सिखाने गए जहां कभी उनकी पहल का विरोध हुआ था। फिलहाल वह आगरा में योग और नेचुरोपैथी सेंटर चला रहे हैं। कई स्कूलों में भी योग शिक्षा दे रहे हैं।
फादर फरेरा कहते हैं, ‘जो जान लेगा वह विरोध नहीं कर सकता। योग इंसान को खुद के अंदर झांकने की दृष्टि देता है। पहले व्यक्ति स्वयं से जुड़ता है और फिर अपने ईष्ट से। उसका ईष्ट चाहे जो हो। यानी योग धर्मपालन की राह में बाधा नहीं, बल्कि मददगार है।’

आगरा से रोम तक झेला विरोध
फादर फरेरा की योग यात्रा आसान नहीं थी। उन्हें सेंट पीटर्स स्कूल में उनकी पहल मसीही समाज और अभिभावकों रास नहीं आई। जब उन्होंने योग पर कार्यों के बारे में फेसबुक एकाउंट पर लिखना शुरू किया तो कई रोम, अमेरिका और आस्ट्रेलिया तक के ईसाई उनके विरोध में खड़े हो गए। लेकिन तब भी ऐसे भी लोग थे जिन्होंने उनकी पहल को सराहा। दरअसल विरोध करने वाले योग को धर्म विशेष से जोड़कर देख रहे थे। फादर फरेरा ने खुशी जताई कि लोगों को समझ आई और 21 जून को पूरी दुनिया योग करेगी।

छात्रों की जिंदगी बदल गई
हाथरस में प्रिंसिपल रहते फादर फरेरा ने लगातार फेल हो रहे 35 छात्रों पर योग आजमाया। इनसे नियमित योग कराया गया। नतीजा चमत्कारिक था। सफलता की आस छोड़ चुके इन छात्रों ने दसवीं और 12 वीं की परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन किया। अच्छे परिणामों के लिए इनके अभिभावकों को भी योग क्लास में बुलाया जाता था।
 

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