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खेतों में ही अंकुरित होने लगी धान और बाजरा की गिरी फसल
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मैनपुरी। जिले में दो दिन 18 और 19 अक्तूबर को तेज हवा के साथ हुई बारिश ने धान और बाजरा की फसलों को बुरी तरह प्रभावित किया है। खेतों में फसलों के गिरने से उनका अंकुरण शुरू हो गया है। वहीं जलभराव के चलते किसानों को फसलों की कटाई के लिए इंतजार करना पड़ रहा है। इससे वे परेशान हैं।
दोनों दिनों में कुल बारिश तो 30 मिमी ही हुई, लेकिन हवाओं ने खेत में तैयार खड़ी धान और बाजरा की फसल को नुकसान पहुंचाया। जिले में धान की खेती बड़े पैमाने पर की जाती है। लगभग दो लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में डेढ़ लाख से अधिक किसान धान उगाते हैं। पानी की उपलब्धता के चलते उत्पादन भी बेहतर होता है। इस बार भी खेतों में धान की फसल पककर तैयार थी। कटाई का काम भी शुरू हो चुका था, लेकिन हवा के साथ हुई बारिश से धान की फसल खेतों में ही बिछ गई है। इससे पककर तैयार हुए दानों का अंकुरण शुरू हो गया है। किसान चाहकर भी खेतों में पानी होने के कारण फसल की कटाई नहीं कर पा रहे हैं। यही हाल बाजरा की फसल का है। जिला कृषि अधिकारी डॉ. सूर्यप्रताप सिंह का कहना है कि फसलों में नुकसान तो हुआ है, लेकिन कितना ये क्रॉप कटिंग होने के बाद ही पता चल सकेगा।
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फसल की गुणवत्ता भी प्रभावित
खेतों में धान और बाजरा की फसल गिरने से दानों का अंकुरण होने लगा है। ये दाने पूरी तरह से खराब हो गए हैं। वहीं बाली में जो दाने सही हैं उनकी भी गुणवत्ता प्रभावित हुई है। बारिश और नमी के चलते उनका रंग काला पड़ गया है। ऐसे में मंडी में इस फसल का दाम भी सामान्य से कम मिलेगा।
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जल्द कटाई दिलाएगी राहत
कृषि विज्ञान केंद्र के मौसम वैज्ञानिक नरेंद्र कुमार वर्मा बताते हैं खेतों में गिरी फसल का अंकुरण शुरू हो गया है। किसानों को इस बात का ध्यान रखना होगा कि खेत की नमी सूखते ही तत्काल फसलों की कटाई शुरू कर दें। इससे बाकी बची फसल को नुकसान होने से काफी हद तक बचाया जा सकेगा।
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दोनों दिनों में कुल बारिश तो 30 मिमी ही हुई, लेकिन हवाओं ने खेत में तैयार खड़ी धान और बाजरा की फसल को नुकसान पहुंचाया। जिले में धान की खेती बड़े पैमाने पर की जाती है। लगभग दो लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में डेढ़ लाख से अधिक किसान धान उगाते हैं। पानी की उपलब्धता के चलते उत्पादन भी बेहतर होता है। इस बार भी खेतों में धान की फसल पककर तैयार थी। कटाई का काम भी शुरू हो चुका था, लेकिन हवा के साथ हुई बारिश से धान की फसल खेतों में ही बिछ गई है। इससे पककर तैयार हुए दानों का अंकुरण शुरू हो गया है। किसान चाहकर भी खेतों में पानी होने के कारण फसल की कटाई नहीं कर पा रहे हैं। यही हाल बाजरा की फसल का है। जिला कृषि अधिकारी डॉ. सूर्यप्रताप सिंह का कहना है कि फसलों में नुकसान तो हुआ है, लेकिन कितना ये क्रॉप कटिंग होने के बाद ही पता चल सकेगा।
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फसल की गुणवत्ता भी प्रभावित
खेतों में धान और बाजरा की फसल गिरने से दानों का अंकुरण होने लगा है। ये दाने पूरी तरह से खराब हो गए हैं। वहीं बाली में जो दाने सही हैं उनकी भी गुणवत्ता प्रभावित हुई है। बारिश और नमी के चलते उनका रंग काला पड़ गया है। ऐसे में मंडी में इस फसल का दाम भी सामान्य से कम मिलेगा।
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जल्द कटाई दिलाएगी राहत
कृषि विज्ञान केंद्र के मौसम वैज्ञानिक नरेंद्र कुमार वर्मा बताते हैं खेतों में गिरी फसल का अंकुरण शुरू हो गया है। किसानों को इस बात का ध्यान रखना होगा कि खेत की नमी सूखते ही तत्काल फसलों की कटाई शुरू कर दें। इससे बाकी बची फसल को नुकसान होने से काफी हद तक बचाया जा सकेगा।