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UP: किसानों का दर्द न दिखाई दिया...बुवाई पर सोते रहे अफसर, पकी फसल पर चला दिया बुलडोजर

Wed, 19 Feb 2025 11:58 AM IST
धीरेन्द्र सिंह अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा Published by: धीरेन्द्र सिंह Updated Wed, 19 Feb 2025 11:58 AM IST
सार

यमुना की खादर में फसल बुवाई करने वाले 100 से अधिक किसानों ने कलेक्ट्रेट में प्रदर्शन किया। प्रशासन से किसानों ने फसल काटने की मोहलत मांगी है।
 

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Farmers' pain was not visible Officers kept sleeping on sowing bulldozers ran on ripe crops
कलेक्ट्रेट में प्रदर्शन करते किसान - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

यमुना की खादर में पकी फसल पर बुलडोजर चलाने से नाराज सींगना ग्राम पंचायत के किसानों ने मंगलवार को कलेक्ट्रेट में प्रदर्शन किया। किसानों का आरोप था कि जब फसल की बुवाई की जा रही थी, उस समय तो कोई भी प्रशासनिक अफसर रोकने नहीं आया। अब पकी फसल पर बुलडोजर चलाकर किसानों की मेहनत को मिट्टी में मिला दिया। डीएम से मिलने पर अड़े किसानों ने करीब छह घंटे तक प्रदर्शन करने के बाद बुधवार को दोबारा कलेक्ट्रेट आने की चेतावनी दी।
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कलेक्ट्रेट पहुंचे किसानों ने मांग की है कि उन्हें पकी फसल काटने की मोहलत दी जाए। किसानों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मेहनत की गाढ़ी कमाई को बुलडोजर से नष्ट किया गया तो वह सामूहिक रूप से कलक्ट्रेट में आमरण अनशन करेंगे। सींगना ग्राम पंचायत में यमुना की खादर में करीब 100 हेक्टेयर भूमि पर 200 से अधिक किसानों की आलू, सरसों व गेंहू की फसल है। रविवार को प्रशासन ने करीब 40 बीघा खड़ी फसल पर बुलडोजर चलाया। इससे कानून व्यवस्था बिगड़ने की स्थिति तक उत्पन्न हो गई।
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नीलामी में किसानों से वसूले थे 90 हजार
किसानों ने डीएम के न मिलने पर एडीएम से मुलाकात कर फसल पर बुलडोजर नहीं चलाए जाने की गुहार लगाई। यहां पर समाधान न होने के चलते किसान डीएम से मिलने पर अड़े रहे। शाम 5 बजे तक डीएम नहीं पहुंचे तो किसानों ने विरोध-प्रदर्शन किया। साढ़े पांच बजे किसान बुधवार को फिर आने की कहकर चले गए। किसान नेता चौधरी दिलीप सिंह ने बताया कि 50 साल से किसान खादर में खेती से अपने बच्चों का पेट पाल रहे हैं। उनके खेत नदी किनारे थे, जो यमुना की धारा बदलने से नदी में डूब गए। इसलिए जहां जगह मिली उन्होंने फसल बोई। जब फसल बोई तब प्रशासन ने नहीं रोका। नीलामी के नाम पर प्रशासन ने किसानों से पिछले साल 90 हजार रुपये भी वसूले थे। होली तक फसल कट जाएगी। तब तक किसानों को मोहलत दी जानी चाहिए।
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