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UP: कुवैत, अजरबैजान और ओमान में नौकरी...ऑफर ऐसा कोई मना न कर पाए; 1500 युवाओं से तीन करोड़ की ठगी
Sat, 06 Sep 2025 08:36 AM IST
धीरेन्द्र सिंह
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Sat, 06 Sep 2025 08:36 AM IST
सार
दिल्ली गिरोह ने आगरा के संजय प्लेस में फर्जी प्लेसमेंट एजेंसी खोलकर 1500 युवाओं से विदेश में नौकरी दिलाने के नाम पर करीब 3 करोड़ रुपये की ठगी की। पुलिस ने बीए पास सरगना अंकित गुप्ता सहित सात लोगों को गिरफ्तार कर फर्जी वीजा, पासपोर्ट और नियुक्तिपत्र बरामद किए।
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विदेश में नौकरी के नाम पर ठगी के आरोपी
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विस्तार
दिल्ली के गिरोह ने संजय प्लेस में फर्जी प्लेसमेंट एजेंसी का कार्यालय खोलकर विदेश में नाैकरी लगवाने का झांसा देकर 1500 युवाओं से तीन करोड़ की ठगी कर ली। गिरोह युवाओं को कुवैत, अजरबैजान और ओमान में नाैकरी के सपने दिखाता था। पासपोर्ट और वीजा बनाने के नाम पर 45 हजार रुपये लेकर फर्जी नियुक्तिपत्र थमा देता था। वीजा लेकर दूतावास पहुंचने पर लोगों को धोखाधड़ी की जानकारी होती थी। पिछले पांच साल में 12 राज्यों के युवाओं से ठगी की गई। थाना हरीपर्वत पुलिस ने शुक्रवार को गिरोह के सरगना सहित सात आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
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डीसीपी सिटी सोनम कुमार ने बताया कि संजय प्लेस में फर्जी प्लेसमेंट एजेंसी संचालित होने की जानकारी मिली थी। इस पर टीम को लगाया गया। सत्यम काॅम्प्लेक्स में एसआई ओवरसीज के नाम से चल रही प्लेसमेंट एजेंसी पर छापा मारकर सात आरोपियों को पकड़ लिया। गिरोह का सरगना अंकित गुप्ता है। वह बीए पास है। उसके खिलाफ वर्ष 2022 में दिल्ली में केस दर्ज हुआ था। वह ढाई महीने जेल में भी रहा था। आरोपियों से पूछताछ में पता चला कि वह अलग-अलग राज्यों में ऑफिस खोलते थे। लड़कियों को टेलीकाॅलिंग की नाैकरी देते थे। फेसबुक, यूट्यूब, इंस्टाग्राम सहित सोशल मीडिया साइट्स पर भी विज्ञापन देते थे।
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युवाओं को बताते थे कि एजेंसी के संपर्क में कुवैत, अजरबैजान और ओमान की कई मल्टीनेशनल कंपनियां हैं। उन्हें चालक, प्लंबर, फिटर, तकनीशियन, पेंटर, क्रेन ऑपरेटर, सिक्योरिटी गार्ड, सीसीटीवी कैमरों के ऑपरेटर, स्टोरकीपर की आवश्यकता है। वीजा और पासपोर्ट बनवाने का आश्वासन देते थे। जो लोग तैयार होते थे, उनसे 45 हजार रुपये तक लेते थे। इसके बाद दूतावास की फर्जी मुहर लगाकर वीजा दे देते थे। फर्जी नियुक्तिपत्र बनाकर व्हाट्सएप पर भेज देते थे। इस प्रक्रिया में दो से तीन महीने का समय लगता था। जब तक लोग वीजा लेकर दूतावास पहुंचते थे, तब तक आरोपी एजेंसी बंद कर फरार हो जाते थे।
इनकी हुई गिरफ्तारी
पुलिस ने दिल्ली के थाना मधुविहार निवासी अंकित गुप्ता और रजनी कांत उर्फ लल्ला, ज्योति काॅलोनी शहादरा निवासी विजय कुमार, थाना मंडावली निवासी विशाल मेहता, दुर्गा गली बाबरपुर शहादरा निवासी राजेश शर्मा, बलवीर एक्सटेंशन निवासी नवनीत जैन और गाजियाबाद के थाना नंदग्राम निवासी हेमंत शर्मा को गिरफ्तार किया है। उनसे बड़ी मात्रा में फर्जी नियुक्तिपत्र, वीजा, पासपोर्ट, डिजिटल मुहरें, कंप्यूटर, प्रिंटर आदि बरामद किया। तीन डेबिट कार्ड भी बरामद किए गए हैं।
पुलिस ने दिल्ली के थाना मधुविहार निवासी अंकित गुप्ता और रजनी कांत उर्फ लल्ला, ज्योति काॅलोनी शहादरा निवासी विजय कुमार, थाना मंडावली निवासी विशाल मेहता, दुर्गा गली बाबरपुर शहादरा निवासी राजेश शर्मा, बलवीर एक्सटेंशन निवासी नवनीत जैन और गाजियाबाद के थाना नंदग्राम निवासी हेमंत शर्मा को गिरफ्तार किया है। उनसे बड़ी मात्रा में फर्जी नियुक्तिपत्र, वीजा, पासपोर्ट, डिजिटल मुहरें, कंप्यूटर, प्रिंटर आदि बरामद किया। तीन डेबिट कार्ड भी बरामद किए गए हैं।
नहीं मिली ठगी की रकम
पुलिस ने भारी मात्रा में फर्जी दस्तावेज बरामद किए हैं मगर ठगी की रकम नहीं मिली। तीन करोड़ की ठगी का दावा किया गया है। यह रकम कहां और किन लोगों के खाते में गई? यह भी पता नहीं चल सका है। इसी तरह साइबर अपराधी भी पुलिस पकड़ती है मगर रकम के नाम पर कुछ भी बरामदगी नहीं होती। इससे पीड़ित भटकते ही रहते हैं।
पुलिस ने भारी मात्रा में फर्जी दस्तावेज बरामद किए हैं मगर ठगी की रकम नहीं मिली। तीन करोड़ की ठगी का दावा किया गया है। यह रकम कहां और किन लोगों के खाते में गई? यह भी पता नहीं चल सका है। इसी तरह साइबर अपराधी भी पुलिस पकड़ती है मगर रकम के नाम पर कुछ भी बरामदगी नहीं होती। इससे पीड़ित भटकते ही रहते हैं।
झांसे में न आएं
लोग इस तरह के झांसे में नहीं आएं। अगर कोई व्यक्ति कम रकम लेकर विदेश में नाैकरी की बात करता है तो समझ जाएं धोखाधड़ी होनी तय है। इसके बारे में पुलिस को जरूर बताएं। पुलिस कार्रवाई करेगी। - सोनम कुमार, डीसीपी सिटी
लोग इस तरह के झांसे में नहीं आएं। अगर कोई व्यक्ति कम रकम लेकर विदेश में नाैकरी की बात करता है तो समझ जाएं धोखाधड़ी होनी तय है। इसके बारे में पुलिस को जरूर बताएं। पुलिस कार्रवाई करेगी। - सोनम कुमार, डीसीपी सिटी
दोबारा खोला ऑफिस, युवतियां करती थीं फोन
डीसीपी सिटी सोनम कुमार ने बताया कि पकड़े गए गिरोह के सदस्य नवनीत जैन और हेमंत शर्मा फर्जी नियुक्तिपत्र और वीजा बनाते थे। विजय कुमार, राजेश शर्मा और विशाल मेहता लोगों को काॅल करते थे। वीजा भी तैयार करते थे। इन पर दूतावास की फर्जी मुहर लगाकर लोगों को दे थे। जब लोग दूतावास जाते, तो वीजा का रिकाॅर्ड नहीं मिलने पर शिकायत करते थे तब तक आरोपी फरार हो जाते थे। आरोपियों ने पहले भी संजय प्लेस में जियान और होली इंटरनेशनल के नाम से ऑफिस खोला था। उसमें दो युवतियां काम करती थीं। एक सप्ताह पहले एसआई ओवरसीज के नाम से ऑफिस खोला। सरगना अंकित ने युवतियों से नाैकरी के लिए बात की मगर उन्होंने इन्कार कर दिया। वह कुछ कर पाते, उससे पहले ही पुलिस ने पकड़ लिया। आरोपियों से एक कार भी बरामद हुई, जो नवनीत जैन की है।
डीसीपी सिटी सोनम कुमार ने बताया कि पकड़े गए गिरोह के सदस्य नवनीत जैन और हेमंत शर्मा फर्जी नियुक्तिपत्र और वीजा बनाते थे। विजय कुमार, राजेश शर्मा और विशाल मेहता लोगों को काॅल करते थे। वीजा भी तैयार करते थे। इन पर दूतावास की फर्जी मुहर लगाकर लोगों को दे थे। जब लोग दूतावास जाते, तो वीजा का रिकाॅर्ड नहीं मिलने पर शिकायत करते थे तब तक आरोपी फरार हो जाते थे। आरोपियों ने पहले भी संजय प्लेस में जियान और होली इंटरनेशनल के नाम से ऑफिस खोला था। उसमें दो युवतियां काम करती थीं। एक सप्ताह पहले एसआई ओवरसीज के नाम से ऑफिस खोला। सरगना अंकित ने युवतियों से नाैकरी के लिए बात की मगर उन्होंने इन्कार कर दिया। वह कुछ कर पाते, उससे पहले ही पुलिस ने पकड़ लिया। आरोपियों से एक कार भी बरामद हुई, जो नवनीत जैन की है।
फर्जी आईडी पर खोले गए खातों में ली जाती थी रकम
अपर पुलिस उपायुक्त आदित्य सिंह ने बताया कि आरोपी होली इंटरनेशनल, जियान इंटरनेशनल, प्राउड इंटरनेशनल, एसआई ओवरसीज, मोने ओवरसीज और ओमेक्स इंटरनेशनल से संबंधित कंपनी के नाम लेते थे। यह सभी फर्जी कंपनी हैं। लोगों से ऑनलाइन रकम लेने के लिए आरोपी रजनीकांत उर्फ लल्ला खाते और फर्जी सिम की व्यवस्था करता था। इसके साथ ही गरीब और कम पढ़े लिखे लोगों के आधार कार्ड लेकर सिम खरीदते थे। बदले में कुछ रकम दे देते थे। रकम नकद भी ली जाती थी। रकम खाते में जमा होने के कुछ देर बाद ही निकाल लिया करते थे। जिस जगह पर ऑफिस खोलते थे, उसके मालिक को फर्जी किरायानामा बनाकर देते थे।
अपर पुलिस उपायुक्त आदित्य सिंह ने बताया कि आरोपी होली इंटरनेशनल, जियान इंटरनेशनल, प्राउड इंटरनेशनल, एसआई ओवरसीज, मोने ओवरसीज और ओमेक्स इंटरनेशनल से संबंधित कंपनी के नाम लेते थे। यह सभी फर्जी कंपनी हैं। लोगों से ऑनलाइन रकम लेने के लिए आरोपी रजनीकांत उर्फ लल्ला खाते और फर्जी सिम की व्यवस्था करता था। इसके साथ ही गरीब और कम पढ़े लिखे लोगों के आधार कार्ड लेकर सिम खरीदते थे। बदले में कुछ रकम दे देते थे। रकम नकद भी ली जाती थी। रकम खाते में जमा होने के कुछ देर बाद ही निकाल लिया करते थे। जिस जगह पर ऑफिस खोलते थे, उसके मालिक को फर्जी किरायानामा बनाकर देते थे।